मुंगेर: दिव्यांग विनीता दूसरों को दे रही बेबसी से लड़ने की प्रेरणा, कर रही कुछ ऐसा...

विनीता ने कहा कि, कोई भी दिव्यांगजन अपनी दिव्यांगता को अभिशाप नहीं मानें तथा उसे चुनौती समझकर एक अवसर के रूप में तब्दील करें.

मुंगेर: दिव्यांग विनीता दूसरों को दे रही बेबसी से लड़ने की प्रेरणा, कर रही कुछ ऐसा...
विनीता आज कई दिव्यांगों के लिए मिसाल से कम नहीं हैं.

प्रशांत/मुंगेर: बिहार के मुंगेर जिले के संग्रामपुर प्रखंड स्थित सुल्तानगंज-देवघर मार्ग पर एक गांव है मौजमपुर. इस गांव की रहने वाली विनीता देवी (30 साल) दोनों पैर से दिव्यांग हैं. विनीता आज कई दिव्यांगों के लिए मिसाल से कम नहीं हैं. जानकारी के मुताबिक, विनीता जन्मजात दोनों पैरों से दिव्यांग हैं. लेकिन विभीषका ऐसी कि, वह न सिर्फ स्वाबलंबी बन अपने परिवार का भरण पोषण कर रही कर रही है, बल्कि ऐसे दिव्यांग जनों के लिए मिसाल बन चुकी हैं, जो अपने आप को बेबस एवं लाचार समझते हैं.

दरअसल, विनीता ने अपनी लाचारी को अपनी कामयाबी में बदल डाला है. वह खुद तो दोनों पैर से दिव्यांग हैं ही, बल्कि उसका पति बबलू मंडल भी दोनों पैरों से दिव्यांग है. विनीता की शादी 20 जून 2010 को बबलू मंडल के साथ हुई थी. इस दिव्यांग दंपति को लगभग 1 वर्ष की एक पुत्री भी है. बबलू मंडल उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर का रहने वाला है. वह भी अपने पत्नी को उसके रोजगार में सहयोग करता है.

विनीता देवी मौजमपुर में अपनी विधवा मां के साथ रहती हैं. वह बताती है कि, लगभग 5 साल पहले वह जीविका से जुड़ी. 17 नवंबर 2019 को उसने अपने घर के पास ही एक किराने की दुकान शुरू की. जिसके लिए उसे जीविका के माध्यम से सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत रोजगार आरंभ करने के लिए 20 हजार रुपए स्वीकृत किया गया.

इसके पहले किस्त के रूप में उसे 14 हजार रुपए का किराना सामान उपलब्ध कराया गया. वह इस दुकान से प्रतिदिन लगभग 1 हजार रुपए का सामान बेच लेती है. हालांकि, लॉकडाउन (Lockdown) के कारण इन दिनों बिक्री कुछ कम हो रही है. विनीता ने कहा कि, कोई भी दिव्यांगजन अपनी दिव्यांगता को अभिशाप नहीं मानें तथा, उसे चुनौती समझकर एक अवसर के रूप में तब्दील करें. इससे वह सफलता प्राप्त कर सकते हैं.

वहीं, सरकार से विनीता कहना चाहती हैं कि, सरकारी स्तर पर दिव्यांगों के स्वरोजगार के लिए ऋण आदि उपलब्ध कराया जाएं. ताकि दिव्यांग लोग भी अपने आप को आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम बना सकें.

बता दें कि, जीविका के सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत विनीता कुमारी का उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए चयन किया गया है. पहले यह पता लगाया गया कि, वह कौन सा रोजगार आरंभ कर सकती है, जिसमें वह सफल हो सकती हैं. इसके बाद किराना दुकान संचालन के लिए उन्हें 3 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया, तथा 20 हजार रुपए की सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया.

इसके पहले चरण में उन्हें 14 हजार रुपए का सामान खरीद कर उपलब्ध कराया गया. वहीं, उन्हें आर्थिक सहयोग देने के लिए प्रति महीने 1 हजार रुपए 7 महीने तक उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया. ताकि वह सही तरीके से अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें.