हेमंत सोरेन नहीं चाहते उनके परिवार का बच्चा पास करे JPSC, बताया यह बड़ा कारण

मैं हर दिन ईश्वर से प्रार्थना करता हूं. मेरे परिवार के कोई बच्चे जेपीएससी की परीक्षा पास न करें. इतना अविश्वास है जेपीएससी को लेकर कि लोग कहेंगे सीएम ने ही पास करवा दिया है.

हेमंत सोरेन नहीं चाहते उनके परिवार का बच्चा पास करे JPSC, बताया यह बड़ा कारण
सोरेन ने कहा- मैं नहीं चाहता कि मेरे परिवार का कोई बच्चा पास करे जेपीएससी, लोग कहेंगे सीएम ने करवा दिया, इतना अविश्वास हो गया है.

रांची: झारखंड विधानसभा में प्रदीप यादव ने 7वीं जेपीएससी की परीक्षा का मामला उठाया. साथ ही उन्होंने कहा कि जेपीएससी स्वतंत्र एजेंसी है. सरकार के निर्देश का पालन करना उसका काम है. सीएम हेमंत सोरेन ने सदन में जेपीएससी मामले पर कहा कि अलग राज्य के बाद झारखंड में जितनी जेपीएससी की परीक्षा हुई सभी विवादों में ही रही है. 

उन्होंने कहा कि जेपीएससी का विषय सिर्फ राज्य के नौवजवानों का विषय नहीं है. इस राज्य के कार्यप्रणाली के लिए भी चिंता का विषय है. अगर अच्छे विद्यार्थी चुन कर नहीं आते या आरक्षण का उचित लाभ नहीं मिल पाता है तो समाज के अंदर कई बातें नहीं उभरती हैं.

7वीं जेपीएससी की प्रक्रिया अभी चल रही है. जेपीएससी स्वतंत्र एजेंसी है और सरकार को उसके कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. आने वाले समय में जेपीएससी की परीक्षा बेहतर तरीके से हो, इसके लिए सरकार ने जो नियमावली बनाई है, उसका अवलोकन होना चाहिए.

इसके लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनी है साथ ही आने वाली जेपीएससी परीक्षा को स्थगित रखा जाएगा.

सीएम ने आगे छठी जेपीएससी परीक्षा के मामले में भी कहा कि जेपीएससी एक स्वतंत्र एजेंसी, संवैधानिक संस्था, ये बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए. उसके कार्यक्षेत्र में सरकार का दखल नहीं होना चाहिए. लेकिन समय-समय पर सरकार के हस्तक्षेप के कारण ही चीजें खराब हुई हैं. सरकार ने अपने दायरे को नहीं समझा. जेपीएससी ने भी अपने दायरे को नहीं समझा नतीजा विद्यार्थी झेलते रहे. 

मैं हर दिन ईश्वर से प्रार्थना करता हूं. मेरे परिवार के कोई बच्चे जेपीएससी की परीक्षा पास न करें. इतना अविश्वास है जेपीएससी को लेकर कि लोग कहेंगे सीएम ने ही पास करवा दिया है.

सदन में बीजेपी विधायक बिरंची नारायण ने अपने विधानसभा क्षेत्र में विस्थापन की समस्या को उठाया. सीएम ने सदन में कहा, विस्थापन की समस्या झारखंड में आज से नहीं आजादी के बाद से ही है. इन्होंने खुद माना कि इतने सालों से विस्थापित लोगों को न तो नौकरी मिली न ही कोई लाभ मिला. 

उन्होंने कहा कि नौकरी तो छोड़िए, मुआवजा तक नहीं मिला है. कई पीढ़ी तो मर भी गई होगी. 14 वर्षों में राज्य में सत्ता कैसे चली, किन लोगों ने चलाया इस पर नहीं जाना चाहता.

हमारी सरकार ने इसको संज्ञान में लिया है. बहुत जल्द विस्थापन आयोग बनाने जा रहे हैं. 5 साल में बड़े पैमाने पर इसका निदान होगा और जनप्रतिनिधियों को भो आयोग में स्थान दिया जाएगा.