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मधुबनी के टेड़ा गांव ने बाढ़ ने मचाई तबाही, ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट है भयावह

 मधुबनी जिले में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है. जिससे जिले में 18 लोगों की मौत हो गई है. वहीं पूरे प्रदेश में बाढ़ से अब तक 97 लोगों की मौत हुई है. 

मधुबनी के टेड़ा गांव ने बाढ़ ने मचाई तबाही, ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट है भयावह
मधुबनी के टेड़ा गांव में बाढ़ ने मचाई है तबाही.

मधुबनीः बिहार के मधुबनी जिले में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है. जिससे जिले में 18 लोगों की मौत हो गई है. वहीं पूरे प्रदेश में बाढ़ से अब तक 97 लोगों की मौत हुई है. बाढ़ से सूबे के 12 जिले प्रभावित हैं. जिसमें 103 प्रखंडों के 1123 पंचायतों के लोग बाढ़ से पीड़ित हैं. इनकी आबादी 69.27 लाख है. वहीं, सरकार के द्वारा 1.14 लाख राहत शिविर चलाए जा रहे हैं साथ ही 859 सामुदायिक रसोई घर चलाए जा रहे हैं. एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की 26 टीमें लगातार बाढ़ इलाकों में काम कर रही हैं. जबकि राहत बचाव कार्य में 796 कर्मी लगे हुए हैं.

मधुबनी जिले के जयनगर प्रखंड के टेडा गांव में बाढ़ दृश्य काफी भयावह है. हालांकि, बारिश थमा है और नदी का जल स्तर बढ़ना भी कम हुआ है लेकिन ग्राउंड जिरो पर जो इस गांव की हालत है वह काफी भयावह है. गांव में बाढ़ ने काफी तबाही मचाई है. मधुबनी जिले के टेड़ा गांव के पास ही कममला बैराज स्थित है. जहां पर पानी अपनी रौद्र रूप में बह रही है. मानों वह इतनी तबही के बाद भी शांत होने के मुड में नहीं है

जी मीडिया की टीम जब टुटी सड़कें, टुटे बांध पर पैदल चलते हुए टेड़ा गांव पहुंची. रास्ते में एक पुल मिला जिसको देख कर यह कतई नहीं लग रहा था कि यहां ऐसी पानी का तेज धार होगा. क्योंकि 10 दिन पहले ही इस पूल पर एक फीट पानी बह रहा था. यहां बाढ़ का पानी आने के बाद ग्रामीणों की जिदंगी अस्त व्यस्त हो गई.

टेड़ा गांव जाने के क्रम में जो देखा वह बिल्कुल ही नया अनुभव था. नदी के धार में छोटे-छोटे बच्चे स्नान कर रहे थे. नदी में बच्चे केले पेड़ पर बैठ कर सवारी कर रहे थे. उन्हें मालूम ही नहीं है कि यही पानी गांव में तबाही का मंजर अपने पीछे छोड़ कर चला गया है. वहीं टूटे हुए कमला बलान के पूर्वी तटबंध पर सरकार के तरफ से सिमेंट के खाली बोरी में बालू भरकर आने जाने के लिये फिर से रास्ता बनाया जा रहा हैं. वहीं, जब टेड़ा गांव का दृश्य देखा तो पता चला कि आज तक सरकार या जनप्रतिनिधि की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है.

यहां के लोगों का कहना है मदद के लिए हमने बड़े अफसर को कई बार फोन किया पर कोई फोन रिसीव नहीं हुआ. वहीं एक युवक ने कहा कि हमने तो सुना था कि यहां पहले भी बाढ़ का पानी आया था. लेकिन इस बार उससे भी अधिक पानी आया है. युवक ने कहा कि कुछ भी नहीं बचा है सब बह गया है. खाने के लिये कुछ नहीं बचा है.

बहरहाल, टेड़ा गांव में जो भी दृश्य दिखा वह काफी रोंगटे खड़े करने वाली थी. वहीं, लोगों की विवशता देखकर ऐसा लग रहा था कि जो जनप्रतिनिधियों को उनके साथ खड़ा रहना चाहिए था वह उनके साथ नहीं हैं. साथ ही सरकार की नजर अभी भी इस गांव पर नहीं पड़ी है.