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जयंती विशेष: अंतरराष्ट्रीय फलक पर छाने के लिए तैयार हो रहा है जयप्रकाश नारायण का गांव सिताब दियारा

आज गांव में जय प्रभा फाउंडेशन के प्रयास से बिहार सरकार ने राज्यस्तर का संग्रहालय बनवाया है. वहीं, केंद्र सरकार की 500 करोड़ की योजनाएं मूर्त रूप ले रही है.

जयंती विशेष: अंतरराष्ट्रीय फलक पर छाने के लिए तैयार हो रहा है जयप्रकाश नारायण का गांव सिताब दियारा
सिताब दियारा का हो रहा है विकास.

छपरा: संपूर्ण क्रांति के नायक जननेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण (Jaiprakash Narayan) का गांव सिताब दियारा (Sitab Diyara) आजादी के बाद से आज तक बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा था. अब इस गांव का कायाकल्प बिहार और केंद्र सरकार द्वारा मिलकर किया जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय फलक पर जेपी का यह गांव एकबार फिर चमकने के लिए तैयार हो रहा है. इससे गांव के लोग काफी आनंदित हैं.

जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अकटूबर 1902 को छपरा के रिविलगंज प्रखंड के सिताबदियारा के लाला टोला में हुआ था. बचपन में ही उनके गांव से गुजरने वाली नदी में हुए कटाव के कारण वह उत्तरप्रदेश में जा बसे, जो आज जयप्रकाश नगर के नाम से जाना जाता है. आज गांव में जय प्रभा फाउंडेशन के प्रयास से बिहार सरकार ने राज्यस्तर का संग्रहालय बनवाया है. वहीं, केंद्र सरकार की 500 करोड़ की योजनाएं मूर्त रूप ले रही है.

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सिताब दियारा में इस लाइब्रेरी की शुरुआत गांव के ही कुछ युवकों द्वारा किया गया था. लाइब्रेरी को लोग प्रभावती पुस्तकालय के नाम से जानते हैं, जो जयप्रकाश नारायण के पैतृक मकान में चलता था. बाद में बिहार सरकार द्वारा लाइब्रेरी बनाया गया, जिसमें तकरीबन 30 हजार से ज्यादा किताबें रखी हुई हैं. समृद्ध पुस्तकालय में जयप्रकाश नारायण और उनके विचार पर आधारित पुस्तक शोधकर्ताओं के लिए काफी उपयोगी है.

भारत सरकार के पांच संकल्पों को जेपी के गांव में लाने की कवायद शुरू की गई थी, जिसे अब पूर्ण कर लिया गया है. जेपी के विचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिये मेमोरियल म्यूजियम, वर्चुअल स्टूडियो बनाया गया है. इसमें ऑडियो-विजुअल के माध्यम से उनकी जीवन और संघर्ष को दर्शाया जायेगा. राष्ट्र निर्माण में पंचायती राज व्यवस्था के योगदान के लिए पंचायत रिसर्च सेंटर की स्थापना की जानी है. इसके साथ ही गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिये गांधी के विचार का रिसर्च सेंटर भी यहां खोला जायेगा. खादी को बढ़ावा देना और महिलाओं के समूह के माध्यम से राष्ट्रीय झंडा निर्माण के लिए खादी संवर्धन केंद्र की स्थापना भी होगी.