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'चमकी बुखार' से फीकी पड़ी लीची की चमक, व्यापारियों को हो रहा है लाखों का नुकसान

आमतौर पर लीची का बाजार एक महीने का ही होता है. पटना में लीची बाजार की बात करें तो बाजार समिति के लगभग 40 से 50 व्यवसायी हैं जो लीची के सीजन में व्यवसाय करते हैं.

'चमकी बुखार' से फीकी पड़ी लीची की चमक, व्यापारियों को हो रहा है लाखों का नुकसान
पटना बाजार समिति के उपाध्यक्ष वरुण कुमार ने कहा कि लीची में कहीं कोई परेशानी नहीं है.

आशुतोष/बृजेश/पटना: लीची से जुड़े चमकी बुखार का असर न केवल आम इंसान को डरा रहा है. बल्कि इसकी चपेट में अब बाजार भी आ चुका है. इस सीजन लीची का बाजार पूरी तरह चरमरा चुका है. पहले मौसम की मार थी अब चमकी के मार ने बाजार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. बाजार से जुड़े व्यवसायियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है.

मुजफ्फरपुर की शाही लीची का स्वाद पूरे देश में प्रसिद्ध है. आम के साथ अगर शाही लीची नहीं खाई तो क्या खाया. लेकिन इस बार ये लीची लोगों को डरा रही है. क्योंकि इसके साथ चमकी बुखार का प्रचार काफी जोर शोर से हो चुका है. डॉक्टर भले ही चमकी बुखार से लीची के संबंध को खारिज करते हों. लेकिन सरकार की ओर से जारी गाईडलाईन में बच्चों को खाली पेट लीची खाने से रोकने की सलाह दी गई है. जिसके बाद से लोगों में लीची को लेकर अरुचि देखने को मिली है. पटना के बाजार समिति में इसका बडा उदाहरण भी देखने को मिल रहा है.

पटना बाजार समिति के उपाध्यक्ष वरुण कुमार ने कहा कि लीची में कहीं कोई परेशानी नहीं है. लेकिन इस सीजन लीची की फसल अच्छी नहीं हुई है. लीची को जैसा मौसम पानी मिलना चाहिए था, इसबार नहीं मिल सका है. यही वजह है कि लीची की साईज पहले की तुलना में काफी छोटी है. बारिश नहीं होने का भी फसल पर असर हुआ है. किसान के साथ साथ व्यवसायियों को भी इसका खामियाजा उठाना पर रहा है.

आमतौर पर लीची का बाजार एक महीने का ही होता है. पटना में लीची बाजार की बात करें तो बाजार समिति के लगभग 40 से 50 व्यवसायी हैं जो लीची के सीजन में व्यवसाय करते हैं. हर दिन हर व्यवसायी लगभग 50 हजार से एक लाख रुपये तक की लीची का थोक व्यापार करते हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो 30 दिनों में एक व्यवसायी लीची व्यवसायी में अपने लाखों रुपये फंसा देता है. पटना बाजार समिति के सचिव भुट्टो खां बताते हैं कि लीची को लेकर फैली अफवाह ने बाजार को पूरी तरह खत्म कर दिया है. 

उन्होंने कहा कि चमकी बुखार की अफवाहों के बीच कोई भी इन्सान लीची खाने को तैयार नहीं है. पब्लिक के बीच मांग कम होने की वजह से बाजार काफी मंदा हो चुका है. अपने पीक सीजन में जो लीची 60 से 70 रुपये प्रति किलो बिकती थी, आज वो 20 रुपये किलो बिक रही है. हालांकि ऐसा नहीं है कि लोग लीची से बिलकुल परहेज करने लगे हैं. कुल मिलाकर कहा जाए तो लीची को लेकर अभी समाज में काफी भ्रम की स्थिति है. ऐसे में लोगों को चमकी बुखार को लेकर जागरुक करने के साथ सरकार को लीची को लेकर भी अपना नजरिया साफ करना होगा.