VIDEO: संजय बोले- बिहार को ही निकालना पड़ेगा बाढ़ का स्थाई निदान

मंत्री ने अभियंताओं को बाढ़ का स्थाई निदान के लिए, कोई तकनीकी रास्ता निकालने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि, पानी तो नेपाल से आता है, इसलिए बाढ़ का निदान बिहार में ही निकलना पड़ेगा.  

VIDEO: संजय बोले- बिहार को ही निकालना पड़ेगा बाढ़ का स्थाई निदान
संजय झा ने बिहार बाढ़ पर बड़ा बयान दिया है. (फाइल फोटो)

दरभंगा: बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा की अध्यक्षता में समाहरणालय अवस्थित अम्बडेकर सभागार में, बाढ़ राहत कार्य व बाढ़ निरोधक कार्य की समीक्षा बैठक की गई. इस दौरान संजय कुमार झा ने कहा कि, बाढ़ (Flood) के दौरान दरभंगा के प्रशासनिक पदाधिकारी, अभियंतागण के सामुहिक प्रयास के कारण दरभंगा जिला के बांध सुरक्षित रहें हैं.

वहीं, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने प्रशासन एवं अभियंताओं के कार्यों की कि प्रशंसा करते हुए कहा कि, जिस तरह से सामुदायिक किचन चलाया गया, बचाव के कार्य किए गए, फूड पैकेट का एयर ड्रॉपिंग किया गया, जरूरतमंदों के बीच पॉलिथिन शीट्स का वितरण कराया गया, मवेशियों के लिए पशु चारा वितरण कराया गया, बाढ़ प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखा गया और खासकर कोविड-19 (COVID-19) जैसे विपदा की घड़ी में इतनी तेजी से कार्य किए गए, वह प्रशंसनीय है.

उन्होंने कहा कि, बाढ़ प्रभावित परिवारों को जितनी तेजी से जी.आर. की राशि दरभंगा में उपलब्ध कराई गई है, वह काबिलेतारीफ है. मंत्री ने अभियंताओं को बाढ़ का स्थाई निदान के लिए, कोई तकनीकी रास्ता निकालने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि, पानी तो नेपाल से आता है, इसलिए बाढ़ का निदान बिहार में ही निकलना पड़ेगा.

संजय झा ने कहा कि, जब मैं विगत वर्ष मंत्री बनकर दरभंगा आया था, उस समय 12-13 जुलाई को लगभग 8 जगह पर बांध टूट गया था, लेकिन इस वर्ष हमारे अभियंताओं ने प्रशंसनीय कार्य किए हैं और विभाग की छवि बदलने में भी कामयाब रहे.

उन्होंने कहा कि, दरभंगा जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रहता है. वर्ष 2007 से देख रहा हूं, यहां पानी 4-4 महीने तक रहता है. उन्होंने कहा कि, अभी तक 1987 के बाढ़ को बेंचमार्क माना जाता है, लेकिन इस बार की बाढ़ ने उसको भी कई जगह क्रॉस कर दिया. उन्होंने कहा कि, अभी आनेवाले 1 महीने और चुनौतीपूर्ण हैं.

झा ने कहा कि, 5ए. और 3बी. जहां कमला, कोशी और करेह नदी मिलती है, वहां कोई तकनीकी रास्ता निकालना पड़ेगा. हम 15 साल से देख रहे हैं कि, प्रतिवर्ष हनुमाननगर में बाढ़ आती है, इसका कोई न कोई हल तो ढूंढना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि, इस वर्ष बाढ़ राहत एवं बाढ़ निरोधक कार्य में ग्रामीणों ने भी अच्छी भूमिका निभाई है.