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बिहार में आपदा की दोहरी मार पर सीएम नीतीश कुमार ने बुलाई बैठक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बाढ़ और सुखाड़ को लेकर चलायी जा रही योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं. सरकार ने जल- जंगल और हरियाली मिशन शुरू किया है.

बिहार में आपदा की दोहरी मार पर सीएम नीतीश कुमार ने बुलाई बैठक
बिहार में आपदा को लेकर सीएम नीतीश कुमार ने बैठक बुलाई.

पटनाः प्रदेश इन दिनों दोहरी प्राकृतिक आपदा की चपेट में है. उत्तर बिहार और सीमांचल के 13 जिले बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, तो दक्षिण और मध्य बिहार के 20 जिलों में सूखे का संकट है. दोनों ही स्थितियों से निपटने में सरकारी तंत्र लगा हुआ है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बाढ़ और सुखाड़ को लेकर चलायी जा रही योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं. सरकार ने जल- जंगल और हरियाली मिशन शुरू किया है, जिसके तहत राज्य में पानी की संरक्षण और पेड़ लगाने का अभियान चलाया जा रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी समीक्षा की है और कई निर्देश मंत्रियों और अधिकारियों को दिये हैं. 

हीट स्ट्रोक और चमकी का दर्द झेल चुके बिहार में जब जून के अंत में बारिश शुरू हुई, तो लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन 13 जुलाई को मुख्यमंत्री जब सभी एमएलए और एमएलसी के साथ बाढ़ और सुखाड़ पर मैराथन बैठक रहे थे, तभी उत्तर बिहार से बाढ़ की खबरें आने लगीं और 15 जुलाई आते-आते स्थिति ने विकराल रूप ले लिया. सबसे ज्यादा असर दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर में हुआ, इसके अलावा सहरसा, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया जैसे जिलों में भी बाढ़ का पानी कहर बन कर टूटा. देखते ही देखते लाखों की आबादी बाढ़ की चपेट में आ गयी. अगर अभी तक की बात करें, तो 85 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में हैं. 13 जिलों के 111 प्रखंडों में बाढ़ का पानी है. दिनोंदिन ये आकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. 

अचानक आयी इस बाढ़ को सरकार फ्लैश फ्लड बता रही है, लेकिन जिन इलाकों से बाढ़ का पानी उतर चुका है, वहां सिर्फ और सिर्फ तबाही देखने को मिल रही है. राज्य सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अभियान चलाया जा रहा है. पीड़ित परिवारों को छह-छह हजार की सहायता दी जा रही है, ताकि वो अपनी जिंदगी को दोबारा शुरू कर सकें. सरकार की ओर से 885 कम्युनिटी किचेन चलाये जा रहे हैं, जिनमें सुबह- शाम बाढ़ पीड़ितों का खाना खिलाया जा रहा है. सरकार के राहत शिविरों में 63 सौ लोग रह रहे हैं. राहत शिविर सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर में चल रहे हैं. 

27 जुलाई को मुख्यमंत्री ने बाढ़ सुखाड़ को लेकर समीक्षा बैठक की, तो उसमें इनसे जुड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा की गयी. बैठक में डिप्टी सीएम सुशील मोदी के साथ प्रदेश के सभी मंत्री और आला अधिकारी मौजूद रहे. इस दौरान मुख्यमंत्री ने राहत और बचाव के बारे में जानकारी ली. संबंधित जिलों के डीएम से मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात की और ग्राउंड रिपोर्ट जाना. इसके बाद सीएम ने मंत्रियों के अपने क्षेत्र में जाने को कहा, ताकि सरकार की ओर से जो राहत दी जा रही है, उसकी मॉनिटरिंग हो सके. 

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि आप जिन जिलों के प्रभार में है, वहां का दौरा 3 अगस्त को करें. मंत्रियों के साथ प्रभारी सचिव को भी जाने को कहा गया है. मंत्री इस दिन जिलों में बैठक करेंगे और वहां के हालात के बारे में जानकारी लेंगे. इसके अलावा सरकार की ओर से चलाये जा रहे जल - जंगल और हरियाली मिशन के बारे में भी जानेंगे. इसके बाद 18 अगस्त को फिर से बैठक होगी, जिसमें मुख्यमंत्री फिर से बाढ़ और सुखाड़ के हालात की समीक्षा करेंगे. 

बाढ़ प्रभावित इलाकों में हुये नुकसान के आकलन का आदेश भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया. साथ ही सुखाड़ प्रभावित जिलों में रोपनी की क्या स्थिति है, इसके आकलन का निर्देश भी मुख्यमंत्री ने जारी किया है और किस तरह से नहरों में पानी पहुंचा कर किसानों को राहत दी जा सकती है, इसकी व्यवस्था करने को भी कहा है. सरकार उन जिलों को सूखाग्रस्त मानती है, जहां फसल 33 फीसदी तक होती है. इसके बाद फसल सहायता योजना और कृषि इनपुट के जरिये किसानों को मदद दी जायेगी. इसके लिए सरकार की ओर से पहल की जायेगी. सुखाड़ को लेकर जिलों में टास्क फोर्स का गठन भी किया जायेगा. 

बैठक के बाद जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कहा कि हर बिंदु की समीक्षा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से की गयी है और उसको लेकर निर्देश भी जारी किये गये हैं. उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में मदद के लिए बेहतर अभियान चलाया गया है. सहकारिता मंत्री राणा रणधीर ने कहा कि सरकार की ओर से अभी छह हजार की मदद पीड़ितों को दी जा रही है. साथ ही उनके खेती, घर और मवेशी का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपायी भी सरकार की ओर से की जायेगी.