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जमशेदपुर : अंतिम चरण में दुर्गा पूजा की तैयारी, बन रहे हैं 400 से अधिक पंडाल

अफ्रीका के जनजातीय कबिलियाई इलाके का खंडहरनुमा इमारतों को घने झाड़ियों के बीच उतारा गया है.

जमशेदपुर : अंतिम चरण में दुर्गा पूजा की तैयारी, बन रहे हैं 400 से अधिक पंडाल
जमशेदपुर में कई तरीके से बनाए जा रहे हैं पूजा पंडाल.

जमशेदपुर : लौहनगरी जमशेदपुर में दुर्गा पूजा मनाने को लेकर तैयारियां अंतिम चरण पर है. पश्चिम बंगाल से सटा होने की वजह से यहां बड़े पैमाने पर दुर्गा पूजा का आयोजन होता रहा है. इस बार भी शहर में 400 से अधिक छोटे-बड़े पूजा पंडालों में शक्ति की आराध्य देवी मां दुर्गा की आराधना को लेकर पूजा कमेटियां और कारीगर जी जान से लगे हुए हैं. इन्हीं में से एक जयराम स्पोर्टिंग क्लब द्वारा आयोजित सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल है, जहां श्रद्धालुओं की सर्वाधिक भीड़ देवी के दर्शन और पूजा पंडाल की मनोरम छटा का आनंद उठाने के लिए आते हैं.

जयराम यूथ स्पोर्टिंग क्लब द्वारा बनाया जा रहा दुर्गा पूजा पंडाल प्रत्येक वर्ष विविधताओं और समसामयिक विषयों पर आधारित होता है. इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही पंडाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसे अंतिम रूप देने में बंगाल के दक्ष कारीगर रात-दिन एक किये हुए हैं. 

अफ्रीका के जनजातीय कबिलियाई इलाके का खंडहर नुमा इमारतों को घने जंगल झाड़ियों के बीच हू-ब-हु उतारा गया है. त्रिपुरा से लाए गए बांस का इस्तेमाल पंडाल निर्माण में किया जा रहा है. तीन माह पूर्व से यहां झाड़ियां उगाई गई है, जिससे कि समूचा क्षेत्र वनों से आच्छादित होने का एहसास दिलाए. तेरह हजार दो सौ वर्ग फिट के क्षेत्रफल में बन रहे आदिवासी-जनजातीय सभ्यता और संस्कृति पर आधारित इस पूजा पंडाल को पश्चिम बंगाल के मैचेदा से आये 80 कारीगरों द्वारा गत तीन महीनों से बनाया जा रहा है.

मुख्य पंडाल के ऊपरी भाग में तीन विशालकाय कबीलों के मुखौटे लगाए गए हैं. पंडाल के चारों ओर आदिवासी सभ्यता को परिलक्षित करता कॉटेज बनाए गए हैं. तीन माह पूर्व यहां झाड़ियां उगाई गई थी, जो अब बड़ी होकर घने जंगल मे परिवर्तित हो चुकी है. पंडाल के भीतरी भाग को बांस, बेंत और उससे बने फूल और कलाकृतियों को कारीगरों ने खूबसूरती से सजाया-संवारा है. 

कहा जाए तो झाड़ियों के बीच से होकर पंडाल के भीतर स्थापित मां दुर्गा के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को इस बार घने वनों व जनजातीय सभ्यता-संस्कृति की अलौकिक अहसास दिलायेगा. पंडाल के भीतरी भाग में इस बार यहां मां दुर्गा की दो प्रतिमाएं स्थापित होंगी, जिसमें छोटी प्रतिमा की पूजा होगी तो बड़ी प्रतिमा जो कि ट्राइबल सभ्यता के परिवेश में होगी, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र होगा. पूरे पंडाल में आदिवासी जनजातीय सभ्यता संस्कृति की अनूठी काया देखने को मिलेगी.

कोल्हान ही नहीं बल्कि सूबे की पूजा पंडालों में सबसे चर्चित आदित्यपुर के जयराम स्पोर्टिंग क्लब का दुर्गा पूजा पंडाल को देखने की इच्छा सभी श्रद्धालु का सपना होता है. पूजा के दौरान यहां पूरे नवरात्र में प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन को आते हैं. ऐसे में विधि-व्यवस्था और श्रद्धालुओं के सहयोग करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल के अलावा पूजा कमिटी के 200 से अधिक सदस्य दिन-रात तैनात रहते हैं. पूजा कमिटी के अध्यक्ष पूर्व विधायक अरविंद सिंह बताते है कि हर बार उनकी सोच होती है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मां के दर्शन के अलावा पंडाल की सजावट से उन्नत जनजीवन को लेकर एक संदेश जाए. इस बार वनों की रक्षा, जनजातीय समुदाय का रहन-सहन और पर्यावरण संरक्षण को जेहन में रखकर पूजा और पंडाल की तैयारियां की गई हैं, उम्मीद है कि श्रद्धालुओं को बहुत पसंद आएगा.