बिदेशिया के पातीः 'चौपट मास्टर के बहाल कर सरकार शिक्षा के खतम कर दिहलस'

बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर भोजपुरी में व्यंग्य.

बिदेशिया के पातीः 'चौपट मास्टर के बहाल कर सरकार शिक्षा के खतम कर दिहलस'

आदरनीये भाई, बहिन, माई, काका, दादा लोग
सब केहू के परनाम

इंटर के रिजल्ट आ गईल बा. रिजल्ट के पोस्टमार्टम भी हो रहल बा. ओही दु-चार गो रटल-रटावल लाईन कहल जात बा कि बिहार में त शिक्षा रसातल में चल गईल बा. केतना खराब रिजल्ट आईल बा. मास्टर सब बकलोल बाड़न स त रिजल्ट त अईसने होखी. बिहार में हर साल इंटर के रिजल्ट अईला के बाद शिक्षा पर एही तरह से बात होखेला. लोग कहेला कि चौपट मास्टर के बहाल कर के सरकार शिक्षा के चौपट कर दिहलस. लेकिन मास्टर के हाल केहू ना जानल चाहेला कि एगो मास्टर, जे कबो समाज में प्रतिष्ठा पावत रहे, लोग मान-सम्मान देत रहे ओकर आज का हालत हो गईल बा. उ कवना स्थिति में काम कर रहल बा. केहू ई ना जानल चाहेला कि जब प्राईमरी-मिडिल स्कूल के मास्टर साहब लोग अंतहीन पीड़ा से गुजर के एक-एक दिन निकाल रहल बा, पढ़ाई छोड़ के सब काम कर रहल बा तो ओकर मार्गदर्शन में रहेवाला लईका हाईस्कूल में जा के कईसे तीर मार लिही. बढ़ियां रिजल्ट ला दिही, ई तो सोचेवाली बात बा.

हम मास्टर होखे के नाते आपन रूटिन बतावत रहल बानी. गांव में जब पढ़ावे खातिर ईस्कूल जाईना तो सबसे पहिलका सामना गांव के विद्यालय शिक्षा समीति से होला. विद्यालय शिक्षा समीति में गांव के सब कोटी से दु-दु महिला लोग के राखल गईल बा. कुल मिला के 17 सदस्य. ओकरे में से एगो सचिव अउरी स्कूल जवन एरिया में आवेला ओह वार्ड के पार्षद ओकर अध्यक्ष. अध्यक्षजी, सचिवजी, मेंबरजी लोग साथे समन्यव बईठावे में पढ़ावे जेतना उर्जा लाग जाला. ई मेंबर, सेक्रेट्री भा अध्यक्ष लोग के पढ़ाई-लिखाई से कवनो दूर-दूर तक वास्ता होखे, ई जरूरी नईखे बाकि उ कबो एगो मास्टर के हड़का सकेलन, ई तय बा. ओकरा बाद ईस्कूल में घूसते बीईओ साहेब के रोज कवनो ना कवनो चिट्ठी पड़ल रहेला कि हई कागजी काम बा, एकरा के जल्दी से निपटा के देबे के बा. बीईओ साहब के चिट्ठी पढत रहब, तब ले शौचालय वगैरह बनवावे, निगरानी करे खातिर बीडीओ साहेब के चिट्ठी अलगा से आईल रहेला.

अब एगो कवनो मास्टर एह कुल काम में लागल रहल, तब ले कवनो दोसर मास्टर साथी मध्यान्ह भोजन के आंकड़ा जुटावे में समय अउरी दिमाग लगवले रहिहें, ओकर इंतजाम-जुगाड़ में लगवले रहिहें काहे कि ओकर रिपोर्ट भी जल्दी से भेज देबे के होखेला. ई दु मास्टर एह काम में रहिहें, तब ले तीसरका मास्टर साहब के तो परमानेंट डयूटी बीएलओ के रूप में लागल रहेला. बीएलओ मने भईल बूथ लेवल ऑफिसर. 

मने उनका जिम्मे सालो भर काम होला कि उ मतदाता पहचान पत्र के सुधरवावस, घटवावस-जोड़वावस. ई कुल काम चलत रही, ओकरे बीच में बाल पंजी संधारण के भी काम आवत रहेला. ई काम के हिसाब ई बा कि अपना इलाका के कुल लईकन के प्रोफाईल तइयार करे के बा. उ लईका हमार इस्कूल में पढ़त बा चाहे ना, ओकरा से मतलब नईखे, गांव में सबके दरवाजा-दरवाजा जाई के सबके बाल-बच्चा के बारे में 45 गो तरह-तरह के जानकारी जुटा के ओकरा के रजिस्टर में भरे के बा. ई काम जवन मास्टर साहब के मिल गईल, ओह मास्टर साहब के ठेहुना तक ले आंसू निकलत रहेला बाकि ई काम करे के बा. ईहे बीच में राशन से लेके किरासन तक के कूपन बांटे के रहेला, लईकन के आधार बनवावे के रहेला, लईकन के बैंक के खाता खोलवावे के रहेला, आधार के बैंक खाता से सीडिंग करवावे के रहेला. छात्रवृत्ति पोषाक के राशि देबे के रहेला.

ई कुल काम खाली करे के ना रहेला, एह कुल के रिपोर्ट भी कागज पर तईयार कर के भेजे के रहेला. ई कुल तो परमानेंट काम बा. शराबबंदी, दहेजबंदी जईसन अभियान के लेके मानव श्रृंखला भी बनवावे के फरमान बीच-बीच में आवत रहेला. जनगणना के समय अईला पर आदमी से लेके जनावर तक के गिनती करे के काम भी करे के रहेला. बाढ़ के इलाका बा तो बाढ़ राहत में भी ड्यूटी लागेला. 

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ई कुल एतना काम करते हुए साहेब लोग से रिश्ता बना के राखल भी एगो जरूरी काम होला काहे कि साहेब लोग जब इस्कूल में मुआयना करे पहुंचेला तो छापेमारी के अंदाज में पहुंची जईसे कवनो अपराधी के पकड़े के होखे. इस्कूल पहुंच के गांव के लोग के सामने हड़काई. ब्लॉक लेबल पर बीईओ साहेब, बीडीओ साहेब मैनेज हो गईले तो फेरू जिला में डीईओ साहेब अउरी उनका नीचे पांच गो अलग-अलग तरीका के डीपीओ साहेब लोग होखेला. गांव के शिक्षा समिति से ले के जिला के साहेब तक के बीच में कुछ अउरी बिचहवा लोग भी होला, जेकरा के मैनेज करे पड़ेला. बीचवा में बिहार में आजीविका दीदी लोग के कोप-प्रकोप भी झेले पड़ल रहे. 

सरकार आजीविका दीदी लोग के कह देले रहे कि मास्टर लोग के तु लोग भी निगरानी करअ लोग. आजीविका दीदी लोग के जईसहीं ई मोका मिलल, बुझीं कि लोग धुरपट छोड़ा देले रहे. जबे मन तबे इस्कूल में अपने खुदे ना तो उनकर मरद आ के हड़कावे लगलें कि ए मास्टर बोखार छोड़ा देब,अधिकार मिल गईल बा. उ तो भला होखे कि हाईकोर्ट के अभी आजीविका दीदी के ओह कोप से मुक्ति मिलल बा. बाकि उ मुक्ति तो ओईसनके भइल कि कनगोजर के सब टांग तोड़ला के बाद एगो टांग के आपरेशन कर के जोड़ देबल गईल होखे कि अउरी ओकरा से सरसरा के सरके के उमेद करल जात होखे. ई तो अलगा किसिम के बात बा. अब दोसरका किसिम के परेशानी अलगा बा. अब एह कुल से समय बांचला के बाद मास्टर लोग के पढ़ावे के बा लईकन के तो किताबे ना होखेला. किताब एकदम जब 11 महीना शैक्षणिक सत्र के खतम हो जाई तब छप के आई. 

एक महीना पहिले किताब दे के कहल जाई मास्टर साहब लोग कि कुल लईका के आर्यभटट लेखा बिद्वान बनावे के बा. एह किताब पर केहू सवाल ना पूछेला. बात-बात पर मास्टर के हड़कावेवाला अभिभाव, विद्यालय शिक्षा समिति के लोग सवाल ना पूछेला. अउरी बुझीं कि जे तनीका तीन-पांच करे में तेज मास्टर बा ओकरा के साहेब लोग मिल के आवासीय बिद्यालय में खींच लेबल चाहेलें काहे कि ओहिजा अलगा गणित बईठावे के रहेला. सरकार कस्तूरबा विद्यालय से ले के दोसर विद्यालय खोल देले बिया. हर जिला में कल्याण विभाग के भी आवासीय विद्यालय होखेला. ओकरा में कमाई के खेला खूब होखेला. साहेब लोग मास्टर लोग के मिला के माल चाभेला. कवना लईकी ओहिजा रहेली सन ना चाहे रहबो करेली सन तो नाम के. ओह लोग के नाम पर मोट पईसा आवेला. अब तेज मास्टर के ओहिजा सेट कर के माल में बंटवारा करेलन. 

एह तरीका से गांव के विद्यालय शिक्षा समिति से ले के, बीईओ साहेब, डीईओ साहेब के आफिस तक बाबू से लेके साहेब तक मैनेज करे, उ लोग के पईसा पहुंचावे में दिन रात फिफिहवा लेखा लागल रहेवाला मास्टर से उमेद करल जाला कि मास्टर लोग आर्यभटट जईसन बिद्वान काहे पैदा नईखन सन करत इस्कूल से. एह कुल के बाद लोग गरियावेला कि कुल ठेका पर बहाल मास्टर शिक्षा के चौपट करत बाड़न सन. हम ई नईखीं कहत कि मास्टर लोग के दोष में नईखे. बा. ढेरे होखी, लेकिन का रउआ मालूम बा कि बिहार में ठेका से लेकर परमानेंट शिक्षकन के संख्या मिला देबल जाव तबो ई संख्या चार लाख से उपर ना पहुंचेला अउरी बिहार में इस्कूलन के संख्या के अनुसार कम से कम सात लाख शिक्षक चाहीं. ई कुल जाने के चाहीं रउआ लोग के. ई कुल बात जानब जा तब समझ में आयी कि प्राथमिक अउरी मिडिल स्कूल में ही शिक्षा के लय लड़खड़ाईल बा तो हाईस्कूल का दु साल में बिद्वान बना दिही कि इंटर के रिजल्ट बेस्टम बेस्ट करवावे लागी. 

राउरे आपन
मास्साब, उर्फ मस्टरवा