NGT के आदेश के बावजूद JCB मशीनों से किया जा रहा बालू उत्खन्न, 3 गुना वसूले जा रहे दाम

एनजीटी के आदेश के खिलाफ जाना कहीं ना कहीं उचित नहीं होगा क्योंकि पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में एनजीटी का महत्वपूर्ण भूमिका रहा है लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से बालू का सही रूप से भंडारण नहीं हो पाया है.

NGT के आदेश के बावजूद JCB मशीनों से किया जा रहा बालू उत्खन्न, 3 गुना वसूले जा रहे दाम
NGT के आदेश के बावजूद JCB मशीनों से किया जा रहा बालू उत्खन्न, 3 गुना वसूले जा रहे दाम.

रांची: झारखंड में बालू को लेकर हमेशा से विवाद और सियासत होता रहा है लेकिन स्थिति और भी खराब होती जा रही है.  दरसअल झारखंड में एनजीटी के आदेश के मुताबिक 10 जून से 15 अक्टूबर तक बालू के उत्खनन पर रोक लगी है, लेकिन राजधानी रांची से तकरीबन 50 किलोमीटर दूर कांची नदी से बड़ी-बड़ी मशीन जेसीबी से बालू का उत्खनन किया जा रहा है.

वहां पर दिन के उजाले में नदी से जेसीबी से बालू का उत्खनन किया जा रहा है. इसके अलावा बालू माफियाओं की ओर से भंडारण के पीछे बड़े मशीनों से उत्खनन का खेल चल रहा है. ट्रैक्टर से पहुंच रहे नदी से निकाल कर बालू रांची तक पहुंचाया जा रहा है और तीन गुना अधिक मूल्य वसूल किए जा रहे हैं.

क्या है एनजीटी का गाइडलाइन्स

- 10 जून से 15 अक्टूबर 2020 तक नदी घाटों से बालू उत्खनन पर पूर्णतया रोक है.

- खान एवं भू-तत्व विभाग रांची की ओर से जेआईएमएमएस पोर्टल के माध्यम से 2019 में बालू खनिज का ई-परिवहन परिवहन चालान निर्गत करना बंद कर दिया गया था.

- इधर नदी बालू घाट से श्रेणी वन एवं श्रेणी टू के बालू घाटों से बालू का उठाव बारिश के समय में 10 जून से 15 अक्टूबर नहीं किया जाएगा.

- इस अवधि में बालू का उत्खनन करना एनजीटी के आदेश का उल्लंघन होगा

- भंडारण स्थल से बालू की आपूर्ति सिर्फ ट्रेक्टर से होगी

- इस संबंध में सभी जिला खनन पदाधिकारी 10 जून, 2020 के पूर्व के बालू भंडारण का सत्यापन करते हुए परमिट एवं चालान निर्गत करने की अनुमति दी गयी है

- विभाग ने कहा है कि भंडारण स्थल से बालू का परिवहन मात्र ट्रैक्टर से किया जाये. बड़े वाहनों जैसे हाइवा, डम्फर आदि का उपयोग नहीं किया जाये.

- भंडारण स्थल से बालू के स्टॉक का निरीक्षण समय- समय पर किया जाये.

- भंडारण स्थल से बालू की बिक्री/ आपूर्ति में सरकारी योजनाओं में आवश्यकता को प्राथमिकता दी जायेगी.

झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार ने कहा कि एनजीटी का जो आदेश हैं उसमें किसी भी परिस्थिति में बरसात के मौसम में जून के दूसरे सप्ताह में माइनिंग नहीं करना है. वह इसलिए क्योंकि उसमें नदी का एक्चुअल अब्जॉर्बसन कैपेसिटी खत्म हो जाता है जिससे मिट्टी का कटाव होने लगता है. 

इसी को लेकर एनजीटी की ओर से विस्तृत रिपोर्ट जारी किया गया है. बालू के उत्खनन पर रोक लगा दिया गया है. उन्होंने कहा कि हमारे यहां उस समय बरसात होती है और बरसात के समय मे पानी का बहाव भी होता है ओर इसका प्रतिकूल प्रभाव भी होता है.

झारखंड में बालू की अवैध बिक्री को लेकर जेएमएम विधायक सुदीप्त सोनू ने कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से नीतियों के निर्धारण का मौका नहीं मिला सरकार को. आज जो बालू के उत्खनन पर रोक लगी है, वह एनजीटी ने लगाया है. 

एनजीटी के आदेश के खिलाफ जाना कहीं ना कहीं उचित नहीं होगा क्योंकि पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में एनजीटी का महत्वपूर्ण भूमिका रहा है लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से बालू का सही रूप से भंडारण नहीं हो पाया है.

हालांकि, उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री से मांग करेंगे कि वैसे जगह से बालू को उठाव का परमिशन दिया जाए जहां सुरक्षित हो और ग्रामीण इलाकों के लोगों को सरकारी काम में बाधा न आए. फिलहाल थोड़ा इंतजार करना होगा. बालू के रेट जरूर सामान्य होंगे.

बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार ने बालू उठाव पर रोक का आदेश जारी कर दिया है, लेकिन लगातार बालू की चोरी हो रही है. बालू का उठाव हो रहा है. 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र से भी सैकड़ों ट्रक बालू रोज बंगाल की तरफ भेजे जा रहे हैं. इससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. रोज दिन ऐसी खबरें मिलती है कि गांव के लोग अगर अपने आप प्रधानमंत्री आवास या निजी कार्य के लिए बालू खरीद कर ले जाते हैं तो पुलिस उनकी गाड़ी जब्त कर कानूनी कार्रवाई करती है, उनसे जुर्माना वसूला जाता है.

इस पर राज्यसभा सांसद समीर उरांव ने कहा कि इस राज्य में बालू का विवाद लगातार चलता रहा है. अभी बालू का उठाव बंद है. ऐसे में कई सरकारी और निजी कार्य के लिए बालू की आवश्यकता होती है. बालू की कालाबाजारी जोरों से चल रहा है. सरकार इसे संरक्षण दे रही है तुरत सरकार को इसको लेकर कोई ठोस उपाय करना चाहिए.

बालू की कालाबाजारी पर आजसू के केंद्रीय प्रवक्ता देवशरण भगत ने कहा कि बालू का उठाव ग्राम सभा और पंचायतों को दिया गया था, लेकिन ग्रामसभा उतनी मजबूत नहीं है. इसलिए इस तरह के मामले सामने आते हैं. अगर ग्राम सभा और पंचायतों को सशक्त कर दिया जाए तो इन सभी समस्याओं का निदान खुद ब खुद हो जाएगा. 

अब ये देखना दिलचस्प होगा कि सरकार एनजीटी के आदेश को किस तरह से पालन करवाती है और बालू के कालाबाजारी पर कैसे लगाम लगाती है.