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लालू ने जिस नोटबंदी को जी भर कोसा, उसी से मिला नीतीश के खिलाफ सबसे बड़ा हथि‍यार

नोटबंदी ने लालू को नीतीश के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार थमा दिया. बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद लालू प्रसाद यादव ने नीतीश और राज्‍य सरकार पर हमला बोलने के लिए सृजन घोटाले को अपना हथियार बनाया है.

लालू ने जिस नोटबंदी को जी भर कोसा, उसी से मिला नीतीश के खिलाफ सबसे बड़ा हथि‍यार
सृजन एनजीओ का ज्यादातर पैसा रियल स्टेट में लगा हुआ था. (फाइल फोटो)

पटना : राष्‍ट्रीय जनता दल के अध्‍यक्ष लालू प्रसाद यादव उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्‍होंने नोटबंदी की खूब आलोचना की है. इसे लेकर उन्‍होंने मोदी सरकार पर खूब हमला बोला. लेकिन इसके ठीक उलट बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने नेाटबंदी की सराहना की. लेकिन इसी नोटबंदी ने लालू को नीतीश के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार थमा दिया. बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद लालू प्रसाद यादव ने नीतीश और राज्‍य सरकार पर हमला बोलने के लिए सृजन घोटाले को अपना हथियार बनाया है. इस घोटाले पर वह इन दिनों खूब हमलावर हैं. लेकिन आपको जानकर ये आश्‍चर्य होगा कि इस घोटाले की परतें नोटबंदी के कारण खुली हैं. जी हां ये चौंकाने वाला तथ्य हाल में ही सामने आया है. सृजन घोटाले की पोल नोटबंदी के कारण खुली है. अगर नोटबंदी ना हुई होती तो शायद ये घोटाला सामने ही नहीं आ पाता. पिछले साल नवंबर में हुई नोटबंदी से हालात इतने बदल गए थे कि सृजन के करोड़ों रुपए जैसे और जहां थे वहीं फंस गए. सृजन की कर्ताधर्ता रहीं मनोरमा देवी की फरवरी में हुई मौत के बाद कई लेनदारों ने पैसा देने से ही इनकार कर दिया.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, करोड़ों के फर्जीवाड़े में सरकारी पैसे को ब्याज पर बाजार में दिया जाता था. जब नोटबंदी हुई तो पुराने नोट होने से लेनदेन रुक गया. बैंकों से पैसा निकालने और जमा करने के सख्त नियम की वजह से सृजन की कमर टूट गई. न तो बाजार में हज़ार और पांच सौ के नोट चल रहे थे और ना ही बैंकों में भारी रकम जमा हो रहे थी. काला धन होने की वजह से बैंकों में सृजन का पैसा लौट नहीं पाया, इस तरह सरकारी पैसा बैंकों में लौट नहीं पाया और सृजन का खेल बिगड़ता गया. चेक बाउंस होने लगा. जांच के मुताबिक सरकारी पैसा सृजन के खाते में पहुँच जाता उसे बैंक से भी ब्याज मिलता और पैसा बाजार में लगाने से उसे वहां से भी ब्याज मिलता यानी दो तरफा फायदा सृजन को मिल रहा था.

सृजन एनजीओ का ज्यादातर पैसा रियल स्टेट में लगा हुआ था केवल बिहार में ही नहीं बल्कि दिल्ली-गाज़ियाबाद-देहरादून समेत कई राज्यों में रियल स्टेट में पैसा लगा था, लेकिन नोटबंदी की मार से बिक्री नहीं हो पाई और पैसा वापस नहीं आया. घोटाले में अबतक 12 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. रविवार को कहलगांव के को-ऑपरेटिव बैंक के मैनेजर सुनीता कुमार और नौगछिया के मैनेजर अशोक को एस आईटी ने गिरफ्तार किया है अभी और कई गिरफ्तारियां होनी है. जांच सीबीआई को सौंप दी गई है.