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मधेपुरा: एक तरफ बाढ़ से बेहाल हैं लोग, दूसरी तरफ राहत सामग्री में हो रहा है घोटाला!

जिले के आपदा प्रबंधन एडीएम से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पहले दिन के पैकेट में ही गलती से ढाई किलो ग्राम चूड़ा के जगह पर मात्र दो किलो ग्राम चूड़ा दिए जाने बात सामने आई थी. 

मधेपुरा: एक तरफ बाढ़ से बेहाल हैं लोग, दूसरी तरफ राहत सामग्री में हो रहा है घोटाला!
बाढ़ राहत सामग्री में घोटाला की आशंका.

शंकर कुमार, मधेपुरा : बिहार के मधेपुरा (Madhepura) के आलमनगर और चौसा में बाढ़ (Bihar Flood) पीड़ितों का बुरा हाल है. जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल के आलमनगर और चौसा में कोसी नदी उफान पर है, जिससे भारी तबाही मच रही है. दरअसल, दोनों प्रखंडों के करीब एक दर्जन से ज्यादा पंचायतों में कोसी नदी का पानी प्रवेश कर चुका है. ऐसे में एक लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. जहां सड़कें पानी से लबालब हैं वहीं, लोगों के घरों में भी जलजमाव की स्थिति है.

राहत के नाम पर जिला प्रशासन ने पिछले 3 अक्टूबर से ही ढाई किलो चूड़ा, आधा किलो चीनी और एक किलो चना देने का प्रारंभ जरूर कर दिया है, लेकिन बाढ़ पीड़ित इस में घोटाले का आरोप लगा रहे हैं. सरकारी मापदंड के अनुसार पीड़ितों को राहत सामग्री नहीं दी जा रही है.

बिहार सरकार के मंत्री और सिंहेश्वर के जेडीयू विधायक डॉ रमेश ऋषिदेव का दावा है सरकार हर क्षेत्र में काम कर रही है, खासकर सरकार के खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का ही है, लेकिन उनके इन दावों से इतर जिले के लोग आक्रोशित हैं. लेकिन इसकी हकित 4 किलो के राहत पैकेट से लगायी जा सकती है.

कई जगह जी मिडिया की पड़ताल में भी राहत सामग्री के पैकेट में गड़बड़ी पाई गई. हर पैकेट में औसतन 500 से 600 ग्राम चूड़ा कम पाया गया, वहीं चना और चीनी भी तय मात्रा से कम पाई गई. इसके बाद जी मिडिया के पहल पर आपदा के अधिकारी ने भी राहत पैकेट का वजन करवाया जिसमें वजन तय मात्रा से कम पाया गया है. 

इस संबंध में जब जिले के आपदा प्रबंधन एडीएम से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पहले दिन के पैकेट में ही गलती से ढाई किलो ग्राम चूड़ा के जगह पर मात्र दो किलो ग्राम चूड़ा दिए जाने बात सामने आई थी. आपदा प्रबंधन के अधिकारी ने कहा इस हिसाब से ही संवेदक का बिल काटा जाएगा. वहीं बिहार सरकार के मंत्री डॉ. रमेश ऋषिदेव ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जाँच कर कार्रवाई करने की बात भी कही है , साथ हीं उन्होंने कहा कि डीएम से बात कर मामले की जांच की जाएगी और दोषी कर्मचारी पर कार्रवाई की जाएगी.

बाढ़ पीड़ित लोग ऊंची जगहों पर शरण ले रहे हैं. लोगों का आरोप है की जिला प्रशासन अनजान बने बैठे है और लोगों तक राहत नहीं पहुंचा रहा है. लोगों ने बताया की जिला प्रशासन ने करीब 1 महीने बाद फूड पैकेट उपलब्ध कराए हैं. मधेपुरा के दो प्रखंड आलमनगर और चौसा की एक लाख आबादी बीते एक महीने से बाढ़ प्रभावित है. कोशी का दियारा इलाका होने के कारण इस क्षेत्र में हर साल बाढ़ आती है लेकिन इस बार की बाढ़ ने 2017 की बाढ़ जैसे तबाही हालात बना दिए हैं. जिले में राहत कार्य तेजी से चलने का दावा जरूर किया जा रहा है लेकिन सरकारी दावों की पोल यहां खुलती हुई नजर आ रही है. बाढ़ पीड़ित अब कुदरत से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

-- Saloni Shrivastava, News Desk