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बिहारः बक्सर में 5 कुपोषित बच्चे मिलने से मचा हड़कंप, अस्पताल में चल रहा था इलाज

बक्सर जिले के नावानगर प्रखंड में पिछले कुछ दिनों के अंदर पांच कुपोषित बच्चे मिले हैं.

बिहारः बक्सर में 5 कुपोषित बच्चे मिलने से मचा हड़कंप, अस्पताल में चल रहा था इलाज
बक्सर में कुपोषित बच्चे मिले हैं.

बक्सरः नीतीश सरकार भले ही बिहार का ग्रोथ रेट देश मे अव्वल बताकर बहबाही लूटने में लगे हों, लेकिन बक्सर से जो खबर आई है वो इस दावे की पोल खोलती नजर आती है. दरअसल बक्सर जिले के नावानगर प्रखंड में पिछले कुछ दिनों के अंदर पांच कुपोषित बच्चे मिले हैं. सभी बच्चों को बक्सर सदर अस्पताल के एनआरसी में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. इससे पहले अन्य और 5 बच्चों का इलाज चल रहा है जो जिले के विभिन्न प्रखंडो से आते हैं. लेकिन नावानगर प्रखंड से ही 5 कुपोषित बच्चों के मिलने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप का आलम है.

दो दिन पहले 13 जुलाई को नावानगर अस्पताल से आठ माह के मोहित कुमार को बक्सर रेफर किया गया. रेंका गांव निवासी मुनमुन साह के पुत्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में दाखिल कराया गया था. वहां से उसे एनआरसी केन्द्र बक्सर रेफर किया गया. जब यह खबर मीडिया को लगी तो अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाली गई. पता चला कि यह इकलौता केस नहीं है. 

अन्य चार बच्चे भी कुपोषण के शिकार पाए गए हैं. जिनमें सत्यम कुमार 11 माह पुत्र छोटन साह ग्राम रेंका, लवली कुमारी 3 वर्ष, पुत्री जगन्नाथ पाल, ग्राम ईकील, प्रीति कुमारी ढ़ाई वर्ष, पुत्री सुशील राम ग्राम बेलहरी, हसिना खातुन पांच वर्ष, पुत्री महबूब अंसारी, ग्राम बेलहरी शामिल हैं. अस्पताल में इलाजरत बच्चों का जायजा लेने जब हमारी टीम पहुची तो मौके से संबंधित चिकित्सक गायब मिले. इस बाबत जब वंहा मौजूद नर्स से बात की गई तो उसकी जुबान अटकने लगी. अब समझना आसान नही की बच्चों का इलाज भी यंहा भगवान भरोसे है.

दरअसल स्वास्थ्य विभाग इन मामलों से अनजान नहीं है. परिवार एवं कल्याण मंत्रालय भी इस तरह के आंकड़ों पर नजर रखता हैं. सभी चिकित्सकों को पता है अगर ऐसे मामले सामने आते हैं तो स्वास्थ्य विभाग के साथ आंगनबाड़ी केन्द्र तक पर सवाल खड़े होंगे. लेकिन, इतना सब कुछ होने के बावजूद जिले के बड़े अधिकारी अनजान बनकर बैठे हैं. स्वास्थ्य महकमे भी गोलमोल जबाब देकर खाना पूर्ति में जुटा है.

बच्चों का इलाज करा रहे परिजनों ने बताया कि पीडीएस डीलरों द्वारा सरकारी अनाज भी समय से उन्हें नहीं मिलता है. अक्सर ऐसा देखा जाता हैकि सरकारी योजना के तहत अनाज का लाभ नहीं मिलने से भी ऐसी समस्या आती है.

आपको बताते दें कि पिछले साल इसी जिले के कोरानसराय में भूख से दो बच्चों की मौत के बाद मामले ने काफी तूल पकड़ा था. बावजूद इसके प्रशासनिक महकमे को कोई फर्क नहीं पड़ता.