बिहार: PM मोदी के सपनों में लगी भ्रष्टाचार की सेंध, PMKVY में गड़बड़ी का खुलासा

युवाओं को तकनीक रुप से प्रशिक्षित करने के बहाने बिहार में बड़ी गड़बड़ी सामने आयी है. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चलने वाले ट्रेनिंग के नाम पर भ्रष्टाचारियों ने योजना में सेंध लगा दी है.

बिहार: PM मोदी के सपनों में लगी भ्रष्टाचार की सेंध, PMKVY में गड़बड़ी का खुलासा
श्रम संसाधन मंत्री ने दिए जांच के आदेश.

पटना: प्रधानमंत्री पीएम नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने देश के कम पढ़े-लिखे युवाओं के लिए कौशल विकास योजना (PMKVY) की शुरुआत की है. ताकि तकनीक शिक्षा हांसिल कर आर्थिक रुप से अपने पैरों पर खड़े हो सकें. लेकिन भ्रष्टाचार के दीमक ने पीएम के सपनों को भी नहीं छोड़ा. बिहार में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत भी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. बिना जांचे परखे एक एक संस्था को पूरे बिहार में 39 सेंटर चलाने की अनुमति दे दी गई. मामले के खुलासे के बाद बिहार का श्रम संसाधन विभाग जांच में जुट गया है.

युवाओं को तकनीक रुप से प्रशिक्षित करने के बहाने बिहार में बड़ी गड़बड़ी सामने आयी है. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चलने वाले ट्रेनिंग के नाम पर भ्रष्टाचारियों ने योजना में सेंध लगा दी है. श्रम संसाधन विभाग की ओर से बिना जांच पड़ताल किए ऐसी संस्थाओं को भी ट्रेनिंग का जिम्मा थमा दिया गया. जो इस लायक नहीं थे.

कई ऐसी संस्थाओं के नाम सामने आये हैं, जो एक या दो नहीं बल्कि एक साथ 39 सेंटर चला रहे हैं. इस बात का खुलासा होने के साथ ही श्रम संसाधन विभाग के मंत्री विजय सिन्हा ने आनन-फानन में अपने बड़े अधिकारियों की बैठक बुलायी और जांच के आदेश दे दिये.

मंत्री विजय सिन्हा कहते हैं कि एक, दो नहीं बल्कि ऐसी संस्थाओं के नाम सामने आए हैं जो 10 से 39 सेंटर एक साथ चला रहे हैं. बिना जांच पड़ताल के सेंटर चलाने की इजाजत संस्थाओं को दे दी गई. विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ये खेल चल रहा था. हम मामले की जांच कराएंगे. गड़बड़ी की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है.

जिन संस्थाओं पर विभाग के मंत्री ने सवाल उठाये हैं उनमें शिक्षा नाम की संस्था है, जो बिहार की संस्था है और रे बिहार में 39 सेंटर चल रहे हैं. दूसरा नाम AISECT  का है, जो कि आंध्रप्रदेश की संस्था है और इसके 22 सेंटर चल रहे हैं. NRDP नाम की संस्था बिहार की है, जिसे 21 सेंटर चलाने की इजाजत दे दी गयी है. RSWL नाम की संस्था भीलवाड़ा राजस्थान की है, जिसे बिहार में 18 सेंटर चलाने की इजाजत दी गयी है. JIS नाम की संस्था कोलकाता की है, जिसे 18 सेंटर चलाने की इजाजत दे दी गयी है.

इन्हीं संस्थाओं में से एक संस्था की वास्तविक स्थिती जानने की कोशिश हमारी टीम ने की. शिक्षा नाम की संस्था के ऑफिस जाकर हमारी टीम ने रियलिटी चेक किया. संस्था की ओर से बताया गया कि इसे अमित कुमार सिंह चलाते हैं. फिलहाल वह पटना में नहीं हैं. उन्हें आने में वक्त लगेगा. उनके आने के बाद ही पूरी बातचीत हो पाएगी. ऑफिस के स्टॉफ ने यह स्वीकार किया कि उनके 39 सेंटर बिहार में चलते हैं. कई जिलों में दो से तीन सेंटर काम कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह रही कि संस्था का पटना में कोई सेंटर नहीं चल रहा.

कौशल विकास योजना के तहत संस्थाओं को सेंटर चलाने की अनुमति उनकी क्षमता के अधार पर दी जाती है. उसके लिए बजाप्ता विभाग के अधिकारी स्पॉट पर जाकर वेरिफिकेशन करते हैं कि संस्था जितने सेंटर और स्टूडेंट्स को प्रशिक्षित करने का दावा कर रही है उनके पास उतने संसाधन हैं या नहीं. योजना के मुताबिक, एक सेंटर पर 120 से ज्यादा स्टूडेंट्स लेने का प्रावधान नहीं है. एक छात्र के प्रशिक्षण पर केंद्र सरकार 8 हजार रुपये खर्च करती है. यही वजह है कि संस्थाएं कमाई के लिए एक साथ कई सेंटर्स खुलवा लेते हैं. बिहार में इस पैमाने का उल्लंघन भी हुआ, जिसका नतीजा सामने है. 

बिहार सरकार के मंत्री खुद इस बात को स्वीकार कर रहे हैं. केंद्र सरकार ने 2020 तक करोड़ों युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है. लेकिन इस तरह का भ्रस्टाचार मिशन में बड़ी बाधक बन सकता है. हलांकि यह बात भी देखना दिलचस्प होगा कि विभागीय जांच में किसी पर कार्रवाई होगी भी या ये सिर्फ आईवॉश बनकर रह जाएगा.