धान, पान और आम के बाद मुजफ्फरपुर की शाही लीची को भी जल्द मिल जाएगा GI टैग

बिहार के जर्दालु आम, मगही पान और कतरनी धान को जीआइ टैग (ज्योग्रफिकल इंडिकेशन) मिल चुका है. अब बिहार की शाही लीची को भी जल्द जीआइ मिल जाएगा. 

धान, पान और आम के बाद मुजफ्फरपुर की शाही लीची को भी जल्द मिल जाएगा GI टैग
मुजफ्फरपुर की शाही लीची को जीआइ टैग जल्द मिलने वाला है. (प्रतीकात्मक फोटो)

मुजफ्फरपुरः बिहार के जर्दालु आम, मगही पान और कतरनी धान को जीआइ टैग (ज्योग्रफिकल इंडिकेशन) मिल चुका है. अब बिहार की शाही लीची को भी जल्द जीआइ मिल जाएगा. इसका इंतजार बेसब्री से किया जा रहा है. मुजफ्फरपुर में मिलने वाली शाही लीची पर अब जल्द ही केवल बिहार का एकाधिकार होगा.

बिहार के 11 सामग्रियों को जीआइ टैग मिल चुका है. जिसमें से अब शाही लीची के शामिल होने का इंतजार किया जा रहा है. बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (भौगोलिक संकेतक) जर्नल में शाही लीची पर बिहार की दावेदारी का प्रकाशन जल्द ही होने वाला है.

प्रकाशन होने के बाद बिहार के दावे को तीन महीने तक पब्लिक डोमेन में रखा जाएगा. अगर किसी राज्य ने इस दौरान कोई आपत्ति नहीं जतायी तो शाही लीची पर केवल बिहार का एकाधिकार होगा. साल 2016 के अक्टूबर में बिहान द्वारा भागलपुर के कतरनी धान, जर्दालु आम और मगही पान समेत शाही लीची को जीआइ टैग दिलाने के लिए आवेदन किया गया था.

धान, आम, पान पर तो बिहार का दावा मान लिया गया लेकिन शाही लीची के दावे को नहीं माना गया था. बताया जाता है कि आवेदन की प्रक्रिया में भी त्रुटि थी. अब किसानों ने दोबारा आवेदन किया है. जर्नल के मुताबिक शाही लीची पर बिहार की दावेदारी को प्रारंभिक तौर पर मान लिया है, और अब जुलाई के अंक में इसके प्रकाशित होने का इंतजार है.

ज्योग्राफिकल इंडिकेशन जर्नल प्रत्येक छह महीने में प्रकाशित होता है. इसका मुख्य मकसद उत्पादों को संरक्षण देना होता है. देश में सबसे पहले साल 2004 में पश्चिम बंगाल को दार्जिलिंग चाय का जीआई टैग दिया गया था.

देश के अब तक 320 सामग्रियों को जीआइ टैग मिल चुका है. इनमें बिहार के 11 सामग्रियों को जीआइ टैग में शामिल किया जा चुका है.