पंकज को है आजादी का इंतजार, जंजीर से बांधकर रखने को मजबूर हैं पिता

अपनी हैसियत से ज्यादा अपने अर्धविक्षिप्त बेटे की इलाज में डॉक्टरों और अस्पतालों में पैसे खर्च कर चुके हैं. 

पंकज को है आजादी का इंतजार, जंजीर से बांधकर रखने को मजबूर हैं पिता
पंकज की अर्धविक्षिप्ता के कारण बेटे को जंजीर से बांधने पर मजबूर है पिता.

राजीव रंजन, कटिहार : पूरा देश स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है. वहीं, पंकज अपनी जिंदगी की शुरुआती दिनों से ही जंजीर से बंधकर जीने को मजबूर है. कटिहार के मनिहारी अनुमंडल में पटेल टोला का रहने वाला पंकज अर्धविक्षिप्त किशोर है. उम्र करीबन 15 साल बतायी जा रही है. वह बचपन से ही अर्धविक्षिप्त है. पिता रिक्शा चलाकर किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं.

अपनी हैसियत से ज्यादा अपने अर्धविक्षिप्त बेटे की इलाज में डॉक्टरों और अस्पतालों में पैसे खर्च कर चुके हैं. इलाज के बावजूद पंकज अभी तक ठीक नहीं हो सका है. पंकज के परिजन अब चाहकर भी उसके स्वस्थ होने के लिए कुछ नहीं कर सकते. 

अगर कभी ममता में आकर जंजीर खोल दी जाती है तो पंकज सबको मारने के लिए और दांत काटने के लिए दौड़ पड़ता है. यही वजह है कि हर वक्त अपने अर्द्धविक्षिप्त बेटे को परिवार के लोग जंजीर से जकड़कर रखते हैं, ताकि कोई अनहोनी ना कर दे.

कटिहार का स्वास्थ्य महकमा पंकज की इलाज के लिए अपना हाथ खड़ा कर दिया है. उनका कहना है कि इस तरह के इलाज के लिए सदर अस्पताल में नो तो कोई डॉक्टर है और ना ही कोई व्यवस्था.

बचपन देखा नहीं. जवानी की दहलीज पर जंजीरों मे जकड़ा बेबस जिन्दगी. आजादी के जश्न के मौके पर इंतजार है किसी मसीहे की, जो पंकज की मदद कर दे. इससे पंकज भी आजाद जिंदगी जी सके.