जंगल सफारी फिर से शुरू, बाघों का करीब से होगा दीदार
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जंगल सफारी फिर से शुरू, बाघों का करीब से होगा दीदार

वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (VTR) विजयदशमी के मौके पर फिर से पर्यटकों के लिए खोला जा रहा है. कोरोना (Corona) की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल महीने से यह बंद था. कोरोना (Corona) के हालात पर फिलहाल काबू होने और मॉनसून बीत जाने पर टाइगर रिजर्व को फिर से खोलने का फैसला लिया गया है.

जंगल सफारी फिर से शुरू, बाघों का करीब से होगा दीदार

Bagaha: वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (VTR) विजयदशमी के मौके पर फिर से पर्यटकों के लिए खोला जा रहा है. कोरोना (Corona) की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल महीने से यह बंद था. कोरोना (Corona) के हालात पर फिलहाल काबू होने और मॉनसून बीत जाने पर टाइगर रिजर्व को फिर से खोलने का फैसला लिया गया है. प्रकृति प्रेमियों के लिए यहां काफी कुछ ऐसा है, जो उनके लिए आकर्षण का केंद्र हो सकता है. 

यह बिहार का इकलौता टाइगर रिजर्व है, जहां बाघ समेत दूसरे वन्य जीवों को भी करीब से देखने का मौका मिल सकता है. भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वीटीआर 899 वर्ग किलोमीटर में फैला है. यहां जंगल सफारी के साथ नौका विहार का आनंद भी ले सकते हैं. अक्टूबर से लेकर मध्य जून तक यहां का टूरिस्ट सीजन होता है.

टाइगर रिजर्व के लिए टूर पैकेज

बिहार सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग (डीईएफसीसी) ने टाइगर रिजर्व जाने के इच्छुक पर्यटकों के लिए स्पेशल टूर पैकेज की शुरुआत की है. तीन दिनों के टूर के लिए प्रति पर्यटक 4500 रुपये और दो दिनों टूर के लिए 3000 रुपये की दर तय की गई है. इसमें परिवहन, खानपान, ठहराव, जंगल सफारी और आसपास के मंदिरों के दर्शन शामिल हैं. सफर के दौरान पर्यटक वैशाली में विश्व शांति स्तूप और केसरिया में बुद्ध स्तूप के भी दर्शन कर पाएंगे. पटना से वाल्मीकिनगर और मंगुरहा के लिए अलग-अलग बसें शुरू की गई हैं, जो कि हर शुक्रवार सफर पर निकलेगी और रविवार को पटना वापस लौटेगी. राजधानी पटना से इनकी दूरी करीब 230 किलोमीटर है. विभाग ने बेतिया से भी टूर पैकेज की शुरुआत की है, इसमें बेतिया से वाल्मीकिनगर का एक दिन का सफर शामिल है, जिसका खर्च प्रति पर्यटक 1200 रुपये तय किया गया है.

टाइगर रिजर्व में क्या-क्या खास

टाइगर रिजर्व में बड़ा ईको पार्क बनाया गया है, जिसमें बच्चों के खेलकूद की व्यवस्था भी की गई है. पटना के ईको पार्क की तरह इसे विकसित किया गया है. वहीं गंडक के किनारे डेढ़ किलोमीटर का पाथ-वे बनाया गया है, जो कि आपको मुंबई के मरीन ड्राइव की याद दिला देगा. ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला की तरह ही वीटीआर में कोलेश्वर झूला बनाया गया है. यहां आने वाले पर्यटकों के मनोरंजन के लिए चार हाथियों राजा, बाला, मणिकंठा और रुद्रा को खास तौर पर प्रशिक्षित किया गया है.

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ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की कोशिशें

बिहार सरकार 2012-13 से ही वीटीआर में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की कोशिशें लगातार कर रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीटीआर में खास दिलचस्पी दिखाई है, वह कई बार यहां का दौरा कर चुके हैं. वाल्मीकिनगर और उसके आसपास के धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को भी संरक्षित किया जा रहा है. रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के नाम पर इस जगह का नाम वाल्मीकिनगर है. मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि ने यहां कई साल गुजारे थे.

(इनपुट: धनंजय) 

 

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