एक ऐसा कॉलेज जहां बिना पढ़े छात्र हो जाते हैं पास, यहां ना होती है पढ़ाई और ना ही लगती है क्लास

Jharkhand News: यहां छात्रों का नामांकन तो किया जाता है लेकिन पढ़ाई नहीं होती है. बिना पढ़े ही छात्रों से परीक्षा फार्म भरवा दिया जाता है और बगैर पढ़ाई-क्लास लगे ही छात्र पास हो जाते हैं.

एक ऐसा कॉलेज जहां बिना पढ़े छात्र हो जाते हैं पास, यहां ना होती है पढ़ाई और ना ही लगती है क्लास
आईटीआई कॉलेज जहां छात्रों का नामांकन तो किया जाता है लेकिन पढ़ाई नहीं होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

यादवेंद्र सिंह/चतरा: चतरा जिला मुख्यालय से महज 22 किलोमीटर दूरी पर सिमरिया के इचाक कला गांव में स्थित आईटीआई कॉलेज सर्टिफिकेट वितरण केंद्र बनकर रह गया है. यहां छात्रों का नामांकन तो किया जाता है लेकिन पढ़ाई नहीं होती है. बिना पढ़े ही छात्रों से परीक्षा फार्म भरवा दिया जाता है और बगैर पढ़ाई-क्लास लगे ही छात्र पास हो जाते हैं. ऐसे में इस कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र औद्योगिक क्षेत्र के लिए क्या कर पाएंगे, इसका आप अनुमान खुद लगा सकते हैं.

दरअसल, छात्र-छात्राओं को बेहतर औद्योगिक शिक्षा देने के उद्देश्य से इस औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान का निर्माण सिमरिया प्रखंड के इचाक कला गांव में कराया गया था. लगभग 8 करोड़ के इस आईटीआई कॉलेज का 12 नंवबर 2016 को सांसद सुनील सिंह और पूर्व विधायक गणेश गंझू ने उद्घाटन किया था.

बता दें कि सूबे के श्रम व नियोजन मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कॉलेज में पढ़ाई नहीं होने का दोष पूर्व की बीजेपी (BJP) सरकार को देते हुए कहा है कि 'पिछले 5 साल बीजेपी सरकार रही. लेकिन शिक्षा पर ध्यान नहीं दिया, जिसका खामियाजा आज आईटीआई के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है'. उन्होंने कहा कि 'अब प्रदेश में गठबंधन की सरकार आ गई है, जल्द ही अब आईटीआई कॉलेज में शिक्षकों की बहाली की जाएगी'.

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि 'जब सिमरिया में आईटीआई कॉलेज की स्थापना की जा रही थी, तब हमने सोचा था कि हमारे बच्चे इसमें औद्योगिक क्षेत्र की पढ़ाई कर न सिर्फ अपना भविष्य संवारेंगे, बल्कि अभिभावक के साथ साथ क्षेत्र का नाम भी रौशन करेंगें. परन्तु दुर्भाग्य यह है कि कॉलेज खुलने के चार वर्ष बाद भी यह संस्थान शिक्षक विहीन है. संस्थान में सिर्फ छात्रों का नामांकन का काम किया जाता है, लेकिन पढ़ाई नहीं होती, छात्र औद्योगिक शिक्षा से दूर हैं. यहां प्रत्येक साल 160 छात्रों का नामांकन लेने का लक्ष्य है. देखा जाए तो इस संस्थान में छात्र जैसे-तैसे पढ़ाई कर सत्र पूरा कर रहे हैं. संस्थान में इलेक्ट्रिशियन, फिटर, डीजल, मैकेनिक और बेल्डर की प्रायोगिक प्रशिक्षण से छात्र काफी दूर हैं, यहां रखे प्रायोगिक सामग्री जंग लगकर बेकार पड़ी हुई'.