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लखीसराय: नवरात्रि में जगदम्बा मंदिर में उमड़ती है भारी भीड़, वैष्णो देवी मंदिर के संस्थापक ने की स्थापना

जम्मू स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर के संस्थापक भक्त शिरोमणि श्रीधर ओझा द्वारा अपने पैतृक गांव बड़हिया में जनकल्याण के लिए स्थापित सिद्ध मंगलापीठ मां बाला त्रिपुरसुन्दरी का मंदिर आज भी लोक आस्था का केन्द्र बना हुआ है. 

लखीसराय: नवरात्रि में जगदम्बा मंदिर में उमड़ती है भारी भीड़, वैष्णो देवी मंदिर के संस्थापक ने की स्थापना
जगदंबा मंदिर में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़.

लखीसराय: नवरात्रि के सातवें दिन जगदम्बा मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़. जिले के बड़हिया नगर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बाला त्रिपुरसुन्दरी जगदम्बा मंदिर में पूजा अर्चना करने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. जय मां जगदम्बे और जय माता दी के जयघोष के बीच हजारों की संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किये और मन्नतें मांगी.

जम्मू स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर के संस्थापक भक्त शिरोमणि श्रीधर ओझा द्वारा अपने पैतृक गांव बड़हिया में जनकल्याण के लिए स्थापित सिद्ध मंगलापीठ मां बाला त्रिपुरसुन्दरी का मंदिर आज भी लोक आस्था का केन्द्र बना हुआ है. यूं तो प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माता के मंदिर में अपना मत्था टेककर मन की मुरादें प्राप्त करते हैं. मगर नवरात्र में मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ होती है.

वैष्णो देवी मंदिर के संस्थापक ने की थी मंदिर की स्थापना
बड़हिया ग्राम की स्थापना हजारों वर्ष पहले पालवंश के काल में हुआ था. पंडित ओझा बड़हिया के ही मूल निवासी थे. हिमालय की कंदरा में तपस्या करने के क्रम में मां वैष्णो देवी की स्थापना के बाद उन्होंने बड़हिया में मां जगदम्बा को स्थापित किया था. जनश्रुति के अनुसार, मां वैष्णो देवी की स्थापना के पश्चात भक्त श्रीधर ओझा अपने पैतृक गांव बड़हिया आये.

बड़हिया लौटने के बाद पंडित ओझा ने लोक कल्याण हेतु गंगातट पर मां आदिशक्ति की अराधना शुरू की. एक दिन मां आदिशक्ति ने स्वप्न में भक्त शिरोमणि को यह आदेश दिया कि ब्रह्म मुहुर्त में गंगा नदी की धारा में मिट्टी के खप्पर में आदिशक्ति मां अपने बाला रूप में ज्योति के रूप में बहते हुए आएंगी. उन्हें जलधार से निकालकर गंगा की मिट्टी का पिंड बनाकर मां को स्थापित कर दिया जाये. भक्त शिरोमणि श्रीधर ओझा ने ब्रहममुहुर्त में मिट्टी के खप्पर में बह रहे ज्योति को निकालकर गंगा की मिट्टी से गंगातट पर अवस्थित बड़हिया के टीले पर सिद्ध मंगलापीठ मां बाला त्रिपुरसुन्दरी, मां महाकाली, मां महालक्ष्मी और मां महासरस्वती कुल चार पिंडों की स्थापना की.

भक्तों की ऐसी मान्यता है कि जब भी जनकल्याण की आवश्यकता होती है, मां अपना आर्शीवाद देने में कोताही नहीं करती है. प्रदेश और देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़हिया आकर मां से अपनी मनोकामना पूरी करते हैं.

150 फीट उंचा है जगदम्बा मंदिर
1992 में सफेद संगमरमर पत्थर से लगभग 150 फीट से अधिक उंचा देवी मंदिर का निर्माण कराया गया है. करोड़ों की लागत से बने मंदिर पर सोने का कलश स्थापित है. भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए उनकी सुविधा के लिए करोड़ों की लागत से भव्य धर्मशाला श्रीधर सेवाश्रम का निर्माण कराया गया है.

पूरी होती है भक्तों की मुरादें पूरी
मां की महिमा अद्धितीय है. कहा जाता है कि जिसने भी सच्चे मन से मां के दरबार में आकर उनकी अराधना की, मां ने उसे कभी निराश नहीं किया. सबों को मनचाहा फल जरूर देती है. यही कारण है कि दिन प्रतिदिन मां के दरबार में भक्तों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है.