close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

लोकगायिका चंदन तिवारी बोलीं- 'विलुप्त लोकगीतों को जिंदा करने की कर रही हूं कोशिश'

फिल्म के लिए गीत गाने के संबंध में पूछे जाने पर चंदन ने कहा कि फिल्मों में गाने के प्रस्ताव बराबर मिलते रहते हैं, लेकिन फिलहाल इससे दूरी बनाए हुई हूं.

लोकगायिका चंदन तिवारी बोलीं- 'विलुप्त लोकगीतों को जिंदा करने की कर रही हूं कोशिश'
चंदन तिवारी को मिला है उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार.

पटना : लोक गायकी से देश और दुनिया में अलग पहचान बनाने वाली चंदन तिवारी संगीत नाटक अकादमी द्वारा 2018 के उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए चयनित होने से खुश हैं. उन्होंने कहा कि पुरस्कार इसी राह चलने के लिए प्रोत्साहित करता है. भोजपुरी के अलावा मगही, मैथिली और नागपुरी में गीत गा चुकीं चंदन को यह सम्मान लोक गायन श्रेणी में मिलने वाला है. वह ठेठ विलुप्त गीतों को फिर से सामने लाने की कोशिश में जुटी हैं. 

चंदन ने कहा, "पुरस्कार या सम्मान तो हमेशा खुशी का भाव भरनेवाला होता है. यह सम्मान बड़ा सम्मान है, क्योंकि इसे देशभर के कलाकार मिलकर तय करते हैं." 

बिहार की चंदन तिवारी के मिला उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार

उन्होंने यह सम्मान श्रोताओं को समर्पित करते हुए कहा, "यह सम्मान मेरे अकेले का सम्मान नहीं है, बल्कि बिहार की लोक संगीत परंपरा, हमारी मातृभाषा और उन तमाम पुरखे रचनाकारों, कलाकारों का सम्मान है, जिनके गीत मैं गाती हूं. उन्हीं की वजह से मुझे प्यार मिलता है. यह सम्मान सभी श्रोताओं का भी सम्मान है, जिन्होंने हमेशा उत्साहवर्धन कर मुझे इसी रास्ते चलने को प्रोत्साहित किया." 

फिल्म के लिए गीत गाने के संबंध में पूछे जाने पर चंदन ने कहा कि फिल्मों में गाने के प्रस्ताव बराबर मिलते रहते हैं, लेकिन फिलहाल इससे दूरी बनाए हुई हूं.

उन्होंने कहा, "मैं ऐसा मानती हूं कि लोकगीतों का गायन अपने आप में मुकम्मल काम है. लोकगीत गायन और सिनेसंगीत गायन, दोनों दो चीजें हैं. लोकगीतों की दुनिया ही इतनी बड़ी है कि हमेशा लगता है कि इसमें ही पहले कुछ कर लूं. भोजपुरी या किसी भी लोकभाषा का गीत-संगीत कभी सिनेमा पर निर्भर नहीं रहा." 

लोकगीत गायन क्षेत्र की बड़ी हस्तियों- विंध्यवासिनी देवी, शारदा सिन्हा से लेकर भरत शर्मा तक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इन महान कलाकारों ने लोकभाषा के गीतों का गायन कर ही अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. 

बिहार के भोजपुर जिले के बड़कागांव में जन्मीं और झारखंड के बोकारो में पली-बढ़ी चंदन ने भविष्य की योजनाओं के बारे में कहा, "जो काम कर रही हूं, उसमें निरंतरता रखकर उसे आगे बढ़ाने की कोशिश उनकी प्राथमिकता है." 

उन्होंने बताया, "चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष पर 'चरखवा चालू रहे' सीरीज शुरू की थी. अब उसका गान्हीजी (गांधीजी) नाम से विस्तार कर रही हूं और इन दिनों संगीत से बापू के जुड़ाव का अध्ययन कर रही हूं. गान्हीजी नाम से जो सीरीज मैंने तैयार किया है, उसमें करीब आठ लोकभाषाओं के गीत हैं. इन गीतों को अब तक दर्जनभर मंचों पर लेकर जा चुकी हूं."

उन्होंने कहा कि 'रसूल के राम' और 'मूसा का रामराज' विषय पर भी वह काम कर रह हैं और जल्द ही इसे लोगों से साझा करेंगी. उन्होंने कहा कि यह लोक में व्याप्त साझी संस्कृति पर आधारित सीरीज है. 

पुरबिया लोक संगीत में प्रसिद्धि पा चुकीं चंदन अब तक अपराजिता सम्मान, झारखंड नागरिक सम्मान, गाजीपुर का लोक सम्मान जैसे महत्वपूर्ण सम्मान पा चुकी हैं. चंदन गांव-गांव जाकर लोकगीतों को तलाश भी रही हैं. 

27 वर्षीया चंदन की विशेषता है कि ये गांव की गलियों से गाने ढूंढ़ लाती हैं और उसे अपनी आवाज में पिरोती हैं. उनका कहना है, "मैं शास्त्रीय और लोकगीतों का मिलान कर रही हूं और गांवों के ठेठ कलाकारों के संग विलुप्त विधाओं पर नए तरह के प्रयोग कर रही हूं. मैं गांवों के ठेठ विलुप्त गीतों को फिर से सामने लाने की कोशिश में हूं." 

संगीत नाटक अकादमी ने मंगलवार को 32 युवा कलाकारों के नामों की घोषणा की है, जिन्हें वर्ष 2018 के उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. दिग्गज शहनाई वादक के नाम पर आधारित यह पुरस्कार 40 वर्ष से कम आयु के कलाकारों को कला के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है.