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Dumraon Assembly Seat Profile: बक्सर जिले की डुमरांव का इतिहास का काफी पुराना है. एक समय यह डुमरांव राज की राजधानी हुआ करता था. इतिहासकारों के मुताबिक, डुमरांव नगर की स्थापना 1709 में राजा होरिल सिंह ने की थी. वह अपने राज्य की जनता के विद्रोह को दबाने के मुगलों की मदद लेने में भी संकोच नहीं करते थे. बदले में मुगलों ने डुमरांव राज को विशाल जमींदारी बना दिया. जिसकी जमींदारी बक्सर से उत्तर प्रदेश के बलिया तक फैली हुई थी. हालांकि, आज के डुमरांववासी उन्हें विश्वासघाती मानते हैं. डुमरांव विधानसभा सीट के अंतर्गत चिलहरी, कुशलपुर, भोजपुर कदीम, भोजपुर जदीद, छतनवार, नुआंव, सोवां, अड़ियांव, नंदन, लखनडीहरा और दमराँव प्रखंड की ग्राम पंचायतें आती हैं.
सियासी इतिहास
डुमरांव विधानसभा सीट की स्थापना 951 में हुई थी और अब तक यहां 17 बार वोट डाले जा चुके हैं. शुरुआती दौर में यहां कांग्रेस का दबदबा देखने को मिलता था, लेकिन इसके बाद समाजवादियों और वामपंथियों को कामयाबी हासिल हुई. सबसे ज्यादा कांग्रेस ने सात बार जीत दर्ज की है, जबकि जनता दल, जनता दल (यूनाइटेड) और निर्दलीय प्रत्याशी दो-दो बार विजयी रहे हैं. इसके अलावा सीपीआई, समाजवादी पार्टी, अखिल जन विकास दल और सीपीआई(एमएल)(एल) को एक-एक बार सफलता मिली है. साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एमएल)(एल) के अजीत कुशवाहा ने महागठबंधन के तहत जेडीयू की अंजुम आरा को 24 हजार 415 मतों से शिकस्त दे दी थी. 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में बक्सर संसदीय सीट से आरजेडी के सुधाकर सिंह ने बीजेपी के मिथिलेश तिवारी को मात दी थी.
जातीय समीकरण
इस सीट पर कुल 3 लाख 31 हजार मतदाता हैं. जिनमें से 1 लाख 73 हजार पुरुष हैं, जबकि 1 लाख 57 हजार महिला मतदाता हैं. इस सीट पर यादव, मुस्लिम, रविदास वोटर महत्वपूर्ण भूमिका में हैं. यहां 13.63% अनुसूचित जाति, 1.25% अनुसूचित जनजाति और 7.1% मुस्लिम मतदाता हैं. यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, जिसमें केवल 12.88% मतदाता शहरी हैं. पिछले 15 सालों में इस सीट पर एकतरफा किस दल का प्रभाव नहीं रहा है. इस बार प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी अपना किस्मत अजमाएगी. अब देखना होगा कि भाकपा माले अपना सीट बचाने में कामयाब होती है या फिर जेडीयू एक बार फिर से इसे जीतने में कामयाब होगी.
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