बिहार के इस 'राम भक्त' की जगी आस, मंदिर निर्माण होने तक लिया था नंगे पांव चलने का संकल्प

किशनगंज निवासी देव दास किराना दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. इसके अलावा वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिला कार्यवाहक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

बिहार के इस 'राम भक्त' की जगी आस, मंदिर निर्माण होने तक लिया था नंगे पांव चलने का संकल्प
देव दास आरएसएस के स्वयंसेवक भी हैं.

किशनगंज: आज हम आपको बिहार के किशनगंज के एक ऐसे राम भक्त से मिलवाते हैं, जिसने 18 वर्ष पूर्व दृढ़ संकल्प लिया था कि अयोध्या में जब तक राम मंदिर (Ram Mandir) नहीं बन जाता तब तक अपने पैरों में चप्पल नहीं पहनेंगे. अपने इस संकल्प पर वह कायम भी रहे. चाहे ठंड हो या गर्मी या फिर बरसात का मौसम, कठिन से कठिन सफर भी इन्होंने नंगे पांव तय किया. राम मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद इस राम भक्त के चप्पल ग्रहण करने की आस जगी है.

किशनगंज निवासी देव दास किराना दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. इसके अलावा वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिला कार्यवाहक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

इनका कहना है कि देश के साथ-साथ लोगों की सेवा भाव के उद्देश्य से ब्रह्मचारी जीवन जीने का संकल्प लिया था. वर्ष 2001 में जब वह तीर्थ पर निकले थे और अयोध्या में रामलला का दर्शन करने गए थे, उसी समय उन्होंने यह संकल्प लिया था.

उनका कहना है कि जब उन्होंने भगवान राम को एक पिंजड़े में कैद पाया तो उन्हें काफी दुःख हुआ. उन्होंने वहीं संकल्प लिया कि जब तक इस स्थल पर भगवान राम का मंदिर स्थापित नहीं हो जाता तब तक नंगे पांव ही रहना है.

देव दास बताते हैं कि वर्ष 2001 में इंटर की परीक्षा पास करने के बाद ही उन्होंने चप्पल नहीं पहनने का प्रण लिया था. उन्होंने कहा कि शुरूआती दौर में नंगे पांव चलना खासकर गर्मी के मौसम में काफी कठिन था, लेकिन प्रभु राम के आगे सब आसान हो गया. देव दास ने बताया कि इस 18 वर्ष के दौरान नागपुर भी गए थे, जहां जमीन पर कदम रखते ही उनके पैर जलने लगे थे. पैरों में छाले पर गए थे, लेकिन दृढ़ संकल्प के आगे हिम्मत नहीं हारी. इसी का नतीजा था कि सड़कों पर पड़े कांच के टुकड़े हों या फिर कंकड़-पत्थर सभी को प्रभु राम ने फूल बना दिया. देव का कहना है उनका संकल्प तब टूटेगा जब अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना हो जाएगी. वो वहीं पहुंचकर पादुका ग्रहण करेंगे.