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गरीबी भी नहीं रोक पाई युक्तारानी को बैडमिंटन में देश का नाम रोशन करने से

बेगूसराय के बीहट नगर परिषद क्षेत्र में एक दलित परिवार में पैदा हुई युक्ति ने बॉल बैडमिंटन प्रतियोगिता में जूनियर अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय सीरीज में श्रीलंका में श्रीलंका को 3-0 से हराकर भारत को जीत दिलाई.

गरीबी भी नहीं रोक पाई युक्तारानी को बैडमिंटन में देश का नाम रोशन करने से
बेगूसराय, बिहार की युक्ता रानी ने सुविधाओं की कमी को नजरअंदाज करते हुए किया शानदार प्रदर्शन (फाइल फोटो

बेगूसराय (राजीव कुमार) : अगर आदमी मे  जज्बा हो तो वह हर असंभव काम को भी संभव कर सकता है बशर्ते वह उसके लायक मेहनत करे. मुकाम पाने में जज्बा के सामने गरीबी भी आड़े नहीं आती. यह बात खेलों पर भी लागू होती है और बैडमिंटन पर भी. भारत में बैडमिंटन काफी लोकप्रिय खेल है. इस खेल में अवसर भी बहुत है. लेकिन इस खेल में भविष्य बनाने के लिए अवसर सभी जगह उपलब्ध नहीं हैं हर किसी को पुलेला गोपीचंद जैसा कोच नहीं मिल पाता और न ही सायना नेहवाल और पीवी सिंधु जैसे अवसर. लेकिन इन सीमाओं के बावजूद देश के कोने कोने में बैडमिंटन की लोकप्रियता कम नहीं हुई है. 

बेगूसराय के बीहट की युक्ता रानी ने अपने जज्बे के बदौलत बॉल बैडमिंटन प्रतियोगिता में जूनियर अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय सीरीज में श्रीलंका में श्रीलंका को 3-0 से हराकर भारत को विजेता बना दिया. इसके बाद युक्ति ना सिर्फ बेगूसराय की गौरव कहलाने लगी बल्कि पूरे देश ने इस बालिका की प्रतिभा को प्रोत्साहित किया. 

बेगूसराय के बीहट नगर परिषद क्षेत्र में एक दलित परिवार में पैदा हुई युक्ति का परिवार आज भी बेहद गरीबी स्थिति में जीवन यापन कर रहा है. इसके पिता रामानुज दास पटना में एक जूते-चप्पल की दुकान में काम करते हैं और यह लड़की अपने घर पर अपनी मां सरिता देवी के साथ रहकर पढ़ाई- लिखाई और प्रतिभा को निखारने में तल्लीन रहती है. युक्ता रानी अल्प संसाधन में अपनी कड़ी मेहनत से एचएफसी ग्राउंड में अभ्यास करती हैं तथा गरीबी से संघर्ष करती है. श्रीलंका में संपन्न हुए बालिका वर्ग से बिहार की 2 लड़कियां थी जिसमें युक्ता रानी बेगूसराय की थी.

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जिसने श्रीलंका को हराकर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. युक्त रानी को विश्वास है कि अगर सरकार उसे जरा मदद करें तो वह आगे भारत का नाम रोशन करने में जरूर कामयाब होगी.

Yukta Rani from Begusarai

युक्ता रानी के साथ अभ्यास करने वाली लड़कियां भी युक्ता रानी को आदर्श मानती है तथा छोटी-छोटी बच्चियों को भी उससे सीख लेने की सलाह देती है खुद कोच विकास कुमार भी उसके जज्बे से काफी प्रभावित हैं. बस थोडी से संसाधन के लिए जिला प्रशासन और सरकार से सहायता की बात कहते है.

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युक्ता रानी की मां को अपनी बेटी पर नाज है तमाम हालातों से संघर्ष करते हुए वह अपनी बेटी को उच्च शिखर पर  देखना चाहती है. लेकिन इतना तो तय है कि अगर इस खिलाड़ी को आर्थिक मदद में कुछ हाथ आगे आते हैं तो आने वाले दिनों में या भारत के लिए ढेरों खिताब जीत सकती है.