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किशनगंज सीट पर हार से सदमे में कांग्रेस, नेताओं ने उम्मीदवार चयन को बताया कारण

किशनगंज सीट हाथ से निकले पर कांग्रेस पार्टी सदमे में है. नेताओं ने गलत उम्मीदवार और परिवारवाद को हार का कारण बताया है. उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस सांसद डॉ जावेद को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

किशनगंज सीट पर हार से सदमे में कांग्रेस, नेताओं ने उम्मीदवार चयन को बताया कारण
प्रेमचंद्र मिश्रा ने परिवारवाद को बताया हार का कारण. (फाइल फोटो)

पटना: बिहार में पांच विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के परिणाम काफी रोचक रहे. किशनगंज (Kishanganj) सीट ने तो कांग्रेस (Congress) पार्टी को चौंका दिया. इस सीट पर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रत्याशी कमरुल होदा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी की स्वीटी सिंह को दस हजार से अधिक मतों से पराजित किया है. इससे भी बड़ी बात यह है कि आजादी से लेकर अब तक इस इलाके को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन इस उपचुनाव में एआईएमआईएम ने सेंधमारी करते हुए बड़ी जीत दर्ज की है.

किशनगंज सीट हाथ से निकले पर कांग्रेस पार्टी सदमे में है. नेताओं ने गलत उम्मीदवार और परिवारवाद को हार का कारण बताया है. उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस सांसद डॉ जावेद को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

बिहार कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी (Kaukab Kadri) ने कहा कि 1952 से रही हमारी परंपरागत सीट हाथ से निकलने को लेकर हमे दुख है. गलत उम्मीदवार को लेकर लोगों में नाराजगी थी. कैंडिडेट चयन में वहां के सांसद डॉ. जावेद की राय पर ही हुआ था. ज्ञात हो कि किशनगंज विधानसभा सीट डॉ. जावेद के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी. इसके बाद यह सीट खाली हो गई थी और कांग्रेस ने यहां से डॉ जावेद की मां को उम्मीदवार बनाया था. 

कांग्रेस एमएलसी और प्रवक्ता प्रेमचंद्र गुप्ता ने कहा कि पार्टी इस मामले पर गंभीरता से सोचना होगा. गलत उम्मीदवार चयन के कारण वहां के लोगों में असंतोष था. कार्यकर्ताओं की उपेक्षा अब नहीं चलने वाली है. उन्होंने कहा कि जनता ने बता दिया है कि परिवार के लोगों को टिकट देने का अंजाम अब यही होगा. जेडीयू ने भी खामियाजा भुगता है.