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बिहार में अपने खोए हुए जनाधार की तरफ लौटने की कोशिश में है कांग्रेस?

शुरुआती दौर में कांग्रेस को ब्रह्मणों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उदय के साथ ही इस समूह पर पकड़ कमजोर पड़ गई.

बिहार में अपने खोए हुए जनाधार की तरफ लौटने की कोशिश में है कांग्रेस?
बिहार में कांग्रेस के खोए वोट बैंक को साधने में जुटे राहुल गांधी. (फाइल फोटो)

पटना : देश में इन दिनों सवर्ण आंदोलन को लेकर सियासत तेज है. इस सबके बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार कांग्रेस की कमान एक ब्राह्मण नेता मदन मोहन झा के हाथों सौंप दी है. इससे पहले भी वर्षों से अपनी पार्टी के लिए लगातार काम करते आ रहे कांग्रेस प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्रा को एमएलसी बनाकर कुछ तो संकेत देने की कोशिश की गई है. हाल ही में हुए इन दो राजनीतिक घटनाक्रम से तो यही प्रतीत हो रहा है कि कांग्रेस अपने खोए हुए जनाधार की तरफ लौटने की कोशिश करती दिख रही है.

बिहार के ब्रह्मण वोटरों की संख्या तकरीबन आठ प्रतिशत है. शुरुआती दौर में कांग्रेस को ब्रह्मणों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उदय के साथ ही इस समूह पर पकड़ कमजोर पड़ गई. कमजोर होती कांग्रेस और लालू यादव के सियासी उदय के बीच ब्राह्मणों ने बीजेपी को अपना समर्थन देना शुरू कर दिया. कांग्रेस ने दोनों नेताओं की नियुक्ति कर बीजेपी के उस आठ प्रतिशत वोट बैंक को तोड़ने की कोशिश करती दिख रही है जो फिलहाल उससे दूरी बनाए हुए हैं.

सवर्ण आंदोलन से जूझ रही है बीजेपी
ब्राह्मण-बनियों की पार्टी कही जाने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इन दिनों एससी/एसटी एक्ट को लेकर सवर्ण आंदोलन से जूझ रही है. हाल ही में बिहार में नीतीश सरकार में शामिल सवर्ण नेताओं के घरों का ब्राह्मण महासभा के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था. कई जगह नेताओं को विरोध प्रदर्शन झेलना पड़ा है.

इस सबके बीच अगर हम महागठबंधन की बात करें तो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) जहां अपने एम-वाई (मुस्लिम और यादव) समीकरण को मजबूत करने में जुटी है. वहीं, कांग्रेस का ब्राह्मण कार्ड कितना कारगर साबित होगा यह स्थिति तो लोकसभा चुनाव परिणाम के साथ स्पष्ट हो जाएगी.

कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस के कद्दावर नेता और बिहार के शिक्षा मंत्री रह चुके नागेंद्र झा के बेटे हैं. मदन झा दरभंगा के मनीगाछी प्रखंड से आते हैं. वहीं, कांग्रेस एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा बगल के मधुबनी के रहने वाले हैं. बिहार में ब्राह्मणों की राजनीति के नजरिए से ये दोनों जिला काफी उपयुक्त माना जाता है.