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मुंगेर: बाढ़ पीड़ित शिविर में गंदे पानी से धुले बर्तन में खाने को मजबूर, पीने के लिए भी नहीं है पानी

बिहार में बाढ़ के हालात हैं और इस आफत से मुंगेर भी अछूता नहीं है. ले में बाढ़ ने तांडव मचा रखा है. सैकड़ों घरों में पानी घुसा हुआ है. गांव के गांव टापू में तब्दील हो गए हैं. हैरानी की बात ये है कि जंहा एक तरफ सरकार बाढ़ पीड़ितों के लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्था करने की बात कहती है, वहीं दूसरी ओर मुंगेर में कुव्यस्थाओं के बीच बाढ़ राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जो सरकारी दावों की पोल खोलती नज़र आती हैं. इन शिविरों में पीने के पानी की व्यस्था नहीं होने के कारण बाढ़ पीड़ित शिविर के पास गंदे पानी में खाने के बर्तन धोकर खाने को और इसी गंदे पानी को पीने के लिए मजबूर हैं. 

मुंगेर: बाढ़ पीड़ित शिविर में गंदे पानी से धुले बर्तन में खाने को मजबूर, पीने के लिए भी नहीं है पानी

मुंगेर: बिहार में बाढ़ के हालात हैं और इस आफत से मुंगेर भी अछूता नहीं है. ले में बाढ़ ने तांडव मचा रखा है. सैकड़ों घरों में पानी घुसा हुआ है. गांव के गांव टापू में तब्दील हो गए हैं. हैरानी की बात ये है कि जंहा एक तरफ सरकार बाढ़ पीड़ितों के लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्था करने की बात कहती है, वहीं दूसरी ओर मुंगेर में कुव्यस्थाओं के बीच बाढ़ राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जो सरकारी दावों की पोल खोलती नज़र आती हैं. इन शिविरों में पीने के पानी की व्यस्था नहीं होने के कारण बाढ़ पीड़ित शिविर के पास गंदे पानी में खाने के बर्तन धोकर खाने को और इसी गंदे पानी को पीने के लिए मजबूर हैं. 

दरअसल मुंगेर जिले में 6 प्रखंडों के 18 पंचायत के लोग लगभग 12 दिनों से बाढ़ के पानी से परेशान हैं, वहीं बाढ़ को देखते हुए जिला प्रशासन की तरफ से कुछ दिन पहले चार राहत शिविरों की शुरूआत की गई. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जिलाधिकारी राजेश मीणा ने बाढ़ की को देखते हुए सोमवार से कई प्रखंडों में कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की, जहां बाढ़ पीड़ित आकर दो वक्त का खाना खा सके.

 

लेकिन शहरी इलाके में नंद कुमार हाई स्कूल में भयावह हालात देखने को मिले. इस शिविर में साफ पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बाढ़ पीड़ित स्कूल में जमे गंदे बारिश के पानी से खाने के बर्तन धोकर और उसी गंदे पानी में धुले बर्तन में खाने को मजबूर हैं. यहां तक की शिविर में शरण लिए हुए लोग इसी गंदे पानी का इस्तेमाल पीने के लिए भी कर रहे हैं.

आपको बता दें कि सदर प्रखंड के आदर्श ग्राम टिकारामपुर, चंडी मरण टोला, मंडल टोला चंडी स्थान के लगभग एक हजार बाढ़ पीड़ितों, जिसमे बच्चे-बूढ़े-महिलाएं भी शामिल हैं, इन्हें रेसक्यू किया गया और पीड़ितों को जिला प्रशासन ने नंद कुमार हाई स्कूल में सोमवार को शिफ्ट किया. राहत शिविर में जिला प्रसाशन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन की व्यवस्था की. बाढ़ पीड़ितों को प्लास्टिक के प्लेट में खाना खिलाया गया.

वहीं जब इस मामले पर जिलाधिकारी राजेश मीणा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अधिकारियों को भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी और जल्द ही स्थिति को नियंत्रित किया जाएगा.