बिहार चुनाव: प्रचार सामग्री की हो रही बंपर बिक्री, मास्क-फेस शिल्ड की खास डिमांड

कोरोना का डर नेताओं को भी है और आम लोगों को लिहाजा इस बार कुछ नयी तरह की प्रचार सामग्री बिक रही हैं. कोरोना से बचाव में मास्क और फेस शील्ड दोनों की भूमिका अहम होती है लिहाजा  इस बार के चुनावी अभियान में मास्क और फेस शील्ड दोनों की बंपर बिक्री हो रही है. 

बिहार चुनाव: प्रचार सामग्री की हो रही बंपर बिक्री, मास्क-फेस शिल्ड की खास डिमांड
इस बार कुछ नयी तरह की प्रचार सामग्री बिक रही हैं.

पटना: कोरोना के बीच बिहार में विधानसभा चुनाव ने जोर पकड़ लिया है. कोरोना का डर नेताओं को भी है और इस लिहाज से इस बार कुछ नयी तरह की प्रचार सामग्री बिक रही हैं. कोरोना से बचाव में मास्क और फेस शील्ड दोनों की भूमिका अहम होती है लिहाजा  इस बार के चुनावी अभियान में मास्क और फेस शील्ड दोनों की बंपर बिक्री हो रही है. 

सत्तारूढ़ जेडीयू कार्यालय के दफ्तर में ही प्रचार सामग्री की बिक्री के लिए स्टॉल लगाए गए हैं जहां मास्क और फेस शील्ड दोनों को रखा गया है. जहां मास्क की कीमत दस रूपए वहीं फेस शील्ड की कीमत 50 रूपए हैं.ये बात और है कि ये दोनों चीजें आम मास्क और फेस शील्ड से अलग हैं क्योंकि इस पर पार्टी का चुनाव चिह्न भी लगा हुआ है. अमित शाह की तस्वीर और कमल निशान वाले मास्क और तीर छाप यानि जेडीयू को प्रदर्शित करती फेस शील्ड.

दुकानदार बताते हैं कि जो लोग भी खरीदने के लिए आ रहे हैं उनका जोर मास्क और फेस शील्ड पर ही है.जेडीयू कैंपस में स्थित इस प्रचार सामग्री वाले स्टॉल में बीजेपी,हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी से जुड़ी चुनावी चीजें हैं. हालांकि इसे शायद रिश्तों की तल्खी कही जाए कि लोक जनशक्ति पार्टी से जुड़े पोस्टर-बैनर यहां बिकते नही दिख रहे हैं. दूसरी ओर बीरचंद पटेल पथ पर राजद कार्यालय भी है जहां एक बड़ा प्रचार सामग्री का स्टॉल लगाया है.

यहां पर तेजस्वी की तस्वीर वाली टीशर्ट, रिस्ट बैंड, गमछों की खूब बिक्री हो रही है. कार पर लगाने के लिए छोटे आकार के झंडे, टोपी भी डिमांड में हैं. हालांकि ये स्टॉल छह दिन पहले ही लगाई गई है लेकिन रोजाना 30 से 40 हजार की प्रचार सामग्री बिक रही है. क्योंकि इस बार महागठबंधन में लेफ्ट पार्टियों जैसे सीपीआई, सीपीएम और माले भी है लिहाजा इनके जुड़े प्रतीक चिह्नों को स्टॉल में जगह दी गई है. कांग्रेस के  पोस्टर और बैनर की बिक्री हो रही है.

दरअसल पार्टी मुख्यालयों के नजदीक प्रचार सामग्री से जुड़े स्टॉल लगाने की वजह ये भी है कि, पूरे बिहार से नेता और कार्यकर्ता पहुंचते हैं लिहाजा वो थोक या खुदरे में चुनावी अभियान से जुड़ी चीजें यहां से खरीद सकती हैं. कोरोना काल में चुनाव कराना जहां एक चुनौती है वहीं चुनौती से निपटने की भी तैयारियां हो रही है. लिहाजा प्रचार सामग्रियों में भी उन्हीं चीजों का इस्तेमाल हो रहा है जिससे कोरोना का संक्रमण नहीं हो सके.मास्क और फेस शील्ड को प्रचार सामग्री में शामिल किया जाना इसी का परिणाम है.