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गया: पितृपक्ष मेले का आज आखिरी दिन, पितरों को मोक्ष दिलाने श्रद्धालुओं ने किया तर्पण

स्थानीय पुजारी बदरीनाथ पांडे ने बताया कि पितृपक्ष मेले के अंतिम दिन फल्गु नदी के जल से तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

गया: पितृपक्ष मेले का आज आखिरी दिन, पितरों को मोक्ष दिलाने श्रद्धालुओं ने किया तर्पण
गया में श्रद्धालुओं ने किया तर्पण.

जय कुमार, गया: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले (Pitripaksh Mela) का आज आखिरी दिन है. अंतिम दिन फल्गु नदी पर तीर्थयात्रियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा. पितृ अमस्या का दिन है. इसे महालया भी कहते हैं. आज ही के दिन लोग अपने पितरों के लिए मोक्षदायिनी फल्गु नदी के जल से तर्पण करते हैं. आज तर्पण के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में पिंडदानी पहुंचे थे, जिन्होनें अपने पितरों की मोक्ष की प्राप्ति के लिए तर्पण किया.

स्थानीय पुजारी बदरीनाथ पांडे ने बताया कि पितृपक्ष मेले के अंतिम दिन फल्गु नदी के जल से तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. सिर्फ देश-विदेश के तीर्थयात्री ही नहीं बल्कि गया शहर के रहने वाले लोग भी अंतिम दिन अपने पितरों को तर्पण करते हैं. जिससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

हालांकि 3 दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण फल्गु नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है. पूरब से लेकर पश्चिमी तट तक फल्गु नदी में पानी आ जाने से तीर्थयात्री नदी किनारे ही तर्पण कर्मकांड काम कर रहे हैं

मोक्ष नगरी के नाम से मशहूर बिहार के गया में पितृपक्ष महासंगम मेले में कोने-कोने से आए हुए श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए गुरुवार को पित्र दीपावली मनाई. देवघाट के सूर्य मंदिर के पास दीप जलाकर लोगों ने अपनो पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कामना की.

देश-विदेश से आये लोग अपने पितरों के लिए घी के दीये जलाते हैं, जिससे हजारों की संख्या में दीप जलने से पूरा देवघाट रोशनी से जगमग हो उठा. उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला. श्रद्धालुओं ने बताया कि हमने अपने पूर्वजों की खुशी, मोक्ष और शांति के लिए दीप जलाए.

-- Anupma Kumari, News Desk