बिहारः मिड डे मिल में रोज-रोज गड़बड़ी से भड़के छात्र, शिक्षकों को बंधक बना किया NH जाम

बिहार के समस्तीपुर के उजियारपुर में एमडीएम में गड़बड़ी की शिकायत को लेकर छात्रों ने जमकर हंगामा किया है.

बिहारः मिड डे मिल में रोज-रोज गड़बड़ी से भड़के छात्र, शिक्षकों को बंधक बना किया NH जाम
समस्तीपुर में मिड डे मिल पर छात्रों का बवाल.

समस्तीपुरः बिहार के समस्तीपुर के उजियारपुर में मिड डे मिल में गड़बड़ी की शिकायत को लेकर छात्रों ने जमकर हंगामा किया है. गुस्साए छात्रों ने स्कूल के शिक्षकों को बंधक बना लिया. साथ ही बच्चों ने एनएच-28 को घंटो जाम किया. इस बीच जमकर सड़क पर बवाल हुआ. वहीं, एसडीओ के पहल के बाद बच्चों को समझाया गया. जिसके बाद मामला शांत किया गया. 

उजियारपुर प्रखंड के राजकीय उत्क्रमित मध्य विधालय चांदचौर डीह में घटिया मिड डे मिल दिए जाने को लेकर छात्रों ने जमकर बबाल काटा है. गुस्साए छात्रों ने पहले तो स्कूल के सभी शिक्षकों को कमरे में बंद कर बंधक बना लिया. यही नहीं बच्चों ने चांदचौर के पास एनएच-28 को जाम कर घंटो हंगामा किया. 

बच्चो ने इस दौरान प्रधानाध्यापक के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की. हंगामा कर रहे छात्रों का कहना है की विद्यालय के प्रधानाध्यापक के द्वारा बच्चों को घटिया भोजन परोसा जाता है. और बच्चों के द्वारा शिकायत करने पर उनकी पिटाई की जाती है. रोज-रोज की घटना से नाराज होकर सभी छात्रों ने प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. और उग्र प्रदर्शन करने लगे. 

Bihar student protest against principal for Mid Day meal in samastipur

छोटे छोटे स्कूली छात्रों के द्वारा शिक्षक को बंधक बना सड़क जाम के दौरान रास्ते से गुजर रहे पंचायत समिति सदस्य को रोक लिया. जिसके बाद पंचायत समिति ने अधिकारियों को सूचित किया. मामले की सूचना पर दलसिंह सराय एसडीओ विष्णुदेव मंडल विधालय पहुंचकर मामले की छानबीन की और दोषी प्रधानाध्यापक को तत्काल दूसरे विधालय में प्रतिनियोजन कर दूसरे वरीय शिक्षक को प्रभार दिया गया है. 

वहीं एसडीओ ने मामले की जांच कर कार्रवाई की बात कही है. जिसके बाद छात्र ने उनकी बात मानते हुए सड़क से जाम को हटा लिया और शांत हो गए.

हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों के द्वारा इस तरह के उग्र प्रदर्शन सही है? शिक्षक जो उन्हें अच्छी बातों की शिक्षा देते हैं लेकिन उन्होंने छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार किया जिससे उनकी नाराजगी इतनी उग्र हो गई. यह उग्रता इन देश की भविष्यों के लिए सही नहीं हो सकती. ऐसे में बच्चों के अभिभावकों से लेकर स्कूल के शिक्षक और अधिकारियों को भी इस मामले पर विचार करने की जरूरत है.