close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

बिहार: विवादों के घेरे में किशनगंज का बालिका गृह, महिलाकर्मी ने लगाए कई गंभीर आरोप

खालेदा तबस्सुम ने बच्चियों के इंसाफ के लिए लिखित शिकायत जिला पदाधिकारी के पास दर्ज करायी है. वहीं, जिला पदाधिकारी ने मामले को जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में ट्रांसफर कर दिया है, जहां पर मामले की सुनवाई चल रही है.

बिहार: विवादों के घेरे में किशनगंज का बालिका गृह, महिलाकर्मी ने लगाए कई गंभीर आरोप
किशनगंज में संचालित बालिका गृह फिर विवादों में घिर गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

किशनगंज: बिहार के किशनगंज के अलजफर मेमोरियल एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित बालिका गृह फिर विवादों में घिर गया है. बालिका गृह में मौजूद बालिकाओं के साथ मारपीट और प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाने पर बालिका गृह की गृह माता के पद पर कार्यरत खालेदा तबस्सुम को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. 

खालेदा तबस्सुम ने बच्चियों के इंसाफ के लिए लिखित शिकायत जिला पदाधिकारी के पास दर्ज करायी है. वहीं, जिला पदाधिकारी ने मामले को जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में ट्रांसफर कर दिया है, जहां पर मामले की सुनवाई चल रही है.

किशनगंज जिला मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर दूरी पर स्थित पिपला गांव स्थित बालिका गृह में कार्यरत खालेदा तबस्सुम ने बालिका गृह की डेयरेक्टर रेयना प्रवीण  और उसके पति दानिश मुजफ्फर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं.

खालेदा के मुताबिक, बालिका गृह में रह रही बालिकाओं को न तो मेन्यू के अनुसार भोजन दिया जाता है और न ही पहनने के लिए सही कपड़े. बच्चियों के द्वारा इसका विरोध करने पर उसे प्रताड़ित किया जाता है. यहां तक कि उसके साथ मारपीट तक की जाती है.

उन्होंने बताया कि बालिका गृह का संचालन एससीपीसी के नियम के विरुद्ध किया जाता है. इसका विरोध करने पर षडयंत्र के तहत नौकरी से निकाल दिया गया. पीड़ित महिलाकर्मी ने खुलासा किया कि बालिका गृह में मुजफ्फपुर बालिका गृह कांड के बाद से पुरुषों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके बावजूद डेयरेक्टर के पति बालिका गृह आते-जाते रहते हैं. 

साथ ही खालेदा ने कहा कि मानदेय चेक के माध्यम से 12 हजार रुपये दिया जाता था. उसमें से 35 सौ रुपये प्रति महीना डेयरेक्टर के द्वारा नगद वापस ले लिया जाता था. नहीं देने पर नौकरी से निकाल देने की धमकी दी जाती थी.