close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

सीएम नीतीश कुमार ने शुरू की बाढ़ पीड़ितों को राहत निधि भेजने की प्रक्रिया

सीएम नीतीश कुमार पटना स्थित सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक की. साथ ही सीएम ने बाढ़ पीड़ितों को राहत निधि भेजने की प्रक्रिया की शुरूआत भी कर दी है.

सीएम नीतीश कुमार ने शुरू की बाढ़ पीड़ितों को राहत निधि भेजने की प्रक्रिया
बाढ़ पीड़ितों को राहत निधि भेजने की प्रक्रिया शुरू. (फोटो साभारः ANI)

पटनाः बिहार में करीब 55 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए है, जबकि अब तक 78 लोगों की मौत हो गई है. बिहार में बाढ़ की ताजा स्थिति को लेकर सीएम नीतीश कुमार पटना स्थित सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक की. साथ ही सीएम ने बाढ़ पीड़ितों को राहत निधि भेजने की प्रक्रिया की शुरूआत भी कर दी है.

सीएम नीतीश कुमार बाढ़ को लेकर काफी चिंता जताई है. इसी दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ सचिवालय में बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं. उन्होंने अधिकारियों को स्थिति को फौरन नियंत्रित करने और बाढ़ पीड़ितों की तत्काल मदद करने का निर्देश दिया है.

वहीं, नीतीश कुमार ने बाढ़ पीड़ितों को राहत निधि भेजने की प्रक्रिया की शुरूआत भी कर दी है. जिसके तहत बाढ़ पीड़ितों को 6000 रुपये मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा. प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मुआवजा सीधे बाढ़ पीड़ितों के बैंक खाते में डाला जाएगा. आपदा प्रबंधन के द्वारा सीधे पैसा पीड़ितों को दिया जाएगा.

आपको बता दें कि, बिहार की प्रमुख नदियों के जलस्तर में कमी आई है, परंतु बाढ़ का प्रकोप अभी भी बना हुआ है. राज्य के 12 जिलों के अधिकांश क्षेत्रों में घरों और खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है, जिसके कारण हजारों लोग बेघर हो गए हैं. इस बीच, बाढ़ से प्रभावित लोगों को शुक्रवार को राहत राशि भेजा जाना शुरू हो गया है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 12 जिलों के 97 प्रखंडों के 921 पंचायतों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है, जिससे 55 लाख से ज्यादा की जनसंख्या प्रभावित है. बाढ़ से अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों घर तबाह हो चुके हैं. 

एक तरफ कई इलाकों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ नए स्थानों में बाढ़ का पानी फैल रहा है. पानी कम होने से गावों को जोड़ने वाली सड़के और पुल-पुलिया बह चुके हैं.