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रांची: पानी की किल्लत ने त्यौहार का मजा किया किरकिरा, पैसे खर्च कर लोग बुझा रहे प्यास

पानी की अनियमित सप्लाई ने खासतौर पर भक्तों की परेशानी को बढ़ा दी है. अब मजबूरी में लोगों को अपनी जेब ढीली कर पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है.

रांची: पानी की किल्लत ने त्यौहार का मजा किया किरकिरा, पैसे खर्च कर लोग बुझा रहे प्यास
रांची में पूजा के दौरान पानी की किल्लत. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

रांची: झारखंड की राजधानी रांची ( Ranchi ) के लोग मां भगवती की आस्था में लीन नजर आए. मौसम का मिजाज भी यहां खुशगवार है. लेकिन इस पूजा के माहौल में राजधानी की बड़ी आबादी प्यासी है. शहर के लोगों की शिकायत है कि पूजा के दौरान वाटर सप्लाई की पूरी व्यवस्था ही चरमरा गई है. घरों में न तो पानी आने का कोई नियमित समय रह गया है और न ही पानी के साफ सफाई की व्यवस्था दिखाई दे रही है.

पानी की अनियमित सप्लाई ने खासतौर पर भक्तों की परेशानी को बढ़ा दी है. अब मजबूरी में लोगों को अपनी जेब ढीली कर पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है. वहीं, दूसरी ओर पानी की कमी से पूजा में भी दिक्कत आ रही है.

पानी पर पॉलिटिक्स भी शुरू
प्रदेश में कभी भी चुनावों का ऐलान हो सकता है. ऐसे में विरोधी दल जनता से जुड़ा कोई भी मुद्दा हाथ से गवाना नहीं चाहते हैं. अब जब राजधानी में ही वाटर सप्लाई नियमित नहीं है तो प्यासी राजधानी पर सियासत भी शुरू हो गई है. रांची में पानी की किल्लत पर कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन ने सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जिनके हाथ में व्यवस्था की जिम्मेदारी है, वे सिर्फ लोगों को बरगलाने का काम करते हैं.

सरकार कर रही सब ठीक होने का दावा
विपक्ष भले ही पानी की परेशानी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहा हो, लेकिन झारखंड सरकार में नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने ये तो माना है कि वाटर सप्लाई को लेकर कुछ जगहों से शिकायतें जरूर आई थीं, लेकिन सब दुरुस्त कर लिया गया है. साथ ही मंत्री ने राजधानी के लोगों को भरोसा देते हुए दावा किया कि पेयजल योजना बन जाने के बाद लोगों को पानी के लिए तरसना नहीं पड़ेगा.

रांची के लोगों को पानी की सप्लाई मुख्य रूप से कांके, हटिया और रुक्का डैम से होती है. रांची में पानी की किल्लत वैसे तो कोई नई बात नहीं है. गर्मियों में अक्सर लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार नवरात्रि के दौरान पानी की कमी ने लोगों के लिए त्यौहार का मजा सूखा-सूखा कर दिया है. अब देखना होगा कि गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने की बात कहने वाले सर्दी से पहले शुरू हुए इस जल संकट को कैसे और कब तक दूर कर पाते हैं. 

-- Ravinder Singh, News Desk