महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन, आइंस्टाइन के सिद्धांत को दी थी चुनौती

वशिष्ट नारायण सिंह अपने परिवार के साथ पटना के कुल्हरिया कंपलेक्स में रहते थे. मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह अचानक उनकी तबियत खराब हो गई.

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन, आइंस्टाइन के सिद्धांत को दी थी चुनौती
वशिष्ठ नारायण सिंह अपने परिवार के साथ पटना के कुल्हरिया कंपलेक्स में रहते थे. (फाइल फोटो)

पटना: बिहार के विभूति और आइंस्टाइन के सिद्धांत को चुनौती देने वाले महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह की मृत्यु हो गई. वशिष्ठ नारायण सिंह अपने परिवार के साथ पटना के कुल्हरिया कंपलेक्स में रहते थे. मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह अचानक उनकी तबियत खराब हो गई.

जिसके बाद तत्काल परिजन पीएमसीएच लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. कुछ समय पहले भी जब वशिष्ठ नारायण सिंह बीमार पड़े थे तब पीएमसीएच में में कई बड़े नेता उनसे मिलने पहुंचे थे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वशिष्ठ नारायण की मौत पर शोक व्यक्त किया है. वहीं, गिरिराज सिंह ने वशिष्ठ नारायण के निधन पर शोक व्यक्त किया और ट्वीट करते हुए लिखा, 'हमने एक मणि खोया है ..प्रभु उनकी आत्मा को शांति दे.'

आरा के बसंतपुर के रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह बचपन से ही होनहार थे. छठी क्लास में उन्होंने नेतरहाट में दाखिला लिया और इसके बाद कभी पलट कर नहीं देखा. इसके बाद उन्होंने पटना साइंस कॉलेज में अपनी कॉलेज की पढ़ाई की. इसी दौरान कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन कैली की नजर उन पर पड़ी जिसके बाद वशिष्ठ नारायण 1965 में अमेरिका चले गए और वहीं से 1969 में उन्होंने पीएचडी की.

वशिष्ठ नारायण ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले में एसिसटेंड प्रोफेसर की नौकरी की. उन्‍हें नासा में भी काम करने का मौका मिला, यहां भी वशिष्ठ नारायण की काबिलयत ने लोगों को हैरान कर दिया. कहा जाता है कि अपोलो की लॉन्चिंग के वक्त अचानक कम्यूपटर्स से काम करना बंद कर दिया, तो वशिष्ठ नारायण ने कैलकुलेशन शुरू कर दिया, जिसे बाद में सही माना गया.

पिता के कहने पर वशिष्ठ नारायण सिंह विदेश छोड़कर देश लौट आए पिता के ही कहने पर शादी भी कर ली, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था 1973-74 में उनकी तबीयत बिगड़ी और पता चला की उन्हें सिज़ोफ्रेनिया है.