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देवघर: कृषि वैज्ञानिकों की मदद से बनाई जा रही बेलपत्र से खाद, किसानों के लिए होगा फायदेमंद

देवघर के कृषि विज्ञान केंद्र ने स्वच्छता अभियान को लेकर एक अनोखी पहल की है जिसमें ना सिर्फ बाबा मंदिर और सत्संग आश्रम को स्वच्छ रखा जाएगा. बल्कि खेती के लिए उन्नत किस्म के वर्मी कंपोस्ट भी तैयार होंगे. 

देवघर: कृषि वैज्ञानिकों की मदद से बनाई जा रही बेलपत्र से खाद, किसानों के लिए होगा फायदेमंद
पूसा एग्रीकल्चर के वैज्ञानिकों की टीम देवघर में सबसे ज्यादा उन्नत किस्म के वर्मी कंपोस्ट बनाने की तैयारी में है.

देवघर: झारखंड के देवघर में कृषि विज्ञान केंद्र ने स्वच्छता अभियान को लेकर एक अनोखी पहल की है जिसमें ना सिर्फ बाबा मंदिर और सत्संग आश्रम को स्वच्छ रखा जाएगा. बल्कि खेती के लिए उन्नत किस्म के वर्मी कंपोस्ट भी तैयार होंगे. पूसा एग्रीकल्चर के वैज्ञानिकों की टीम देवघर में सबसे ज्यादा उन्नत किस्म के वर्मी कंपोस्ट बनाने की तैयारी में है. अब बाबा मंदिर के फूल बेलपत्र और सत्संग आश्रम के झूठे खाना खाए गए पत्तल के जरिए वर्मी कंपोस्ट तैयार हो रहा है जिसका उपयोग किसान और स्थानीय न्यूनतम शुल्क देकर कर सकते हैं.

गौरतलब है कि 2018 में इसकी शुरुआत की गई थी और जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी लेकिन गुणवत्ता में कमी आने के कारण अब पूसा के वैज्ञानिकों का सहारा लिया गया. देवघर का बैद्यनाथ धाम मंदिर और सत्संग आश्रम जहां 1 साल में जोड़ दे तो एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु देवघर आते हैं एक तरफ जहां बाबा मंदिर में फूल और बेलपत्र चढ़ाया जाता है और बाद में इसे फेंक दिया जाता है.

 

वहीं, दूसरी तरफ सत्संग आश्रम में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे चलाए जाते हैं जिसे पेड़ के पत्ते से बना पत्थर पर खिलाया जाता है. ऐसे में फूल बेलपत्र और झूठे पत्थर से अब नए प्रयोग कर उच्च गुणवत्ता वाले वर्मी कंपोस्ट बनाने की तैयारी चल रही है. पिछले वर्ष पावर ग्रिड कारपोरेशन द्वारा देवघर में क्रशर मशीन लगाया गया था और यहां फूल बेलपत्र को क्रश कर कृषि विज्ञान केंद्र की मदद से वर्मी कंपोस्ट बनाया जा रहा था.

लेकिन जब टेस्टिंग हुई तो गुणवत्ता में कमी पाई गई जिसके बाद कृषि विज्ञान केंद्र ने पूसा एग्रीकल्चर कॉलेज के वैज्ञानिकों से संपर्क किया जिसके बाद अब कृषि विज्ञान केंद्र सुजानी में नई तकनीक से वर्मी कंपोस्ट बनाने की तैयारी शुरू की गई. जिसमें अब फूल बेलपत्र और पत्तल के साथ इसमें गोबर खाद और बर्मी को छोड़ा जाएगा और उसके बाद उच्च क्वालिटी के केंचुआ खाद बनाए जाएंगे.

वैज्ञानिकों की मानें तो इसकी गुणवत्ता सबसे ज्यादा होगी और इसमें लागत भी कम आ रही है कृषि विज्ञान केंद्र में इसके लिए कई सेठ और सुविधाएं विकसित की जा रही है. कुल मिलाकर अब देवघर में झारखंड का सबसे ऊंचा गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है जिस तरह से पूछा के कृषि वैज्ञानिकों का सहारा लेकर नई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है उम्मीद जताई जा सकती है कि देवघर जैविक खेती के मामले में काफी आगे निकलेगा.