नीतीश सरकार का भूमि विवादों को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, जानें क्या है नया अधिनियम
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नीतीश सरकार का भूमि विवादों को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, जानें क्या है नया अधिनियम

विधान परिषद (Legislative Council) द्वारा अनुमोदित होने और राज्यपाल (Governor) की स्वीकृति के साथ ही यह अधिनियम पूरे बिहार (Bihar) में लागू हो जायेगा. राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री राम सूरत कुमार ने इस अधिनियम (Act) के बिहार विधान सभा से पारित होने को भूमि विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है.

नीतीश सरकार का भूमि विवादों को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, जानें क्या है नया अधिनियम

Patna: साल के आखिरी महीने में बिहार सरकार (Bihar Government) अपने रैयतों को एक नया तोहफा देने जा रही है. अब जमीन की बिक्री होने पर न सिर्फ रैयत के नाम में परिवर्तन होगा बल्कि बिक्री के मुताबिक जमीन का नक्शा भी बदल जाएगा. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (Revenue and Land Reforms Department) द्वारा इस संबंध में तैयार प्रस्ताव (Proposal) को आज बिहार विधानसभा (Bihar Legislative Assembly) द्वारा पारित कर दिया गया.

विधान परिषद (Legislative Council) द्वारा अनुमोदित होने और राज्यपाल (Governor) की स्वीकृति के साथ ही यह अधिनियम पूरे बिहार (Bihar) में लागू हो जायेगा. राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री राम सूरत कुमार ने इस अधिनियम (Act) के बिहार विधान सभा से पारित होने को भूमि विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. इससे उनलोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो जमीन खरीदने और दाखिल खारिज कराने के बावजूद खरीदी गई जमीन पर दखल कब्जा के लिए दर-दर की ठोकरें खाते रहते हैं.

अधिनियम के पारित होने पर विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने कहा कि स्पेशियल म्युटेशन पूर्णतः तकनीक आधारित है. कानून बनने से बिचैलियों और दलालों की मनमानी रोकने में काफी हद तक मदद मिलेगी. इसके लिए बिहार भूमि दाखिल खारिज अधिनियम 2011 में संशोधन किया गया है. अब यह बिहार भूमि दाखिल खारिज संशोधन अधिनियम 2021 के नाम से जाना जायेगा.

इसके लिए उक्त अधिनियम की धारा-02 की उप धारा-27 के बाद नई उप धारा- 28 जोड़ी गयी है. इस कार्य के लिए अब दाखिल खारिज के पूर्व खाका रेखाचित्र राजस्व मानचित्र करने में सक्षम व्यक्ति/एजेन्सी की सेवा सरकार द्वारा ली जायेगी. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा मान्यता प्राप्त सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा/डिग्रीधारी अभ्यर्थियों का जिलावार पैनल राजस्व विभाग द्वारा तैयार किया जायेगा. इस प्रकार से चयनित विशेषज्ञों/एजेन्सी द्वारा दाखिल खारिज पूर्व रेखाचित्र का निर्माण किया जायेगा.

इस काम के लिए रैयतों को शुल्क का भुगतान करना होगा, जिसका निर्धारण भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा किया जायेगा. निबंधन कार्यालयों में जमीन के पंजीकरण (Regiatration) के समय प्री-म्युटेशन स्केच रैयत द्वारा निबंधन कार्यालय को उपलब्ध कराया जायेगा. इसे पंजीकृत दस्तावेज के साथ संलग्न कर आनलाइन दाखिल खारिज हेतु संबंधित अंचल कार्यालय को उपलब्ध कराया जायेगा. अंचलाधिकारी द्वारा म्युटेशन के बाद विहित प्रपत्र में शुद्धि पत्र के अलावा अनुमोदित दाखिल खारिज प्री-म्युटेशन स्केच की प्रति भी आवेदक को दिया जायेगा.

अंचलाधिकारी द्वारा पारित रेखा चित्र सहित राजस्व मान चित्र दाखिल खारिज को व्यथित व्यक्ति आदेश/अनुमोदन की तारीख के 30 दिनों के भीतर भूमि सुधार उप समाहर्ता कोर्ट में अपील किया जा सकेगा. जबकि इससे संबंधित भूमि सुधार उप समाहर्ता के आदेश को समाहर्ता /अपर समाहर्ता के समक्ष पुनरीक्षण के लिए दायर किया जा सकेगा.

बिहार दाखिल खारिज अधिनियम 2011 की धारा-03 की उप धारा-05 में संशोधन के उपरान्त बिहार विशेष सर्वेक्षण से निर्मित सर्वे खतियान और राजस्व नक्शा के अंतिम प्रकाशन के बाद उसके आधार पर होने वाले प्रत्येक दाखिल खारिज में भी इसी तरह से स्पेशल म्युटेशन किया जायेगा और इस प्रकार बिहार वासियों को रियल टाईम जमीन का नक्शा उपलब्ध होने लगेगा.

बिहार राज्य में जमीन का प्रकाशित सर्वे खतियान और राजस्व मानचित्र में किसी प्रकार का परिवर्तन किया जाना संभव नहीं है. जमीन की खरीद बिक्री या अन्य विलेख के आधार पर जमीन के हस्तांतरण की स्थिति में जमीन को वास्तविक रूप में स्थल में रेखांकित किया जाना संभव नहीं होता है, जिसके कारण भू-विवाद की समस्या उत्पन्न होती है. जमीन को वास्तविक रूप में रेखांकित किये जाने के लिए बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त अधिनियम-2011 और 
नियमावली-2012 के आधार पर निर्मित एवं प्रकाशित सर्वे राजस्व नक्शा में दाखिल खारिज के अनुरूप आवश्यक परिवर्तन किया जाना अपेक्षित था.

प्रत्येक अंचल कार्यालय में सॉफ्टवेयर (software) के माध्यम से सर्वे राजस्व नक्शा को डिजिटल फार्म (Digital) में संधारित किया जाना है. आगे से दाखिल खारिज के लिए याचिका के साथ आवेदनकर्ता को दाखिल खारिज पूर्व खाका (रेखा-चित्र) राजस्व मानचित्र संलग्न करना होगा. साथ ही निबंधन कार्यालय में दस्तावेजों के पंजीकरण के समय ही दाखिल-खारिज पूर्व खाका (रेखा-चित्र) राजस्व मानचित्र रैयतों को संलग्न करना होगा. इसकी कॉपी पंजीकृत दस्तावेज के साथ अंचल कार्यालय को उपलब्ध कराई जायेगी.

दाखिल-खारिज की स्वीकृति के साथ ही सत्यापित/अनुमोदित दाखिल-खारिज पूर्व खाका (रेखा-चित्र) राजस्व मानचित्र के आलोक में डिजिटल फार्म में संधारित सर्वे राजस्व मानचित्र में आवश्यक परिवर्तन किया जायेगा. इस प्रकार की व्यवस्था से हर रैयत के स्वामित्व से संबंधित जमीन का भाग स्पष्ट रूप से चिन्हित होगा.

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