सुशील मोदी के ट्वीट पर शिवानंद का हमला, तो JDU बोली- 'घर अंधेरा और नाम जनरेटर'

आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि, सुशील मोदी का कंपटीशन जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह के साथ है और इसी कारण वह रोज बयान देते हैं.

सुशील मोदी के ट्वीट पर शिवानंद का हमला, तो JDU बोली- 'घर अंधेरा और नाम जनरेटर'
सुशील मोदी के ट्वीट पर शिवानंद का हमला, तो JDU बोली- 'घर अंधेरा और नाम जनरेटर'. (फाइल फोटो)

पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) के ट्वीट पर राज्य में जुबानी जंग तेज हो गई है. आरजेडी (RJD) के शिवानंद तिवारी ने सुशील मोदी पर निशाना साधा है, तो वहीं, बीजेपी और जेडीयू ने शिवानंद तिवारी पर पलटवार करते हुए मोदी के ट्वीट का समर्थन किया है.

आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा है कि, इस आपदा की स्थिति में राज्यों के सारे अधिकार केंद्र ने ले लिया है. केंद्र सरकार ने ही सड़कों पर मजदूरों को चलने पर विवश कर दिया है. दिल्ली की सरकार अगर कुछ करती है तो, राज्य सरकार जरूर मानेगी.

शिवानंद तिवारी ने केंद्र पर निशाना साधते हुए का कि, नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सरकार गरीबों के बारे में एक शब्द भी नहीं कह रही है. सुशील मोदी का कंपटीशन जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह के साथ है और इसी कारण वह रोज बयान देते हैं.

वहीं, सुशील मोदी के ट्वीट का बीजेपी नेता नवल यादव ने समर्थन किया है. नवल यादव ने कहा है कि, जिसके नेतृत्व में शिवानंद तिवारी राजनीति कर रहे हैं, उन पर सुशील मोदी ने हमेशा प्रहार किया है और किसी ने लालू यादव (Lalu Yadav) के कारनामें के खिलाफ लड़ा है तो वह सुशील मोदी हैं.

इधर, जेडीयू के प्रवक्ता निखिल मंडल ने शिवानंद तिवारी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, 'घर अंधेरा और नाम जनरेटर'. निखिल मंडल ने कहा कि, शिवानंद तिवारी रिटायरमेंट के बाद फिर से सक्रिय हुए हैं. इसी कारण हमेशा बयान देते हैं. केंद्र सरकार प्रवासी श्रमिकों के लिए लगातार ट्रेन चला रही है औऱ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने रेल मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) से बात किया है.

निखिल मंडल ने कहा कि, सीएम नीतीश ने रेल मंत्री से मांग किया है कि प्रतिदिन 50 ट्रेन श्रमिकों को लेकर बिहार आए है और उस पर मुहर लग गई है. लेकिन आरजेडी राजनीति कर रही है. 

दरअसल, सुशील मोदी ने ट्वीट कर लिखा, 'लालू प्रसाद को ममता दीदी से पूछना चाहिए कि, बंगाल ने केवल नौ ट्रेन और हेमंत सोरेन ने सिर्फ 38 श्रमिक स्पेशल चलाने की अनुमति क्यों दी? रेलवे रोजाना 500 विशेष ट्रेन चलाने को तैयार है, लेकिन तब कांग्रेस, आरजेडी को मजदूरों की पैदल यात्रा के मार्मिक दृश्य पर राजनीति का मौका कैसे मिलेगा?'