)
'पिछले 8 महीनों में राजपाल साहब ने लैंड क्रूजर को ट्रक बना दिया है. 6 महीने और केस चलेगा और वे यह साबित कर देंगे कि वह ट्रक नहीं था, ट्रेन थी. साल भर और केस चलने दीजिए और राजपाल साहब यह साबित कर देंगे ये आदमी सदाकांत मिश्रा नहीं बल्कि शाहरुख खान है और सबूतों के अभाव में आपको यह बात माननी ही पड़ेगी.' फिल्म जॉली एलएलबी में वकील त्यागी साहब का यह डॉयलॉग सुगौली रेल पुलिस पर बिल्कुल सटीक बैठ रहा है. जिस तरह फिल्म में एक्सीडेंट लैंड क्रूजर से होने के बाद उसे ट्रक से हुआ हादसा बताया गया था, ठीक उसी तरह सुगौली रेल पुलिस ने 5 मार्च को बरामद 24.390 किलो चरस को 58 दिन बाद कोर्ट में ईंट करार दे दिया. अब इस मामले की हाईलेवल जांच की जा रही है. 14 कर्मचारियों का लिखित बयान हो चुका है और जांच टीम अब बारी-बारी से क्रॉस एग्जामिनेशन कर रही है.
सुगौली रेल पुलिस इस मामले में बहुत भोली और मासूम बन रही है. वह ऐसा दिखाने की कोशिश कर रही है कि बरामद तो उसने ईंट ही किया था, लेकिन वह इसे चरस करार देने की भूल कर बैठी. अब कोई यह भी बताए कि पिट्ठू बैग में ईंट लेकर कौन चलता है और उस समय रेल पुलिस ने क्या देखकर इसे चरस करार दिया था और अपनी पीठ थपथपाने के लिए प्रेस कांफ्रेंस तक कर डाली थी. रेल डीएसपी हो या सुगौली के सीओ, सभी का कहना है कि पैकेट के अंदर क्या था, वे नहीं जानते. जब्ती के वक्त का वीडियो दिखाकर उसमें ईंट होने के भी दावे किए जा रहे हैं.
अब आप पैकेट को बारीकी से देखें. ऐसा लग रहा है कि पाँच-पाँच पैकेट यानी 10 पैकेट का एक बड़ा पैकेट बना दिख रहा है. वेइंग मशीन पर वजन भी करीब 6 किलो दिख रहा है. अब रेल पुलिस की दलील भी एक बार के लिए मान लेते हैं कि उसने ईंट ही बरामद की थी तो एक ईंट का वजन कम से कम 3 किलो होता है. 5 ईंट के हिसाब से यह 15 किलो से अधिक होना चाहिए था, जबकि फोटो में स्पष्ट दिख रहा है कि पैकेट का वजन करीब 6 किलो है. चरस का पैकेट होने पर इसका वजन 6 किलो के आसपास होना लाजिमी है.
जब्ती सूची से लेकर एफआईआर और फिर प्रेस वार्ता में भी रेल डीएसपी उमेश कुमार ने इसे चरस बताया था. जो लोग प्रेस कांफ्रेंस में कामयाबी के झंडे बुलंद कर रहे थे, वे अब चरस को ईंट साबित करने में जीजान से जुटे हुए हैं. अरे! घर का माल समझ रखा है क्या? क्या ऐसे होते हैं सरकारी काम? जो बरामद किए हो, उसे दिखाओ? यह सब देखकर जाहिर है कि कुछ तो है, जिसकी पर्दादारी है. दिलचस्प बात यह है कि बरामद किया गया चरस न तो मालखाना में रखा गया और ना ही जब्ती के वक्त सैंपल लिया गया.
क्या कहता है एनडीपीएस एक्ट?
अगर ड्रग्स की जब्ती हुई है तो उस समय तीन सैम्पल लेने जरूरी हैं. एक सैंपल जांच अधिकारी के लिए, दूसरा कोर्ट के लिए और तीसरा फारेंसिक जाँच के लिए भेजना जरूरी होता है. सुगौली रेल पुलिस को तो एनडीपीएस एक्ट का ज्ञान होता तो क्या बरामद किया गया चरस ईंट में 'तब्दील' होता? सुगौली रेल पुलिस ने ना तो जब्त माल का सैम्पल लिया और ना ही उसे मालखाना में रखा था. बता दें कि सुगौली रेल पुलिस ने 1 मई को जब्त मादक पदार्थ (चरस) को कोर्ट में पेश किया. कोर्ट में जब बंडल खोला गया तो उसमें चरस नहीं, ईंट निकली.
कोर्ट ने रेल एसपी को दी सूचना
कोर्ट ने इसकी सूचना रेल एसपी को दी और रेल एसपी ने समस्तीपुर रेल डीएसपी को जांच सौंप दी. जांच कछुआ गति से चलने लगी. खबर जब Zee Bihar के हाथ लगी और इसको प्रमुखता से फ्लैश किया गया तो रेल पुलिस की नींद टूटी. उसी दिन एडीजी रेल ने मामले की हाईलेवल जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बना दी. जांच टीम में समस्तीपुर के आरपीएफ कमांडेंट शेख जन अहमद जानी, रेल एसपी वीना कुमारी और मोतिहारी के एडीएम शैलेन्द्र भारती शामिल हैं.
पिछले सप्ताह शुक्रवार को टीम सुगौली स्टेशन पहुंची और जब्ती टीम में शामिल सभी पदाधिकारियों व बल सदस्यों से लिखित बयान लिया. घटनास्थल, मालखाना आदि का निरीक्षण करने के बाद जब्ती टीम में शामिल आरपीएफ व जीआरपी के सदस्यों से क्रॉस एग्जामिनेशन शुरू हुई. हाईलेवल टीम ने 16 से 18 मई तक तीन दिनों में सुगौली सीओ कुन्दन कुमार, रेल थाना सुगौली के थानाध्यक्ष विजय कुमार झा, दरोगा सोती कुमार, पीएसआई अवध बिहारी पाठक, सिपाही मो.जाकिर, संजीव कुमार, समीर आलम व मो.राजिउर रहमान तथा आरपीएफ आउट पोस्ट सुगौली के प्रभारी राजीव रत्न प्रताप सिंह, एएसआई प्रभु हाजरा, हवलदार रितेश कुमार वर्मा व कांस्टेबल गोविन्द महतो समेत 14 लोगों से लिखित बयान लिया.
तीन लावारिस पिट्ठू बैग से मिली थी 24.390 kg चरस
रविवार रात 8 बजे तक क्रॉस एग्जामिनेशन चली. इसके बाद अपरिहार्य कारणों से इसे दो-तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया. बताया जा रहा है कि जब्ती टीम में शामिल जिन कर्मचारियों का अभी क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं हो पाया है, वो अब दो-तीन दिनों बाद होगी. क्रॉस-एग्जामिनेशन का मुख्य उद्देश्य गवाह की गवाही, जानकारी व विश्वसनीयता की जांच करना है. गौरतलब है कि 5 मार्च को सुगौली स्टेशन के पश्चिमी छोर से तीन लावारिस पिट्ठू बैग से 24.390 किलो चरस बरामद हुई थी. रेल पुलिस के डीएसपी ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी पत्रकारों को दी थी, मगर मादक पदार्थ जब्ती के 58 दिन बाद 1 मई को जब्त माल को रेल पुलिस ने कोर्ट में प्रस्तुत किया तो सीलबंद बंडल में चरस की जगह ईंट पाई गई.
रिपोर्ट: पंकज कुमार
बिहार की नवीनतम अपडेट्स के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहाँ पढ़ें Bihar News in Hindi और पाएं Bihar latest News in Hindi हर पल की जानकारी । बिहार की हर ख़बर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार। जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!