चक्रवात अम्फान जीवन के लिए तबाही, लीची के लिए 'संजीवनी'

मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के निदेशक विशाल नाथ ने मीडिया को शनिवार को बताया कि दो-तीन दिनों में आसमान पर बादल रहने, तापमान में गिरावट आने और बारिश होने से लीची के फसल को काफी लाभ हुआ है.

चक्रवात अम्फान जीवन के लिए तबाही, लीची के लिए 'संजीवनी'
चक्रवात अम्फान जीवन के लिए तबाही, लीची के लिए 'संजीवनी'. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुजफ्फरपुर: चक्रवात अम्फान पश्चिम बंगाल, ओडिशा जैसे राज्यों में भले ही आफत बन कर टूटी हो लेकिन बिहार की लीची के लिए यह संजीवनी बनकर यहां पहुंची. बिहार में अम्फान के प्रभाव के कारण कई क्षेत्रों में बारिश तो हुई लेकिन तेज हवा नहीं चली. वैज्ञानिकों की मानें तो यह बारिश लीची फसल के लिए संजीवनी साबित हो रही है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि अम्फान के कारण हुई बारिश से न केवल लीची का आकार बड़ा होगा बल्कि इसकी मिठास बढ़ेगी, गूदे की मात्रा बढ़ेगी तथा इसका लाल रंग और निखर कर सामने आएगा. बारिश के कारण बढ़ रहे तापमान में गिरावट दर्ज की गई जिससे फसल को लाभ होगा.

मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के निदेशक विशाल नाथ ने मीडिया को शनिवार को बताया कि दो-तीन दिनों में आसमान पर बादल रहने, तापमान में गिरावट आने और बारिश होने से लीची के फसल को काफी लाभ हुआ है.

उन्होंने बताया कि आमतौर पर अन्य फलों से अलग लीची के फल का विकास होता है. इसके विकास में पहले बीज तैयार होता है और उसके बाद छिलका तैयार होता है. लीची के फल में सबसे अंत में गूदा तैयार होता है. उन्होंने बताया कि अब कुछ ही दिनों के बाद लीची के फलों की तुड़ाई होनी है.

उन्होंने कहा, "शाही लीची तो करीब तैयार हो चुकी है, इस कारण यह बारिश उसके लिए तो ज्यादा फायदेमंद नहीं हुई लेकिन चायना जैसी किस्म की लीची के लिए यह बारिश संजीवनी साबित हुई है. इस बारिश से लीची का आकार बड़ा होगा, गूदे की मात्रा बढ़ेगी, मिठास बेहतरीन होगी तथा इसका लाल रंग और निखरेगा."

डॉ. विशाल नाथ के अनुसार दो-चार दिनों पहले तक लीची का औसत वजन जो 17 से 18 ग्राम था वह अब बढ़ कर 19 से 20 ग्राम से अधिक हो जाएगा तथा हरे से हल्के रंग वाली लीची का लाल रंग गहरा हो जाएगा. गूदा 10 ग्राम से बढ़ कर 14 ग्राम तक हो जाएगा .

डॉ. विशाल नाथ ने बताया कि लीची का लाल होना उसके पूरी तरह तैयार होने का सूचक माना जाता है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में तेज धूप थी जिसके कारण तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी. 

उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि इस साल जब भी तापमान में वृद्धि हुई है, तब मौसम में बदलाव आया है, इस कारण लीची की फसल अच्छी हुई है. लीची की फसल के लिए 30 से 33 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल माना जाता है.

किसानों को लीची पर कीटनाशकों का एक अतिरिक्त छिड़काव करना चाहिए जिसका प्रभाव 10 दिन में समाप्त हो जाए. उन्होंने बताया कि प्रसिद्घ शाही लीची की तुड़ाई 30 मई से प्रारंभ होने की उम्मीद है जबकि चायना या अन्य किस्म के आने में करीब 20 दिन का समय बाकी है.

इस दौरान हालांकि कुछ लीची बाजार में आ गए हैं, लेकिन यह जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है. उन्होंने कहा कि किसानों को अभी जल्दबाजी से बचना चाहिए.

इधर, लीची किसान अजय कुमार पांडेय भी कहते हैं कि जिस लीची में फल देर से आया है, उस लीची के लिए यह बारिश फायदेमंद साबित होगा. उन्होंने कहा कि किसानों को अभी सिंचाई के साथ यूरिया और पोटाश देना चाहिए, जिससे फल का आकार और गूदा बढ़ने में मदद मिलेगी.
Input:-IANS