जामताड़ा में पकड़ा गया 'मोस्ट वांटेड' साइबर क्रिमिनल, पुलिस को लंबे समय से थी तलाश

 एक ओर जहां सरकार साइबर क्राइम से निपटना चाहती है वहीं दूसरी ओर साइबर क्राइम से जुड़ी झारखंड के जामताडा से एक ऐसी घटना आई है जिसे पढ़कर आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे. 

जामताड़ा में पकड़ा गया 'मोस्ट वांटेड' साइबर क्रिमिनल, पुलिस को लंबे समय से थी तलाश
इस साइबर अपराधी की लंबे समय से पुलिस को तलाश थी (प्रतिकात्मक तस्वीर)

धनबाद: एक ओर जहां सरकार साइबर क्राइम से निपटना चाहती है वहीं दूसरी ओर साइबर क्राइम से जुड़ी झारखंड के जामताडा से एक ऐसी घटना आई है जिसे पढ़कर आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे. दरअसल यह शख्स देश का साइबर क्राइम का सबसे बड़ा अपराधी माना जाता है जिसकी तलाश 26 राज्यों के पुलिस को थी. साइबर क्राइम की दुनिया में उसे 'हेलो मास्टर' के नाम से जानते थे. 

यह शख्स अपने गांव में 300-400 लोगों को साइबर अपराध की ट्रेनिंग भी देता था और यह आपको जानकर हैरानी होगी कि यह शख्स साइबर अपराध की ट्रेनिंग देने के लिए स्कूल भी चलाता था और इसका कॉलसेंटर भी झारखंड में ही था लेकिन आखिरकार यह अपराधी दिल्ली पुलिस के गिरफ्त में आ ही गया. कहा जाता है कि यह शख्स महानायक अमिताभ बच्चन को भी चूना लगा चुका है. 

रामकुमार उर्फ सीताराम के सामने अच्छे-अच्छे साइबर एक्सपर्ट भी बौने साबित हो जाते हैं और इसके संगीन अपराधों की वजह से 26 राज्यों की पुलिस इसके पीछे पड़ी थी. रामकुमार मंडल 2011 में मुंबई गया था जहां वो मोबाइल रिचार्ज का काम करता था और इसी दौरान मोबाइल फिशिंग भी सीखी और मोबाइल रिचार्ज के जरिये दूसरे के एकाउंट में सेंध लगाता था.  

मुंबई से यह जामताड़ा आया और कभी बैंक मैनेजर तो कभी आरबीआई के नाम से देशभर में कई लोगों को चूना लगाता था. रामकुमार दरअसल एटीएम का कस्टमर केयर बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था.उसने कहा कि 'हम एटीएम के कस्टमर केयर बनकर कॉल करते थे. कभी बोलते थे कि आरबीआई से बोल रहे हैं तो कभी बोलते थे कि आपका अकाउंट बंद हो जाएगा इसलिए अपना एटीएम का पासवर्ड हमें बता दें ताकि हम उसे बदल दें. इसके बाद अक्सर लोग झांसे में आ जाते थे और हम ओटीपी लेकर ट्रांजैक्शन करते थे.'

जनवरी से लेकर अभी तक रामकुमार के अकाउंट में करोड़ों का ट्रांजैक्शन हो चुका है. झारखंड में रामकुमार का करोड़ों का आलीशान बंगला है जो आधुनिक तकनीकों से लैस है. पैसों की ठगी कर रामकुमार अपने गांव वालों की भी मदद करता था जिसकी वजह से गांव वाले इसका सपोर्ट करते थे और पुलिस को हमेशा खाली हाथ लौटना पड़ता था. दिल्ली पुलिस लंबे समय से इस गैंग पर काम कर रही थी और आखिरकार पुलिस को इसे पकड़ने में कामयाब हुई.