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रांची: दिव्यांग बच्चों ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ शुरू की मुहिम

दिव्यांग बच्चे सिविल सर्विसेज में जा कर देश की सेवा करना चाहते हैं. ये बच्चे  पर्यावरण को लेकर भी लोगों को जागरूक करने के साथ सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं.

रांची: दिव्यांग बच्चों ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ शुरू की मुहिम
दिव्यांग बच्चे सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं.

रांची: संत मिखाएल ब्लाइंड स्कूल के बच्चे आम लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं. इंटर पॉइंट के सहारे ब्रेल लिपि पद्धति से पढ़ने वाले ये दृष्टीहीन बच्चे कुछ कर गुजरने का हौसला रखते हैं और सिविल सर्विसेज में जा कर देश की सेवा करना चाहते हैं.

असल में रांची के बहू बाजार में एक ब्रिटिश महिला ओकुनर ने 1898 में संत मिखाएल ब्लाइंड स्कूल की स्थापना की थी. इस स्कूल से अब तक लाखों बच्चे पास आउट हो चुके हैं.

ये बच्चे अब देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल इस स्कूल में 110 बच्चे पढ़ रहे हैं.

ये दिव्यांग बच्चे पर्यावरण को लेकर भी लोगों को जागरूक करने के साथ सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं. बच्चे लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की कोशिश भी कर रहे हैं. 

इस स्कूल की दीवार पर सिंगल यूज़ प्लास्टिक का पोस्टर लगाकर इसके नुकसान को समझाया गया है. जो लोग जिन्दगी में छोटी सी मुसीबतों में घबरा जाते हैं, उन्हें इन बच्चों से सिखने की जरुरत हैं.

ये बच्चे दृष्टिहीन होने के बावजूद दुनिया को देखने का एक नया नजरिया पेश कर रहे हैं.

Saloni Mohan, News Desk