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झारखंड: मानवता हुई शर्मसार, हाथों में नवजात का शव लिए 8 KM तक पैदल चला पिता

मनोज भुइयां की गर्भवती पत्नी रीमा देवी जैसे-तैसे मनिका अस्पताल पहुंची. पीड़ित महिला को अस्पताल ले जाने के लिए ममता वाहन भी नहीं मिला. 

झारखंड: मानवता हुई शर्मसार, हाथों में नवजात का शव लिए 8 KM तक पैदल चला पिता
शव ले जाने के लिए अस्पताल में नहीं है कोई सुविधा.

लातेहार : झारखंड के लातेहार जिला के मनिका से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है. एक पिता को अपने नवजात बेटे का शव हाथों में लेकर आठ किलोमीटीर तक पैदल चलकर जाना पड़ा. प्रशासन संवेदनहीन बना रहा. 

मामला मनिका प्रखंड के जंगुर पंचायत के औराटांड़ बांझीपोखर गांव का है. मनोज भुइयां की गर्भवती पत्नी रीमा देवी जैसे-तैसे मनिका अस्पताल पहुंची. पीड़ित महिला को अस्पताल ले जाने के लिए ममता वाहन भी नहीं मिला. अस्पताल में सुबह 9 बजे प्रसव हुआ. 

चिकित्सा प्रभारी डॉ. राजू कच्छप ने बताया कि प्रसव के दौरान मृत बच्चा पैदा हुआ. बच्चे की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया. रोते-बिलखते परिजन बच्चे को घर ले जाने के लिए छटपटाने लगे. अस्पताल से कोई सुविधा नहीं मिलने पर मनोज भुइंया अपने मृत नवजात को लेकर पैदल ही अपने गांव की ओर निकल पड़ा. मनोज ने बताया कि संबंधित सहिया को फोन किया, लेकिन वह नहीं आई.

वहीं, डॉ राजू कच्छप ने बताया कि सहिया एमआर टीकाकरण शिविर में थी. इसके कारण वह नहीं जा सकी. रीमा देवी अस्पताल में ही है. उक्त सम्बंध में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि मृत नवजात को ले जाने के लिए अस्पताल में कोई सुविधा नहीं है. उन्होंने कहा कि 108 नंबर पर डायल कर एम्बुलेंस की सुविधा ली जा सकती है, लेकिन शव को ले जाने के लिए एम्बुलेंस का उपयोग नहीं किया जाता है. 

मनिका अस्पताल में एक साल से ममता वाहन का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. दूर दराज गांव में रहने वाली प्रसव पीड़ित महिला को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मिली जानकारी के अनुसार ममता वाहन मालिकों को पैसा नहीं मिलने के कारण वाहन मालिक अस्पताल तक प्रसव पीड़िता को नहीं पहुंचा रहे हैं.