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पटना: जलजमाव के कारण थाने की हुई दुर्गति, पानी से फाइलें और हथियार तक हुए बरबाद

थाने के पुलिसकर्मी अब अपने हथियारों से जंग छुडाने में जुटे हैं. राजेद्र नगर इलाके में स्थापित ये थाना 14 दिनों तक जलजमाव की चपेट में रहा. थाने के अदर पांच फुट तक पानी लगा था.

पटना: जलजमाव के कारण थाने की हुई दुर्गति, पानी से फाइलें और हथियार तक हुए बरबाद
कई जरुरी डाक्यूमेंट्स भी जलजमाव की भेंट चढ़ चुके हैं.

पटना: बिहार (Bihar) की राजधानी पटना के राजेंद्र नगर इलाके से पानी निकल चुका है लेकिन पानी के बाद हुई बरबादी के निशान अभी भी देखे जा रहे हैं. राजेंद्र नगर (Rajendra Nagar) के मोइनुल हक स्टेडियम में बना कदमकुआं थाना जलजमाव के कारण पूरी तरह बर्बादी की चपेट में आ चुका है. थाने में रखे एफआईआर की कॉपियां बर्बाद हो चुकी हैं. कई डाक्यूमेंट्स अब रद्दी बन चुके हैं.

यहां तक की जलजमाव से थाने में रखे हथियारों को भी नुकसान पुहंचा है. थाने के पुलिसकर्मी अब अपने हथियारों से जंग छुडाने में जुटे हैं. राजेंद्र नगर इलाके में स्थापित ये थाना 14 दिनों तक जलजमाव की चपेट में रहा. थाने के अदर पांच फुट तक पानी लगा था. जिसका नतीजा रहा कि थाने के जरुरी कागजात और एफआईआर की कॉपियां पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं. जो कागजात बचे हैं उन्हें पुलिसकर्मी धूप में सुखाकर दुरुस्त करने की कवायद में जुटे हैं.  

 

इतना ही नहीं थाने से पानी तो निकल चुका है लेकिन थाने के अंदर सरांध सी उठनेवाली बदबू ने पुलिसकर्मियों का जीना मुहाल कर रखा है. थाने में अपना 10 घंटा समय देने वाले काफी परेशान हैं. थाने में अनुसंधान का काम देख रहे दारोगा कामेश्वर सिंह और एएसआई पारसनाथ चौधरी कहते हैं कि पानी भले ही थाने से निकल चुका है लेकिन यहां काफी बदबू है. दम घुटता है लेकिन काम भी जरुरी है. इसलिए हम अपना काम कर रहे हैं.  

थाने के सेकेंड इन्चार्ज दारोगा राकेश कुमार की माने तो थाने के कई एफआईआर की कॉपी बर्बाद हो चुकी है. इसके अलावा कई जरुरी डाक्यूमेंट्स भी जलजमाव की भेंट चढ़ चुके हैं. थाने अंदर 5 फुट तक पानी लगने के कारण फर्निचर भी सड़ चुके हैं. लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी थाने के अंदर सडे हुए पानी की बदबू को लेकर है. जिसे ब्लीचिंग पाउडर के जरिये भी दूर नहीं किया जा सका. 

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थाने से ज्यादा खराब स्थिती थाने के बैरक की है. जहां जलजमाव ने पुलिसकर्मियों का जीवन नरक जैसा बना दिया है. बैरक में भी सड़े हुए पानी की दुर्गंध पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. उसके बावजूद भी कड़ी ड्यूटी करने के बाद पुलिसकर्मी ऐसी ही स्थिती में रहने को मजबूर हैं. जलजमाव के कारण पुलिसकर्मियों की सोनेवाली चौकियां बर्बाद हो चुकी हैं.

ईंट के सहारे पुलिसकर्मी अपनी चौकियां बचाए रखे हैं. कॉन्सटेबल सुरेश कुमार कहते हैं कि उन्हें ऐसे हालात में रहने में डर लग रहा है कि कहीं डेंगू न हो जाए. परिवारवाले भी फोन कर लगातार हालचाल पूछ रहे हैं. लेकिन क्या करें ड्यूटी है करनी ही पडेगी.  

वहीं, दूसरे बैरक में कांस्टेबल मनोज कुमार तेल के जरिये अपनी एसएलआए रॉयफल से जंग छुडाते नजर आए. मनोज कुमार ने कहा कि जलजमाव के कारण ज्यातर हथियार भींग चुका है. हमलोग अब हथियारों को दुरुस्त करने में जुटे हैं. जलजमाव के बीच हमलोग थाना छोडकर नहीं गये. हमारे लिए बोट के जरिये ही खाना आता था. वहीं कान्सटेबल बृज किशोर ने बताया कि जिस बैरक वो रह रहे हैं वहां की दीवारें टूट टूटकर गिरने लगी हैं. कभी भी कोई बडा हादसा हो सकता है. जलजमाव ने उनकी रुटीन लाईफ को बर्बाद कर रख दिया है.