DM का सपना बना देश के लिए मिसाल, जानिए कैसे किया उन्होंने कोरोना काल में कमाल...

Bettiah Samachar: कुंदन कुमार वही डीएम है जिन्होंने बांका जिला में पांच सरकारी विद्यालयों से Smart Class की शुरुवात की थी. इसके बाद उसकी गूंज अमेरिका के ड्यूक यूनिवर्सिटी तक छा गई.       

DM का सपना बना देश के लिए मिसाल, जानिए कैसे किया उन्होंने कोरोना काल में कमाल...
DM का सपना बना देश के लिए मिशाल.

Bettiah: एक ऐसा डीएम जिसका ड्रीम कभी देश के लिए मिशाल बन जाता है तो कभी राज्य के लिए रोल मॉडल. डीएम के ड्रीम को सीएम नीतीश कुमार भी प्रोत्साहन देते है. दरअसल, हम बात कर रहे है एक जिलाधिकारी की जिसने ऐसे-ऐसे प्रयोग किए है जो देश और राज्य के लिए अनुकरणीय, मिसाल और रोल मॉडल बन गए है. बेतिया के डीएम कुंदन कुमार जिनकी सोच अन्य अधिकारियों से बिल्कुल अलग है जिसके चलते उनके द्वारा किया गया प्रयोग आज राज्य और देश के लिए रोल मॉडल बन गया है.

आईएएस बनने से पहले कुंदन कुमार 2009 बैच के IPS थे. उत्तराखंड कैडर में तीन साल आईपीएस रहे फिर 2012 में IAS बने. इसके पहले मुंबई में पांच साल तक रिलायंस में बड़े पदाधिकारी रहे. आईएएस, आईपीएस और इंजीनियर तीनो ही क्षेत्र की जानकारी और स्टडी इस IAS को औरों से अलग कर देती है.

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बता दें कि कुंदन कुमार वही डीएम है जिन्होंने बांका जिला में पांच सरकारी विद्यालयों से Smart Class की शुरुवात की थी. इसके बाद उसकी गूंज अमेरिका के ड्यूक यूनिवर्सिटी तक छा गई. स्मार्ट क्लास के जरिए गुणवक्ता पूर्ण शिक्षा देने की तकनीक उन्नयन के प्रणेता डीएम कुंदन कुमार ने वहां आयोजित समारोह में अमेरिकी विवि के छात्रों को विस्तार पूर्वक जानकारी दी थी. दरअसल, America के गुयाना टाउन में उन्नयन कार्यक्रम ने Singapore और Malaysia जैसे देशों को पछाड़ कर कैम्पम अवार्ड जीता था. भारत के लिए Commonwealth Innovation Awards जीतकर लाना इस डीएम के ड्रीम को जताता है.

इसके बाद वहां के लोगों को इसके बारे में जानकारी की उत्सुकता बढ़ गई थी. इंटरनेशनल स्तर पर उन्नयन को अवार्ड मिलने पर अमेरिका के नार्थ कैरोलिना स्थित Duke University ने Kundan Kumar को लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया था. अमेरिका के जार्ज टाउन में बांका उन्नयन को अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिला. यह एक डीएम की सकारात्मक पहल सकारात्मक सोच मोबाइल ऐप के जरिए गुणवक्ता पूर्ण शिक्षा की सफल प्रयोग की कहानी है.

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अब बात करते है पश्चिम चंपारण, बेतिया में डीएम कुंदन कुमार के दूसरे प्रयोग की. एक तरफ जहां ये कहानी बिहार के लिए रोल मॉडल बन गई है तो वहीं देश के लिए मिसाल. चनपटिया का स्टार्टअप जोन आज बिहार के लिए रोल मॉडल है. इस स्टार्टअप जोन को CM Nitish Kumar ने देख डीएम की सराहना की और राज्य के सभी जिलों में इसी तर्ज पर स्टार्टअप लगाने का महाप्रबन्धको को आदेश दिया.

क्या है ये स्टार्टअप जोन

Corona जैसी वैश्विक माहमारी में जंहा पुरा विश्व जिन्दगी जिने की जंग लड़ रहा हैं. उस दौर में इस भीषण आपदा को अवसर में बदलने का जो काम पश्चिम चम्पारण में हुआ हैं वैसा शायद ही कहीं देखने को मिले. कोरोनो को लोग पुरे विश्व के लिए एक अभिषाप की तरह देख रहें हैं लेकिन इसी कोरोना के कारण आज दुसरे राज्यो में मजदूरी करने वाले लोग अपने घर में उद्दमी बन गए हैं. क्वारंटाइन सेंटर में डीएम द्वारा चलाए गए स्किल मैपिंक की योजना रंग लाई और क्वारंटाइन सेंटर से ऐसे-ऐसे हुनरमंद लोग सामने आने लगे जो आज तक दूसरे राज्यों के लिए काम कर वहां के विकास में भागीदार बन रहे थे.

फिर क्या था डीएम कुंदन कुमार ने सभी को उनके हुनर के मुताबिक काम करने की छुट दी. बैंको से ऋण उपलब्ध करवाया और फिर जगह देकर उन्हें मजदुर से मालिक बना दिया. जिसका नतीजा है कि चम्पारण क्रिएसन जैसी संस्था सरपट दौड़ने लगी और अब लेह लद्दाख के साथ-साथ कोलकाता के लोग भी बेतिया ब्रांड के कपड़े पहनने को मजबूर हैं.

कोरोना काल में जब लोग परेशान थे, कलकारखानों पर ताले लग रहें थे, लोग अपनी नौकरियां गंवा घर वापस आ रहे थे, कोरोना के खौफ से लोग घरों में कैद हो गए थे. तब डीएम कुंदन कुमार प्रयोग कर रहे थे. डीएम अपने अतीत और इतिहास को दोहरा रहे थे. मजदूर देश के विभिन्न राज्यों से अपनी नौकरियां गवां घर वापसी कर रहे थे, तो जिले में बना Quarantine Center उनका इंतजार कर रहा था. यहां नौकरी गंवा घर वापस आए मजदूरों की जिंदगी में सकारात्मक ऊर्जाएं भरी जा रही थी. मजदूरों को मालिक बनाने का प्रयोग किया जा रहा था. सब कुछ गंवा बैठे मजदूरों को आत्मनिर्भर बनाने का सपना दिखाया जा रहा था. यह कोरी कल्पना नहीं थी, यह डीएम कुंदन कुमार का प्रयोग था जो सफल हो गया.

प्रयोग की सफलता की गाथा आज चनपटिया लिख रहा है. आज सैकड़ों मजदूर मालिक बन गए है. सैकड़ों मजदूरों को काम मिल गया है. औद्योगिक हब बनने की तरफ चम्पारण अग्रसर है. चम्पारण के चनपटिया बाजार समिति रेडीमेड गारमेंट्स के उद्योग लगाए गए है. मजदूरों के बनाए गए कपड़े, साड़ी, लहंगा, जीन्स, पेंट, जैकेट, शर्ट, लेगिन्स, ब्लेजर, बैट-बल्ला आदि लद्दाख, कोलकाता, कश्मीर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में जा रहे है. वह भी लाखों में.

यह सकारात्मक सोच कैसे धरातल पर उतरी, यह जानना भी बेहद जरूरी है. जब दूसरे शहरों और राज्यों से बेबस, लाचार, मजबूर, मजलूम, मजदूर, कोरोना काल में जिले में वापसी कर रहे थे. तो वहां जिले के जिलापदधिकारी कुंदन कुमार इन बेबस लाचार मजदूरों का इंतजार कर रहे थे. आने वाले हर मजदूरों से उनके काम के बारे में डीएम जानकारी ले रहे थे. सभी में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहे थे. सभी को मजदूर से मालिक बनाने का सपना दिखा रहे थे. उनका यह प्रयोग रंग लाया. जो मजदूर जिन कार्यो में दक्ष थे. उनको उसका उद्योग लगाने का अवसर दिया गया. डीएम ने बैंकों से सभी को पांच से 25 लाख तक ऋण दिलवाए. किसी ने बैट-बल्ला बनाना शुरू किया, तो किसी ने रेडीमेड गारमेंट्स की फैक्ट्री ही लगा दी. सभी को चनपटिया बाजार समिति में प्रशासन के द्वारा जगह भी मुहैया करा दी गई है.

स्टार्टअप जोन एक नजर में

  • अभी तक यंहा 49 उधमियों को जमीन आवंटन किया जा चुका है.
  • 93 उधमियों को जमीन आवंटन हेतु प्रक्रिया जारी है.
  • 20 उधमियों द्वारा उधम स्थापित किया जा चुका है.
  • 15 उधमी चनपटिया से बाहर उधम स्थापित किए गए है.
  • उधमियों द्वारा अभी तक चार करोड़ सत्तर लाख की बिक्री की गई है.
  • उधमी दो करोड़ 25 लाख का मशीन अभी तक लगवा चुके है.
  • उधमियों से राज्य सरकार प्रति महीने 93 हजार का राजस्व मुनाफा भी ले रही है.
  • उधम स्थापित होने से अभी तक प्रत्यक्ष रूप से 450 मजदूरों को रोजगार मिला है जो प्रति मन्थ दस से 15 हजार रुपए कमा रहे है.
  • चनपटिया स्टार्टअप जोन में अभी तक पी.एम.ई.जी.पी. के माध्यम से चार करोड़ 14 लाख ऋण उधमियों को दिया जा चुका है.
  • अभी 228 से अधिक उधमियों के आवेदन पर जिला प्रशासन काम कर रही है.

चनपटिया के स्टार्टअप जोन में आज कश्मीरी लकड़ी से बैट-बल्ला बनाए जा रहे है. कश्मीर से आए मजदूर को दस लाख का ऋण देकर जिला प्रशासन ने काम शुरू कराया. आज WC लोगो के साथ बल्ला मार्केट में बिक रहा है. अभी तक दो हजार बल्लें बिक चुके है. Sanitary napkin की भी फैक्ट्री लग गई है और यंहा पर चम्पारण ब्रांड नाम देकर पैड की बिक्री की जा रही है. साड़ी, लहंगा, लोअर, लैगिंस, जीन्स, शर्ट, पैंट, जीन्स आदि रेडीमेड गारमेंट की फैक्ट्री लग गई है. सभी चम्पारण ब्रांड से मार्केट में अपना कारोबार कर रहे है.

यही नहीं, लेह लद्दाख, स्पेन, दुबई कतर, नेपाल तक चंपारण ब्रांड की निर्यात की जा रही है. अभी तक चार करोड़ 70 लाख की बिक्री हो चुकी है मजदूर से उधमी बने लोगों ने बताया कि, 'लाकडाउन में जब हमलोग वापस आए तो डीएम कुंदन कुमार ने हमे प्रेरित किया और आज हम मजदूर से मालिक बन गए है और दूसरे को रोजगार भी दे रहे है.' वंही मजदूर जानकी देवी, बेबी मिश्रा ने बताया कि, 'घर पर रहकर हमलोग प्रतिदिन दो सौ से ढाई सौ रुपए कमा रहे है.' तो वंही अन्य मजदूर दस से 15 हजार प्रति मन्थ कमा रहे है. डीएम कुंदन कुमार की सकारात्मक सोच आज पूरे बिहार का रोल मॉडल बन गई है. डीएम का कहना है कि एक पूरी टीम वर्क से यह सफल हो पाया है.

चम्पारण के चनपटिया में कोरोना काल में डीएम कुंदन कुमार ने  प्रयोग कर अपने इतिहास व अतीत को दोहरा दिया हैं. बापू के सपनों को साकार कर कोरोना काल में आज चम्पारण के चनपटिया में मजदूर मालिक बन गए है. डीएम कुंदन कुमार ने बांका में उन्नयन बिहार का प्रयोग कर अपने नाम की डंका अमेरिका तक बाजवा दिया था. अब फिर एक बार चम्पारण में एक प्रयोग कर अपने नाम की डंका देश मे बाजवा दिया है. चनपटिया के इस प्रयोग को स्टार्टअप जोन को देखने खुद सीएम आए और इससे प्रभावित होकर सीएम ने पूरे राज्य में इसे लागू करने का आदेश दिया.

बिहार के सभी जिलों के महाप्रबन्धनको ने चनपटिया का दौरा किया और चनपटिया के तर्ज पर सभी जिलों में स्टार्टअप जोन आज बना दिए गए है. जिससे सभी जिलों में रोजगार सृजन की सम्भावनाये बढ़ गई है. हुनरमंदों को उधमी बनने का अवसर मिल रहा है और क्षेत्रीय मजदूरों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे है. यह प्रयोग आपदा में अवसर के समान था जिसे डीएम ने धरातल पर उतारा और PM Narendra Modi और CM Nitish Kumar के आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर बिहार स्लोगन को अमली जमा पहना दी.

(इनपुट- धनंजय द्विवेदी)