बिहार सरकार को केंद्र का समर्थन, SC में कहा- नियोजित शिक्षकों को नहीं दिया जा सकता समान वेतन

केंद्र सरकार ने कहा कि इन नियोजित शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने पर केंद्र सरकार पर करीब 40 हजार करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा.

बिहार सरकार को केंद्र का समर्थन, SC में कहा- नियोजित शिक्षकों को नहीं दिया जा सकता समान वेतन
नियोजित शिक्षकों के वेतन मामले पर बिहार को मिला केंद्र सरकार का समर्थन.

सुमित कुमार, पटना : बिहार को 3.7 लाख नियोजित शिक्षकों को केंद्र से उस समय निराशा हाथ लगी, जब केंद्र सरकार ने बिहार सरकार का समर्थन करते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन का विरोध किया. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बिहार सरकार के स्टैंड का समर्थन किया है. केंद्र के तरफ से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि नियोजित शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि ये समान कार्य के लिए समान वेटर की कैटेगरी में नहीं आते हैं.

बिहार के 3.7 लाख नियोजित शिक्षकों के मामले में केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिहार सरकार के स्टैंड का समर्थन किया है. केंद्र सरकार के इस रूख से नियोजित शिक्षकों को झटका लग सकता है. केंद्र सरकार के हलफनामे की कॉपी जी मीडिया के पास Exclusive मौजूद है. केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर 36 पन्नों के हलफनामे में कहा गया है कि इन नियोजित शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं दिया जा सकता क्योंकि समान कार्य के लिए समान वेतन के कैटेगरी में ये नियोजित शिक्षक नहीं आते. 

ऐसे में इन नियोजित शिक्षकों को नियमित शिक्षकों की तर्ज पर समान कार्य के लिए समान वेतन अगर दिया भी जाता है तो सरकार पर प्रति वर्ष करीब 36998 करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा. केंद्र ने इसके पीछे यह तर्क दिया है कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को इसलिए लाभ नहीं दिया जा सकता क्योंकि बिहार के बाद अन्य राज्यों की ओर से भी इसी तरह की मांग उठने लगेगी.

अब 31 जुलाई को अंतिम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से अर्टनी जनरल केके वेणुगोपाल पेश हुए. उन्होंने ने कहा कि इस मामले में अंतिम सुनवाई होनी है, लेकिन इस मामले में कोर्ट ने अभी तक दूसरे पक्ष को नोटिस जारी नहीं किया है, ऐसे में बिना दूसरे पक्ष को सुनने हुए इस मामले की अंतिम सुनवाई नहीं हो सकती है.वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी, गोपाल सिंह और मनीष कुमार पेश हुए.उन्होंने भी कहा कि इस केस में अंतिम सुनवाई होनी है  लिहाजा दूसरे पक्ष का जवाब आना चाहिए.जिसपर जस्टिस एएम सप्रे और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने शिक्षक पक्षों को अपना पक्ष रखने को कहा और साथ ही मामले की अंतिम सुनवाई 31 जुलाई के लिए तय की।

केंद्र के हलफनामे के खिलाफ शिक्षक भी दायर करेंगे जवाब
नियोजित शिक्षकों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि करीब चार लाख शिक्षक फैसले का इंतजार कर रहे है, ऐसे में इस मामले में जल्द सुनवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 20-25 हजार पर शिक्षक काम करने को मजबूर है. ऐसे में बिहार सरकार की अपील का जल्द सुनवाई कर फैसला आना चाहिए. वहीं ज़ी मीडिया से खास बातचीत में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और शिक्षकों की ओर से मामले में पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार के हलफनामे से ज्यादा कुछ फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि पटना हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने साफ कर दिया था कि समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए ऐसे में केंद्र सरकार के हलफनामे के खिलाफ हम भी अपना जवाब दाखिल करेंगे और अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे ताकि पटना हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट भी बरकरार रखें.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- चपरासी का वेतन टीचर से ज्यादा क्यों?
नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन मामले में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा था जब चपरासी को 36 हजार रुपए वेतन दे रहे हैं, तो फिर छात्रों का भविष्य बनाने वाले शिक्षकों को मात्र 26 हजार ही क्यों? इसके पहले 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर राज्य सरकार को झटका दिया था.कोर्ट ने तब सरकार को यह बताने के लिए कहा था कि नियोजित शिक्षकों को सरकार कितना वेतन दे सकती है? इसके लिए लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी तय कर बताए.पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई की तारीख 12 जुलाई के लिए तय की थी। केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए और वक्त मांगा था.केंद्र सरकार ने कहा था कि वो अन्य राज्यों के परिपेक्ष में इसे देख रही है, क्योंकि एक राज्य को अगर सैलरी पर विचार किया जाएगा तो अन्य राज्यों की ओर से भी मांग उठने लगेगी.केंद्र सरकार ने ये भी कहा था कि हम बिहार को आर्थिक तौर पर कितनी मदद कर सकते है ये हम कोर्ट को अवगत करायेंगे.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बिहार में करीब 3.7 लाख नियोजित शिक्षक काम कर रहे हैं। शिक्षकों के वेतन का 70 फीसदी पैसा केंद्र सरकार और 30 फीसदी पैसा राज्य सरकार देती है.वर्तमान में नियोजित शिक्षकों (ट्रेंड) को 20-25 हजार रुपए वेतन मिलता है.अगर समान कार्य के बदले समान वेतन की मांग मान ली जाती है तो शिक्षकों का वेतन 35-44 हजार रुपए हो जाएगा.