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झारखंड: जेडीयू में उठने लगे विद्रोही स्वर, सालखान मुर्मू के खिलाफ उठ रहे आवाज

 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले दिनों झारखंड आए थे और पार्टी में शामिल होने वाले ओड़िसा के पूर्व सांसद सालखन मुर्मू को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर संगठन मजबूती का जिम्मा दिए थे.

झारखंड: जेडीयू में उठने लगे विद्रोही स्वर, सालखान मुर्मू के खिलाफ उठ रहे आवाज
पिछले दिनों नीतीश कुमार भी संगठन की मजबूती के लिए झारखंड आए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रांची: झारखंड में जनता दल युनाइटेड संगठन को सर मुड़ाते ही ओले पड़ने लगे हैं. पार्टी के भीतर ही प्रदेश अध्यक्ष सालखान मुर्मू के खिलाफ विद्रोही स्वर उठने लगे हैं और इनका पुतला जलाया जाने लगा है.

झारखंड में जनता दल यूनाइटेड संगठन को मजबूत करने के लिए पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले दिनों झारखंड आए थे और पार्टी में शामिल होने वाले ओड़िसा के पूर्व सांसद सालखन मुर्मू को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर संगठन मजबूती का जिम्मा दिए थे. नीतीश कुमार के आह्वाहन पर पुराने और सुस्त पड़े पार्टी कार्यकर्ता फिर से नए जोश में आकर बूथ से लेकर पंचायत,प्रखंड और जिला स्तर तक सक्रिय हो गया था लेकिन ये ज्यादा दिन नहीं चला.

घाटशिला में जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष सालखन मुर्मू के खिलाफ जिला कमिटी का स्वर पूरी तरह से विद्रोही हो गया है. प्रदेश अध्यक्ष पर तानाशाही व्यवहार और बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाया गया गया है जिससे जिले के तमाम जेडीयू कार्यकर्ता नाराज हैं और सालखान हटाओ जेडीयू बचाओ का नारा बुलंद कर रहे हैं.

जेडीयू जिला अध्यक्ष आनंद हेम्ब्रम की अगुवाई में जिले के सभी प्रखंडों के प्रखंड अध्यक्ष और सभी स्तर के कमिटी संगठन के अधिकारी और कार्यकर्ता सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. इस मौके पर जेडीयू जिला कमिटी के कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष आनंद हेम्ब्रम के नेतृत्व में प्रदेश अध्यक्ष सालखन मुर्मू का पुतला पोटका चौक पर जलाया और रोष प्रकट किया.

इस मौके पर जेडीयू जिलाध्यक्ष आनंद हेम्ब्रम का कहना है कि हमलोग जेडीयू में पिछले आठ सालों से संगठन मजबूत करने में लगे हुए हैं लेकिन दुसरे दलों से आकार प्रदेश अध्यक्ष बने सालखन मुर्मू का व्यवहार कार्यकर्ताओं के साथ अच्छा नहीं है.

उन्गोम हमलोग झारखंड में माननीय नीतीश कुमार के उदेश्य को पूरा करने में लगे हैं और झारखंड सरकार की विफलताओं को उजागर कर रहे हैं. झारखंड की जनता के हक और अधिकार के लिए लड़ रहे हैं.

जिसका प्रदेश अध्यक्ष विरोध कर रहे हैं ,प्रदेश अध्यक्ष खुद का अपना कोई जनाधार नहीं है ये अपने समाज से स्वयं बहिष्कृत हैं ये संगठन को क्या मजबूत बनाएंगे.