झारखंड: बीजेपी बोली- सत्तापक्ष 12 मार्च तक बनाए मरांडी को नेता प्रतिपक्ष वरना...

विधानसभा में लोकतंत्र की गरिमा को बचाना चाहिए. साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि बीजेपी लोकतंत्र की मूल्यों को किसी सूरत पर नीलाम नहीं होने देगी. जनता की अदालत में भी यह बात रखी जाएगी. सदन के अंदर और सदन के बाहर विरोध करेंगे.

झारखंड: बीजेपी बोली- सत्तापक्ष 12 मार्च तक बनाए मरांडी को नेता प्रतिपक्ष वरना...
मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने को लेकर बीजेपी ने सोरेन सरकार को दिया 12 मार्च तक का अल्टीमेटम. (फाइल फोटो)

रांची: झारखंड में बाबूलाल मरांडी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा देने की मांग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दरार बढ़ता ही जा रहा है. निर्वाचन आयोग ने जेवीएम के बीजेपी में विलय पर मुहर तो लगा दी है लेकिन इसके बावजूद झारखंड बीजेपी ने विधानसभा अध्यक्ष को 12 मार्च तक का अल्टीमेटम दे दिया है. 

बीजेपी की तरफ से कहा गया है कि अगर 12 मार्च तक विधानसभा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को सदन में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं देते हैं तो पार्टी चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में आंदोलन करेगी.

झारखंड बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय ने कहा कि लोकतंत्र की जो व्यवस्था है उसके तहत जेवीएम के बीजेपी में विलय की सभी प्रक्रिया को पूरा किया गया है. निर्वाचन आयोग के मुहर से प्रमाणित हो चुका है कि कोई तकनीकी दोष नहीं है. 

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को खोंटी दलील पर नहीं जाना चाहिए. सत्ताधारी दल के दबाव में या दलगत राजनीति के दवाब में नहीं आना चाहिए. विधानसभा में लोकतंत्र की गरिमा को बचाना चाहिए. साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि बीजेपी लोकतंत्र की मूल्यों को किसी सूरत पर नीलाम नहीं होने देगी. जनता की अदालत में भी यह बात रखी जाएगी. सदन के अंदर और सदन के बाहर विरोध करेंगे.

बीजेपी ने जब नेता प्रतिपक्ष की घोषणा को लेकर अल्टीमेटम दिया तो जेएमएम ने भी पलटवार करना शुरू कर दिया है. हेमंत सरकार के मंत्री मिथलेश ठाकुर ने कहा कि इनकी यही फितरत रही है, दबंगता के साथ असंवैधानिक काम कराने में इनको महारत हासिल है. जो मामला विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित है, उसको लेकर हंगामा कर रहे हैं. राज्य की जनता देख रही है. चरणबद्ध तरीके से या क्रमबद्ध तरीके से जैसे करना है करें.

जबकि जेएमएम महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के पास मामला लंबित है. उसके बावजूद बीजेपी के लोग इस तरह की भाषा का प्रयोग कर संवैधानिक संस्था को चेतावनी दे रहे हैं. 

निर्वाचन आयोग ने जेवीएम के बीजेपी में विलय पर भले ही अपना मुहर लगा दिया हो लेकिन फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के पास यह मामला लंबित ही दिख रहा है. विधानसभा अध्यक्ष सभी कानूनी पहलुओं पर अध्ययन के बाद फैसले की बात सदन में कर चुके हैं. ऐसे में फिलहाल पूरा मामला लंबा खिंचता हुआ और सत्तापक्ष और विपक्ष में तकरार बढ़ता हुआ ही दिख रहा है.