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जलजमाव: इमजरेंसी कॉल सेंटर का दावा फेल, कमिश्नर ने जारी किया था हेल्पलाइन नंबर

बारिश का पानी अब नाले में तब्दील हो चुका है. नाले का पानी लोगों की जान पर बन आया है. इसी परेशानी से निजात दिलाने के लिए पटना के तत्कालीन कमिश्नर आनंद किशोर की ओर से 11 अक्टूबर को हेल्पलाईन नंबर जारी किया था. 

जलजमाव: इमजरेंसी कॉल सेंटर का दावा फेल, कमिश्नर ने जारी किया था हेल्पलाइन नंबर
जलजमाव से परेशन लोगों के लिए जारी किया गया था हेल्पलाइन नंबर. (फाइल फोटो)

पटना: जलजमाव (Water Logging) को लेकर पटना में त्राहीमाम मचा हुआ है. पटना के कई इलाकों में अभी भी जललमाव के हालात हैं. जनता मदद मांग रही है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा. जी मीडिया ने जब नगर निगम की व्यवस्था की पड़ताल की तो कई चौकानेवाले खुलासे हुए. जलजमाव की समस्या से निजात के लिए ही 11 अक्टूबर को पटना के तत्कालीन कमिश्नर आनंद किशोर (Anand Kishore) की ओर से शिकायत और समाधान को लेकर हेल्पलाईन नंबर जारी किया गया था. इसमें 30 टेलीफोन सेट के साथ दो शिफ्ट में तीस-तीस लोगों को रखने का निर्देश दिया गया था. पड़ताल के दौरान पटना कमिश्नर का आदेश हवा-हवाई निकली.

जब पटना नगर निगम के अपर नगर आयुक्त से हमारी टीम मिलने पहुंची तो पहले उन्होंने अपने कर्मचारी से ये कहलवा दिया कि वो दफ्तर में नहीं हैं. लेकिन जब वो दफ्तर से निकले तो हमारी टीम के सवाल सुनकर भागते नजर आए.

पटना के कई इलाके बीते 20 दिनों से जलजमाव की चपेट में है. बारिश का पानी अब नाले में तब्दील हो चुका है. नाले का पानी लोगों की जान पर बन आया है. इसी परेशानी से निजात दिलाने के लिए पटना के तत्कालीन कमिश्नर आनंद किशोर की ओर से 11 अक्टूबर को हेल्पलाईन नंबर जारी किया था. पटना नगर निगम की ओर से पहले से ही लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए कॉम्बेट सेल नंबर चल रहा था. इसे काफी नहीं मानते हुए कमिश्नर ने 0612-2230009 नंबर जारी किया था. साथ ही निर्देश दिया गया कि नंबर पर तीस अलग-अलग फोन सेट के साथ दो शिफ्ट में कुल 60 कर्मचारी लगाए जाएंगे.

इसी हेल्पलाईन नंबर की हकीकत जानने जब हम पटना नगर निगम के दफ्तर पहुंचे तो चौकाने वाली जानकारी मिली. पटना नगर निगम के कॉम्बेट सेल में केवल दो कर्मचारी ही जलजमाव पर लोगों की शिकायत दर्ज कराने को लेकर लगाये गये थे. उनमें से एक महिला कर्मचारी ने बताया कि नगर निगम का सोशल अकाउंट देखती है. जबकि दूसरे कर्मचारी ने बताया कि इस सेल के अलावा भी एक सेल दूसरी जगह बनाया गया है, जहां पांच से छह स्टाफ बैठते हैं. फोन रिसिव करते हैं. यानी पटना के कमिश्नर की बात हवा हवाई साबित हुई.

इतना ही नहीं जब हमारी टीम ने जब स्टाफ से पूछा कि जो शिकायतें आती हैं, उसका समाधान होता है? स्टाफ ने बताया कि शिकायत भी दर्ज होती है और समस्या का समाधान भी होता है. लेकिन जब समस्या के समाधान से जुड़े पिछले रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई तो कर्मचारी के पास कोई जवाब नहीं था. कर्मचारी ने कहा कि विशेष जानकारी के लिए हमें अधिकारी के पास जाना चाहिए.

इमरजेंसी हेल्पलाईन नंबर की हकीकत जानने के लिए हमारी टीम अपर नगर आयुक्त डीपी तिवारी के पास पहुंची. वहां हमें जानकारी मिली कि डीपी तिवारी नगर आयुक्त के चेंबर में बैठे हैं. जब हमारी टीम नगर आयुक्त के चैंबर के पास पहुंची तो वहां के स्टाफ ने हमें बताया कि वहां नहीं हैं. हमें जानकारी दी गई कि नगर आयुक्त भी अपने चैंबर में नहीं हैं. इस जानकारी के बाद हमारी टीम ने नगर आयुक्त के पीए से मिलने की इच्छा जतायी और बाहर इंतजार किया. थोड़ी ही देर बाद डीपी तिवारी नगर आयुक्त के चैंबर से बाहर निकले और निगम से बाहर चले गये.

हमारी टीम पर नजर पड़ते ही अपर नगर आयुक्त की रफ्तार तेज हो गयी. वे नहीं रुके. हमारे सवाल पर इतना जरूर बोले कि इमरजेंसी नंबर पर जो शिकायतें दर्ज होती है उसका समाधान हो रहा है. इतना ही नहीं जब हमने उनसे पूछा कि पटना के कमिश्नर के साथ हुई बैठक में इमरजेंसी नंबर ऑपरेट करने के लिए 30-30 लोगों की टीम बनायी गई थी, उसका क्या हुआ? उन्होंने ऐसी किसी भी जानकारी से साफ इनकार कर दिया.

पटना के तत्कालीन कमिश्नर आनंद किशोर ने 11 अक्टूबर को जब बैठक कर जलजमाव से निजात के लिए विशेष उपाय के निर्देश दिये थे. उस बैठक में पटना नगर निगम के अधिकारी के साथ पटना के डीएम, एसएसपी समेत सभी पदाधिकारी मौजूद थे. ऐसे में जब पटना के कमिश्नर के ही दिशा निर्देश की धज्जियां उडेंगी, तो आम लोगों को इस भीषण त्रासदी से निजात कैसे मिलेगी?