हंगामेदार रहा झारखंड विधानसभा का पहले दिन का सत्र, CM हेमंत बोले...

इन सब के बीच बजट सत्र के पहले दिन सदन में हंगामे और शोर-शराबे के बीच संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने सदन में 1290 करोड़ का तृतीय अनुपूरक बजट उपस्थापित किया.

हंगामेदार रहा झारखंड विधानसभा का पहले दिन का सत्र, CM हेमंत बोले...
झारखंड के मुख्यमंत्री हैं हेमंत सोरेन. (फाइल फोटो)

रांची: झारखंड में 28 फरवरी से 28 मार्च तक चलने वाले कुल 18 कार्य दिवस वाले बजट सत्र का आगाज नए विधानसभा में हो चुका है. बजट सत्र की कार्यवाही के पहले दिन नए विधानसभा में सबसे पहले पंचम सत्र का उद्घाटन सीएम और विधानसभा अध्यक्ष ने किया. इस मौके पर कई विधायक और मंत्री भी मौजूद रहे, पर पहले दिन ही सदन में विपक्ष के आक्रामक तेवर से तस्वीर साफ हो चुकी है कि सदन हंगामेदार रहने वाला है.
         
वहीं, शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरु हुई तो सदन में नेता प्रतिपक्ष के बैठने का स्थान खाली रहा. जैसे ही विधानसभा अध्यक्ष सदन में दाखिल हुए बीजेपी विधायकों ने सदन में बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा देने की मांग की. विपक्षी विधायकों ने सदन में खूब हंगामा किया और मांग करते हुए बीजेपी के सभी विधायक बेल में पहुंच गए.

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सबको अपनी जगह बैठने को कहा, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी. वहीं, कुछ सत्ता पक्ष के विधायक भी बेल में पहुंच गए. इधर, विधानसभा उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते रहे और बीजेपी के विधायक बेल में ही बैठ कर नारेबाजी करते रहे. बाबूलाल मरांडी सदन में अगली पंक्ति में ही सुदेश महतो के साथ बैठे रहे, अध्यक्ष ने बीजेपी तरफ से सीपी सिंह को शोक प्रताव पढ़ने के लिए आमंत्रित किया.  

इन सब के बीच बजट सत्र के पहले दिन सदन में हंगामे और शोर-शराबे के बीच संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने सदन में 1290 करोड़ का तृतीय अनुपूरक बजट उपस्थापित किया. विपक्ष के हंगामे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन लोगों के पास बोलने के लिए कुछ नहीं है , पहले से ही मुद्दा बना कर आए हैं. विपक्ष में नेता प्रतिपक्ष कौन है ये बता पाना मुश्किल है. बीजेपी में आज राजनीतिक दिवालियापन है.

वहीं, संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि झारखंड बनने के बाद 10 वी अनुसूची का मामला एक बार नहीं अनेकों बार आया है और उसके निष्पादन में 4 से 5 साल लगे हैं. अभी अध्यक्ष ने संज्ञान लिया है प्रक्रिया के तहत ही अध्यक्ष निर्णय करेगें. 24 फरवरी को पत्र दिया है और आज ही निर्णय हो जाए ऐसा सम्भव नहीं है. विपक्ष हंगामा करने का मन बना कर ही आया है, उनके समय में भी जेवीएम के 6 विधायक गए थे. उसके निष्पादन में साढ़े 4 साल लग गए थे. एक दिन में फैसला हो जाए न कोर्ट में होता है न स्पीकर कोर्ट में.

इधर, पेयजल आपूर्ति मंत्री मिथलेश ठाकुर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आज सदन का पहला दिन है और शोर शराबा होता रहा. विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं है, इनके पास कोई अपना नेता नहीं है, वो मांग करके नेता बना रहे हैं. ऐसे व्यक्ति को अपना विधायक दल का नेता घोषित किया है जो इसी की लड़ाई 5 साल लड़ते रहे हैं.