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दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में 2018 की तुलना में जानवरों की संख्या में हुआ है इजाफा

लमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में इस बार जानवरों की हुई गणना में काफी इजाफा हुआ है. यहां हाथी-भालू की संख्या में भी वर्ष 2018 की तुलना में इजाफा हुआ है.

दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में 2018 की तुलना में जानवरों की संख्या में हुआ है इजाफा
दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में जानवरों की संख्या में इजाफा हुआ है.

पियूष मिश्रा/सिंहभूमः झारखंड के पूर्वी सिंहभूम और सराईकेला-खरसावां को सीमा पर जमशेदपुर से सटे दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में इस बार जानवरों की हुई गणना में लकड़बग्घा भी दिखाई दिए हैं. वहीं, 2018 की गणना के मुकाबले इस बार हाथियों के अलावा, हिरण, कोटरा, जंगली सुअर, बंदर, लाल गिलहरी और जंगली मुर्गी की संख्या में भी इजाफा हुआ है. ऐसे में माना जा रहा है कि सेंचुरी में वन विभाग द्वारा पानी की उपलब्धता, जानवरों की सुरक्षा और उनके निवास करने के सुरक्षित स्थान को उपयोगी बनाने से ही यह सम्भव हो पाया है.

195 वर्ग किलोमीटर में फैले दलमा वन प्राणी आश्रयणी प्रबंधन ने बीते 21-22 मई को जानवरों की गणना की. पिछले तीन वर्षों से लगातार इनकार कर रहे दलमा सेंचुरी प्रबंधन को इस बार के सेंसेक्स में हाइना का एक जोड़ा का पता चला है. सेंचुरी के अधिकारियों के मुताबिक लकड़बग्घे दो से अधिक भी हो सकते हैं. 

सेंचुरी प्रबंधन के लिए खुशी की बात यह भी है कि इस बार की गणना मे हाथी-भालू की संख्या में भी वर्ष 2018 की तुलना में इजाफा हुआ है. दलमा आश्रयणी में वन्य जीव की गणना के बात हाथियों की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले 48 से बढ़कर 67 हो गई है. वहीं, भालू की संख्या 19, कोटरा 79, जंगली सुअर 162, लंगूर 40, बंदर 552, लाल गिलहरी 45 और जंगली मुर्गी 37 पाए गए हैं. 

एलिफेंट प्रोजेक्ट जमशेदपुर और दलमा वन आश्रयणी के डीएफओ से जब हमने इस बार के सेंसेक्स में वन्य जीवों की संख्या में इजाफा होने की वजह पूछा तो उनका कहना था कि वन विभाग ने जानवरों की सुरक्षा, निवास स्थान को उपयोगी बनाने में काफी मेहनत की है. पानी की उपलब्धता जंगलों में हो इसके लिए अतिरिक्त प्रयास रंग लाया. इसके चलत दलमा सेंचुरी में हर जानवर खुद को सुरक्षित मानते हैं, आसानी से विचरण करते है, जिसकी वजह से संख्या में बृद्धि हुई है. 

एक और वजह यह भी है कि दलमा सेंचुरी में आने-जाने वाले रास्तों में छह चेक नाका भी बनाये गए हैं, ताकि शिकारियों पर कड़ी निगाह रखी जा सके और अनावश्यक रूप से कोई सेंचुरी में प्रवेश नही कर सके. लाल गिलहरी, बंदर और पक्षियों के अनुकूल फलदार वृक्ष लगाए गए हैं तो वहीं सेंचुरी के कटाशनी पहाड़ की गुफाओं में भालू का पनाहगाह है. इधर भारत सरकार ने दलमा सेंचुरी को इको टूरिज्म बनाने के लिए आठ करोड़ की राशि मुहैया कराई है, ऐसे में आने वाले समय मे दलमा आश्रयणी में पर्यटकों को भी बेहतर सुविधाएं देने के लिए सेंचुरी प्रबंधन मैप तैयार करने में जुटा है.

बहरहाल, वन अधिकारियों और वन रक्षियों की नियुक्ति के बाद दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के विकास में तेजी आई है इससे इनकार नही कर सकते हालांकि मौजूदा समय मे अभी भी अधिकारियों और वन कर्मियों की कमी से राष्ट्रीय गज अभर्यान्य दलमा जूझ रहा है.