बिहार: पटना यूनिवर्सिटी में दिख रहा छात्र चुनाव का रंग, तरह-तरह के नारों से लुभाने की हो रही कोशिश

मगध महिला कॉलेज के बाहर एबीवीपी, आइसा और एनएसयूआई के कार्यकर्ता एक साथ प्रचार कर रहे हैं. प्रचार के साथ ही पर्चें भी बांटे जा रहे हैं. कौन किस पद पर लड़ रहा है इसका जिक्र चुनावी पर्चे पर है. 

बिहार: पटना यूनिवर्सिटी में दिख रहा छात्र चुनाव का रंग, तरह-तरह के नारों से लुभाने की हो रही कोशिश
अब अलग-अलग छात्र संगठन चुनाव प्रचार प्रसार के जरिए माहौल बनाने लगे हैं.

पटना: बिहार के पटना यूनिवर्सिटी में आज कल तरह-तरह के गूंज रहे हैं. ये नारे किसी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता नहीं बल्कि राजनीति में ऊंची मुकाम हासिल के लिए अहम समझे जाने वाले छात्रसंघ चुनाव में सुनने को मिल रहे हैं.

मगध महिला कॉलेज के बाहर एबीवीपी, आइसा और एनएसयूआई के कार्यकर्ता एक साथ प्रचार कर रहे हैं. प्रचार के साथ ही पर्चें भी बांटे जा रहे हैं. कौन किस पद पर लड़ रहा है इसका जिक्र चुनावी पर्चे पर है. 

म्मीदवार बकायदा हाथ जोड़कर छात्राओं से अपने पक्ष में वोटिंग की अपील कर रहे हैं. सात दिसंबर को होने वाले छात्रसंघ चुनाव में सिर्फ आठ दिन का समय रह गया है लिहाजा अब अलग-अलग छात्र संगठन चुनाव प्रचार प्रसार के जरिए माहौल बनाने लगे हैं.

फिलहाल उनका मकसद गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं को साधने का है. गर्ल्स कॉलेज की कुछ पाबंदियां हैं लिहाजा मेन गेट के बाहर ही उम्मीदवार और छात्र संगठन प्रचार में लगे हैं.नारे ऐसे कि जिससे कि कार्यकर्ताओं में जोश में आ जाए. उम्मीदवारों को उम्मीद है कि इन नारों के  जरिए वो सीधे मतदाताओं के दिल में घुस सकेंगे.

आमतौर पर डफली और ढोल के जरिए चुनाव प्रचार करने में वामपंथी संगठन की अपनी काबिलियत है. खासकर ऑल इंडिया स्टूडेंस्ट एसोसिएशन यानि आइसा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन यानि एआईएसएफ लेकिन विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता भी अब नए नारों के जरिए नए वोटरों को साधने की कोशिश में है.

कौन लड़ा है किसमें दम....ऊपर क्या है भारत माता..नीचे क्या है भारत माता जैसे नारे भी गूंज रहे हैं. भगवा गमछों और भगवा प्रतीकों के जरिए चुनाव में जीतने की कोशिश में एबीवीपी लगी हुई है. इसी तरह आइसा के कार्यकर्ता और उम्मीदवार भी प्रचार में लगे हैं. 

आइसा के कार्यकर्ता- 'संघर्षों की जली मशाल..आवाज दो हम एक हैं' जैसे नारे लगा रहे हैं. हालांकि नारेबाजी और चुनाव प्रचार में छात्र जेडीयू और छात्र आरजेडी फिलहाल पिछड़ता नजर आ रहा है. फेसबुक,ट्विटर के जमाने में भी प्रचार के पुराने तरीके अब भी कारगर माने जाते हैं. अब 7 दिसंबर को होने वाले चुनाव में भी इसका असर देखने को मिलेगा.